20 वर्षों से मधुमक्खी पालन में जुटे राजेश कुमार
20 वर्षों से मधुमक्खी पालन में जुटे राजेश कुमार, ‘आकांक्षा हनी’ से बना रहे पहचान
रांची/खालारी- धमधमीया खालारी (रांची) निवासी राजेश कुमार, जो ‘आकांक्षा हनी’ के नाम से जाने जाते हैं, पिछले 20 वर्षों से इटालियन मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपनी मेहनत और अनुभव के दम पर उन्होंने इस व्यवसाय में एक अलग पहचान बनाई है। वर्तमान में उनके पास करीब 500 मधुमक्खी बॉक्स हैं, जिनसे वे बड़े पैमाने पर शहद उत्पादन कर रहे हैं।
राजेश कुमार बताते हैं कि वे अपने द्वारा उत्पादित शहद को थोक में बड़ी कंपनियों को बेचते हैं। इसके साथ ही वे मधुमक्खियों की भी बिक्री करते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त होती है।
उन्होंने बताया कि मधुमक्खी पालन में ‘माइग्रेशन’ यानी स्थान परिवर्तन बेहद जरूरी होता है। फूलों की उपलब्धता के अनुसार वे अपने मधुमक्खी बॉक्स को अलग-अलग राज्यों में ले जाते हैं, ताकि अधिक से अधिक शहद उत्पादन हो सके।
माइग्रेशन के क्रम में नवंबर माह में वे डाल्टनगंज में वनतुलसी के फूलों के लिए जाते हैं, दिसंबर में छत्तीसगढ़ के सरगुजा क्षेत्र में, जनवरी में राजस्थान के भरतपुर में सरसों के फूलों के लिए, मार्च में बिहार के मुजफ्फरपुर में लीची के फूलों के लिए तथा मई में झारखंड के गुमला जिले में करंज के फूलों के लिए मधुमक्खियों को ले जाया जाता है।
उन्होंने बताया कि करंज फूल के बाद लगभग चार महीनों तक ऑफ सीजन रहता है, जिसमें मधुमक्खियों को पर्याप्त रस (नेक्टर) नहीं मिल पाता। इस दौरान वे अपनी मधुमक्खियों को झारखंड के रामगढ़ जिले में रखते हैं, जहां उन्हें रानी मधुमक्खी के भोजन के लिए आवश्यक नेक्टर और पोलेन उपलब्ध कराया जाता है।
राजेश कुमार का कहना है कि मधुमक्खी पालन एक लाभकारी व्यवसाय है, लेकिन इसके लिए निरंतर मेहनत, सही प्रबंधन और मौसम के अनुसार योजना बनाना बेहद जरूरी होता है। उन्होंने युवाओं से इस क्षेत्र में आगे आने की अपील करते हुए कहा कि सही प्रशिक्षण और समर्पण के साथ यह रोजगार का बेहतर विकल्प बन सकता है।
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