मंत्रालय में मीडिया प्रवेश पर रोक के खिलाफ JJA ने जताया कड़ा विरोध
रांची : झारखंड मंत्रालय (प्रोजेक्ट भवन) में मीडियाकर्मियों के प्रवेश पर रोक लगाए जाने के फैसले को लेकर पत्रकार संगठनों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन (JJA) ने मंत्रालय में मीडिया की एंट्री पर रोक के निर्णय की कड़ी निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और पत्रकारिता की स्वतंत्रता के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया है।
JJA के प्रदेश अध्यक्ष अभय कुमार लाभ और प्रदेश महासचिव संजीव समीर ने मंत्रालय में पत्रकारों के प्रवेश पर रोक को लेकर सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। दोनों पदाधिकारियों ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के महत्वपूर्ण प्रहरी हैं और शासन-प्रशासन की गतिविधियों को जनता तक पहुंचाना उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। ऐसे में समाचार संकलन के लिए मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण सरकारी केंद्र में पत्रकारों की पहुंच सीमित करना उचित नहीं है।
JJA के संस्थापक शाहनवाज हसन ने इस मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा में पत्रकारों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने मंत्रालय में मीडिया के प्रवेश पर रोक को पत्रकारों के काम में बाधा बताते हुए सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की।
कैबिनेट बैठक की कवरेज का बहिष्कार
मंत्रालय में प्रवेश को लेकर उत्पन्न विवाद का असर बुधवार को कैबिनेट बैठक की कवरेज पर भी दिखाई दिया। राजधानी रांची के पत्रकारों ने मंत्रालय में प्रवेश पर रोक के विरोध में कैबिनेट बैठक की कवरेज का बहिष्कार किया। इस दौरान पत्रकारों के कैमरे झुके रहे और माइक-आईडी जमीन पर रखे नजर आए।
पत्रकारों के इस सांकेतिक विरोध ने सरकार और मीडिया के बीच बढ़ती दूरी को सार्वजनिक रूप से सामने ला दिया। पत्रकारों का कहना है कि यदि मंत्रालय में प्रवेश और समाचार संकलन को लेकर इस तरह की पाबंदियां जारी रहती हैं तो सरकार की नीतियों और फैसलों की स्वतंत्र एवं प्रत्यक्ष रिपोर्टिंग प्रभावित हो सकती है।
संवाद के जरिए समाधान की मांग
JJA ने सरकार से पूरे मामले में पत्रकार संगठनों के साथ संवाद स्थापित करने और मीडिया के मंत्रालय में प्रवेश से संबंधित व्यवस्था को स्पष्ट करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि सरकार और मीडिया के बीच स्वस्थ संवाद लोकतंत्र के लिए जरूरी है। पत्रकारों को समाचार संकलन से रोकने के बजाय ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए जिससे सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ स्वतंत्र पत्रकारिता भी सुनिश्चित हो सके।
JJA नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना और उसके कामकाज की जानकारी जनता तक पहुंचाना पत्रकारिता का मूल दायित्व है। इसलिए मीडिया और सरकार के बीच टकराव की स्थिति पैदा करने के बजाय बातचीत के माध्यम से समाधान निकाला जाना चाहिए।
मंत्रालय में पत्रकारों की एंट्री को लेकर उठे इस विवाद ने झारखंड में सरकार और मीडिया के संबंधों पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। अब निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह पत्रकार संगठनों की आपत्तियों पर क्या रुख अपनाती है और मंत्रालय में मीडिया की प्रवेश व्यवस्था को लेकर क्या निर्णय लेती है।
रिपोर्टर : राशीद अंसारी
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