रीवा में प्रशासनिक संरक्षण में फल-फूल रहा है 'मौत का नया अड्डा'!"
रीवा : क्या रीवा का स्वास्थ्य विभाग किसी और लाश के गिरने का इंतज़ार कर रहा है? क्या यहाँ का प्रशासन रसूखदारों के आगे नतमस्तक हो चुका है? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि 'अष्टभुजा हॉस्पिटल जवा' में एक प्रसूता और उसके मासूम बच्चे की जान लेने वाला आरोपी आज फिर से नईगढ़ी जिला मऊगंज में उसी जगह पर अपनी नई 'वधशाला' सजाकर बैठा है जहां उसने लगभग 2021-22 में अस्पताल खोलकर मरीज को मौत की नींद सुलाने के बाद नईगढ़ी से अस्पताल बंद करके जुलाई 2023 में अष्टभुजा हॉस्पिटल जवा में मौत की दुकान खोल लिया। यहां जवा में दिनांक 17 मार्च 2024 को प्रसूता निकिता सिंह की सीजेरियन डिलेवरी करवाने के लिए परिजनों को धोखे में रखकर एडमिट करके इलाज किया गया, इलाज के लिए पैसे लिया गया, धोखे में रखकर सीजेरियन प्रसव के लिए परिजनों से पेपर में साइन करवाया गया, प्रसूता को गैर कानूनी तरीके से बिना सर्जन, बिना एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, बिना ऑपरेशन थियेटर टेक्नीशियन, बिना स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ के अस्पताल में 4.30 घंटे तक रखा गया और बाहर से डॉक्टर बुलाया जाकर मौत की नींद सुला दिया गया था। मौत होने के बाद एम्बुलेंस से 40 किलोमीटर बिना रेफर पेपर के दूसरे अस्पताल भेज दिया गया और एम्बुलेंस जिसका फिटनेस 10 साल पहले और बीमा भी खत्म था खत्म हो गया था में अवैध परिवहन किया जाकर नियमों का खुला उल्लंघन किया गया। ताज्जुब की बात यह है कि इस नए अस्पताल के पास सीजेरियन ऑपरेशन की अनुमति तक नहीं थी, फिर भी यहाँ खुलेआम चीर-फाड़ (सीजेरियन डिलीवरी) का खेल जारी था। यही कांड यह अस्पताल संचालक नई गढ़ी में कर रहा है और सिस्टम हाथ में हाथ धरे बैठा है क्या किसी और लाश के गिरने का इंतजार जिला नर्सिंग होम प्रभारी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी रीवा कर रहे हैं ??
*सरकारी पोर्टल (NHS) की सूची से नाम नदारद, फिर भी धड़ल्ले से 'चीर-फाड़'*
डिजिटल इंडिया के दौर में जब हर अनुमति ऑनलाइन है, तब रीवा में नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। मध्य प्रदेश सरकार के आधिकारिक NHS पोर्टल की 'प्रसूति एवं स्त्री रोग' (Obs & Gyny) की वैधानिक सूची में इस अष्टभुजा हॉस्पिटल नईगढ़ी अस्पताल का दूर-दूर तक नाम नहीं है। कानूनन, यह संस्थान प्रसव या सीजेरियन के लिए अधिकृत ही नहीं है। बावजूद इसके, अस्पताल के बाहर बड़े-बड़े बोर्ड लगाकर जनता को मौत के जाल में फँसाया जा रहा है। सवाल यह है कि CMHO कार्यालय ने किस 'काली कमाई' के बदले इस अवैध विज्ञापन पर अपनी आँखें मूँद रखी हैं?
*अष्टभुजा कांड: तत्कालीन सीएमएचओ रीवा डॉ संजीव शुक्ला ने इस केस को दबा दिया, खंड चिकित्सा अधिकारी जवा द्वारा पत्र लिखने के बाद भी 5 महीने तक कोई कार्यवाही नहीं की
मार्च 2024 में अष्टभुजा हॉस्पिटल जवा में हुई दो मौतों के बाद जिला प्रशासन का दोहरा चेहरा सामने आया था। घटना के दो दिन बाद ही सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज करवाई गई थी जिस पर तत्कालीन सीएमएचओ डॉ संजीव शुक्ला और जिला नर्सिंग होम प्रभारी विजय तिवारी के द्वारा कोई जांच एवं कार्यवाही नहीं की गई। 27 मई 2024 को खंड चिकित्सा अधिकारी जवा जिला रीवा द्वारा अस्पताल के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए सीएमएचओ रीवा को पत्र भेजा गया लेकिन सीएमएचओ द्वारा 5 माह तक कोई जांच एवं कार्यवाही नहीं की गई थीं। सीएम हेल्पलाइन में फर्जी जांच प्रतिवेदन दर्ज करके फोर्स क्लोज कर दिया जाता था। पीड़ित के द्वारा स्थानीय अधिकारियों सीएमएचओ द्वारा 7 महीने तक कोई कार्यवाही न करने और सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों को फोर्स क्लॉज कर देने की वजह से मुख्यमंत्री आवास (भोपाल) में 23/10/2024 को शिकायत किया गया। मुख्यमंत्री आवास भोपाल से रीवा के अधिकारियों को भेजी गई शिकायत पर अधिकारीयों की कुंभकर्णी नींद खुली और तत्काल जांच टीम का गठन करके दिनांक 28/10/2024 को अष्टभुजा हॉस्पिटल जवा में छापा मारा गया तो अस्पताल संचालक की गंभीर लापरवाही सामने आई थी। बिना डॉक्टर के मरीजों का इलाज किया जा रहा था। जिस पर अस्पताल सीज करके अस्पताल संचालक को नोटिस जारी किया गया था। जारी की गई नोटिस में तत्कालीन सीएमएचओ रीवा द्वारा प्रसूता की मौत ही गायब कर दिया गया। जबकि सीएम हाउस भोपाल को की गई शिकायत में प्रसूता की इलाज में लापरवाही से मौत होने की शिकायत की गई थीं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में 'मौत' के तथ्य को ही गायब कर दिया। आरोपी अस्पताल संचालक और डॉक्टरों को बचाने के लिए तत्कालीन सीएमएचओ डॉ संजीव शुक्ला ने अष्टभुना हॉस्पिटल जवा का लाइसेंस और पंजीयन रद्द करने का आवेदन तत्काल स्वीकार कर लिया और प्रसूता की मौत की जांच किए बिना अष्टभुजा हॉस्पिटल जवा जिला रीवा का लाइसेंस रद्द करके सुरक्षित रास्ता मुहैया करा दिया गया। प्रसूता की मौत की जांच किए बिना लाइसेंस रद्द करना यह साबित करता है कि स्थानीय स्वास्थ्य विभाग और अपराधी के बीच गहरा गठबंधन है।।
अष्टभुजा हॉस्पिटल नईगढ़ी जिला मऊगंज का लाइसेंस सवालों के घेरे में
अष्टभुजा हॉस्पिटल नईगढ़ी को जारी किया गया लाइसेंस सवालों के घेरे में है। आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों से पता चला कि अस्पताल संचालक द्वारा अस्पताल का लाइसेंस लेने के लिए 30 जनवरी 2025 को शाम 5.19 बजे आवेदन किया गया और उसी दिन रात्रि 8.45 पर सीएमएचओ कार्यालय रीवा से लाइसेंस एवं पंजीयन जारी कर दिया गया। RTI से प्राप्त दस्तावेजों से खुलासा हुआ है अस्पताल संचालक द्वारा जो प्रदूषण प्रमाण पत्र लगाया गया है आवेदन के साथ वह 4 साल पुराना है जो कि 2021 में जारी हुआ था। सवाल ये है नईगढ़ी में अष्टभुजा हॉस्पिटल लगभग वर्ष 2021- 22 में वहीं संचालित था वहां भी मरीज की मौत हुई थी इलाज में लापरवाही से तब वहां से लाइसेंस रद्द करवाकर अष्टभुजा हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के नाम से जवा में अस्पताल खोला गया था अब जवा में भी प्रसूता और जच्चा बच्चा को मौत की नींद सुलाकर वापस नईगढ़ी में उसी दस्तावेज का इस्तेमाल करके अस्पताल खोला गया है?? इसी तरह फायर ऑडिट रिपोर्ट अगस्त 2024 की लगी है जब अष्टभुजा हॉस्पिटल नईगढ़ी वहां संचालित नहीं था अष्टभुजा हॉस्पिटल नईगढ़ी का अगस्त 2024 में ही फायर ऑडिट रिपोर्ट जारी हो जाना और उपकरण फिट हो जाना सवालों के घेरे में है। नईगढ़ी में अस्पताल खोलने का किरायानामा जनवरी 2025 में बना था तो कई सवाल खड़े करता हैं। आवेदन के साथ बिजली विभाग को दिया गया दुरुस्ती रिपोर्ट(पालन प्रतिवेदन) नवंबर 2022 का है जिसमें पता अष्टभुजा हॉस्पिटल सेमरिया जिला रीवा दर्ज हैं। सवाल ये है अस्पताल नईगढ़ी में चल रहा है और सेमरिया लगभग 70 किलोमीटर दूर है (गूगल लोकेशन)तो अष्टभुजा हॉस्पिटल सेमरिया का दस्तावेज लगाने की क्या जरूरत पड़ी। क्या अधिकारियों ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया था या बिना सत्यापन के दस्तावेज जारी कर दिया।
*दिव्यांग पति का 'स्टिंग' और अधिकारियों की बेशर्मी*
अपनी पत्नी और अजन्मे बच्चे को खोने वाला एक बेबस श्रवण बाधित दिव्यांग युवक आज अकेले इस भ्रष्ट तंत्र से लड़ रहा है। पीड़ित ने अपनी जान जोखिम में डालकर व्हाट्सएप मैसेज की स्क्रीन रिकॉर्डिंग सार्वजनिक की है, जिसमें नईगढ़ी अस्पताल का संचालक स्वीकार कर रहा है कि अस्पताल में सीजेरियन डिलीवरी हो जाएगी जब सवाल किया गया कि सीजेरियन डिलेवरी अनुमति नहीं है तो कैसे सीजेरियन डिलेवरी करवा रहे है तो संचालक ने जवाब दिया दूसरे हॉस्पिटल से करवा लाते है। आखिर सवाल ये है वो कौन दूसरा हॉस्पिटल है जिसमें सीजेरियन डिलेवरी के लिए भेजा जाएगा या वहां से डॉक्टर बुलाकर बिना अनुमति के सीजेरियन डिलेवरी करवाया जाएगा?? दूसरे अस्पताल से सीजेरियन करवाने के लिए लेकर आते जाते समय अगर मरीज की मौत हो गई तो उसका जिम्मेदार कौन होगा??
पीड़ित ने सवाल किया आप मेरी पत्नी का अष्टभुजा हॉस्पिटल जवा में मर्डर करके क्यों फरार चल रहे हो तो नईगढ़ी अस्पताल के संचालक ने पैसे वसूलने का नाटक करने का आरोप लगा दिया है सवालों का जवाब न देकर तुरंत ब्लॉक कर दिया।
*प्रशासन को सीधी चुनौती: कब होगी FIR और कब सील होगा 'मौत का कारखाना'?*
अष्टभुजा हॉस्पिटल जवा में हुई प्रसूता और जच्चा बच्चा की मौत की पुलिस थाना जवा द्वारा जांच पूरी हो चुकी है जिसमें बिना डॉक्टर के एडमिट करके रखना और इलाज में गंभीर लापरवाही से मौत होना पाया गया है। पुलिस जांच में तकनीकी साक्ष्य भी साबित कर चुकी है कि घटना के समय डॉक्टर नदारद थे और कर्मचारी अज्ञात व्यक्तियों से लगातार सम्पर्क में थे। *NHS पोर्टल* गवाही दे रहा है कि सीजेरियन डिलेवरी के लिए अस्पताल अनधिकृत था। फिर भी FIR दर्ज न करना पुलिस की कार्यप्रणाली पर कालिख पोत रहा है। थाना प्रभारी जवा द्वारा यह कहना पुलिस अधीक्षक से मिलिए एफआईआर हो जाएगी इससे यही उजागर होता है कि पुलिस अधीक्षक रीवा द्वारा आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश न देना संरक्षण देना उजागर करता है।
रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी


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