सिरमौर थाने में कानून का खुलेआम कत्ल

रीवा : सिरमौर थाने में कानून का खुलेआम कत्ल,थाना प्रभारी ने फरियादी को दी हत्या करने की धमकी, VIDEO हुआ वायरल मोहन सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर खड़े हुए गंभीर सवाल ,न्याय मांगने गये फरियादी को लौटाया गया गालियों और जान से मारने की धमकी के साथ।

अगर यह वीडियो किसी अपराधी का होता तो अब तक कार्रवाई हो चुकी होती, लेकिन वीडियो में खुद थाना प्रभारी हैं,इसलिए पूरा सिस्टम चुप है। रीवा जिले के सिरमौर थाना से सामने आया एक वायरल वीडियो मध्य प्रदेश पुलिस की कार्यशैली पर ऐसा तमाचा है, जिसकी गूंज राजधानी भोपाल तक सुनाई देनी चाहिए।वीडियो में सिरमौर थाना प्रभारी दीपक तिवारी वर्दी की गरिमा को तार-तार करते हुए एक फरियादी के साथ गाली-गलौज,बदसलूकी और हत्या की धमकी देते साफ नजर आ रहे हैं। इस घटना ने यह गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अब थाने न्याय के नहीं, बल्कि डर और दबदबे के अड्डे बनते जा रहे हैं? फरियादी की ‘गलती’ बस इतनी थी कि वह न्याय मांगने थाने पहुंच गया
प्राप्त जानकारी के अनुसार सुभाष पाण्डेय पिता रामानुज पाण्डेय, निवासी सिरमौर, अपने पड़ोसियों से लंबे समय से चले आ रहे जमीनी विवाद को लेकर थाने पहुंचे थे। फरियादी का कहना है कि उन्होंने कानून के रास्ते समाधान की उम्मीद में पुलिस से गुहार लगाई थी।
लेकिन थाने में उनके साथ जो हुआ, वह किसी सभ्य समाज में कल्पना से परे है। आरोप है कि थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों ने पहले तो उन्हें टालने की कोशिश की और जब उन्होंने अपनी शिकायत पर कार्रवाई की मांग की, तो थाना प्रभारी दीपक तिवारी आपा खो बैठे।VIDEO में कैद ‘वर्दी की गुंडागर्दी’
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में थाना प्रभारी सरेआम चिल्लाते हुए कहते सुने जा सकते हैं—
“जहां जाना है जाओ, मैं मदद नहीं करूंगा… ज्यादा करोगे तो तुम्हारी हत्या कर दूंगा!”
वीडियो में थाना प्रभारी का हाव-भाव, शब्दों की मर्यादा और धमकी भरा लहजा यह साफ दिखाता है कि वह कानून के रक्षक नहीं, बल्कि कानून से ऊपर खुद को समझ रहे हैं। सवाल यह है कि अगर एक थाना प्रभारी ही हत्या की धमकी देने लगे तो आम नागरिक किससे सुरक्षा की उम्मीद करे?
 समाजसेवियों में उबाल, जनता में डर वीडियो सामने आने के बाद समाजसेवियों और स्थानीय नागरिकों में जबरदस्त आक्रोश है। लोगों का कहना है कि—
“वर्दी क्या पहन ली, क्या किसी आम आदमी को गाली देने और मारने की खुली छूट मिल गई?
अगर थाना प्रभारी ही सड़कछाप गुंडों जैसी भाषा बोलेगा, तो अपराधियों का हौसला क्यों नहीं बढ़ेगा?”लोगों का यह भी कहना है कि आज हालात ऐसे बन चुके हैं कि—
गरीब और कमजोर फरियादी थाने जाने से डरते हैं रसूखदारों की शिकायतें तुरंत सुनी जाती हैं और आम आदमी को अपमान और धमकी मिलती है
मोहन सरकार और पुलिस महकमे से तीखे सवाल
यह मामला सीधे तौर पर प्रदेश सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति पर सवाल खड़े करता है।
क्या यही है सरकार का दावा किया गया सुशासन?क्या थाने अब न्याय के केंद्र नहीं, बल्कि सत्ता के नशे में चूर अधिकारियों की जागीर बन चुके हैं?क्या फरियादी की जान की कोई कीमत नहीं?अगर एक थाना प्रभारी खुलेआम हत्या की धमकी देता है और फिर भी उस पर कार्रवाई नहीं होती, तो यह संदेश जाता है कि कानून सिर्फ कागजों में है, जमीन पर नहीं।कार्रवाई नहीं हुई तो संदेश बेहद खतरनाक होगा
यदि इस वायरल वीडियो के बाद भी थाना प्रभारी को तत्काल निलंबित नहीं किया गया,
उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई,और स्वतंत्र, निष्पक्ष जांच नहीं बैठी,तो यह साफ हो जाएगा कि मध्य प्रदेश में
कानून से बड़ा पद है।
और न्याय से बड़ा रसूख।
जनता अब सवाल पूछ रही है—
क्या अगला फरियादी भी ऐसे ही धमकाया जाएगा?
या फिर अब सिस्टम जागेगा?

रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी 

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