असंगठित मजदूरों की मांगों पर प्रबंधन झुका, 6 मांगें मानी गईं — शेष पर 10 दिन का समय
रांची : रांची जिले के खलारी में मधुकॉन साइलो प्रोजेक्ट के असंगठित मजदूरों द्वारा उठाई गई नौ सूत्री मांगों को लेकर चल रहे विवाद में आंशिक सहमति बन गई है। मजदूरों के समर्थन में झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के खलारी प्रखंड अध्यक्ष श्यामजी महतो एवं उनके सहयोगी कोषाध्यक्ष सुभाष प्रजापति, सरफराज खान, कुंदन कुमार, पवन उरांव एवं अन्य झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्तागण के नेतृत्व द्वारा दिए गए अल्टीमेटम के बाद प्रबंधन ने छह प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया है, जबकि शेष तीन मांगों पर निर्णय के लिए 10 दिनों का समय मांगा गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मजदूरों ने वेतन भुगतान की समय सीमा, कार्य अवधि, सरकारी दर से वेतन, साप्ताहिक अवकाश, पीएफ जमा, मेडिकल सुविधा, नियुक्ति-पत्र, उपस्थिति कार्ड सहित अन्य मुद्दों को लेकर प्रबंधन को 3 अप्रैल 2026 को ज्ञापन सौंपा था। इसमें 8 अप्रैल तक मांगें पूरी नहीं होने पर 9 अप्रैल से अनिश्चितकालीन धरना देने की चेतावनी दी गई थी।
प्रबंधन की ओर से जारी टिप्पणी में बताया गया कि वेतन भुगतान 1 से 10 तारीख के बीच करने, पेयजल, मेडिकल सुविधा और आई-कार्ड जैसी सुविधाओं को तत्काल प्रभाव से लागू करने पर सहमति बन गई है। हालांकि पीएफ जमा करने और कंपनी द्वारा सीधे वेतन भुगतान जैसे मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है।
वहीं, 8 घंटे की ड्यूटी, सरकारी दर से वेतन वृद्धि और महीने में 26 दिन कार्य जैसे तीन अहम मांगों पर जीएम स्तर पर सकारात्मक आश्वासन दिया गया है। प्रबंधन ने इन मांगों को लागू करने के लिए 18 अप्रैल तक का समय मांगा है।
इधर, झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के प्रतिनिधियों ने कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा तक शेष मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो मजदूरों के साथ शांतिपूर्ण आंदोलन किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी।
इस बीच, एक सकारात्मक कदम उठाते हुए प्रबंधन ने पूर्व में कार्य से हटाए गए चार मजदूरों को पुनः ड्यूटी पर बहाल करने का निर्णय लिया है, जिससे मजदूरों में आंशिक संतोष देखा जा रहा है।
रिपोर्टर : राशीद अंसारी


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