न्याय की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता, सत्य देर-सवेर सामने अवश्य आता है — पंडित संजय त्रिपाठी

रीवा :  बिहार में विगत दिनों हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर प्रकरण को लेकर अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय त्रिपाठी ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की वास्तविक शक्ति जनता का विश्वास होता है, और यह विश्वास तभी कायम रहता है जब शासन-प्रशासन पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय के सिद्धांतों पर कार्य करे।

उन्होंने कहा कि आज का नागरिक जागरूक, संवेदनशील और अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति पूरी तरह सजग है। जनता हर महत्वपूर्ण घटना पर सत्य, पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की अपेक्षा रखती है। यदि किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय हुआ है, तो यह केवल एक व्यक्ति या परिवार का मामला नहीं रह जाता, बल्कि यह संविधान, कानून के शासन और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन जाता है।

संजय त्रिपाठी ने बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कराई जाए, ताकि सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जा सके और जनता के मन में उठ रहे सवालों का संतोषजनक उत्तर मिल सके। उन्होंने कहा कि न्याय में अनावश्यक विलंब भी अन्याय का ही एक स्वरूप माना जाता है, इसलिए सत्य को सामने लाना और यदि कहीं कोई त्रुटि या दोष पाया जाता है तो उस पर निष्पक्ष कार्रवाई करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज भारत इस विषय को केवल एक सामाजिक या क्षेत्रीय मुद्दे के रूप में नहीं देखता, बल्कि इसे न्याय, मानवाधिकार, नागरिक सम्मान और संवैधानिक मूल्यों से जुड़े महत्वपूर्ण विषय के रूप में मानता है। संगठन पीड़ित परिवार के साथ संवेदनात्मक रूप से खड़ा है और न्याय मिलने तक लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक दायरे में अपनी आवाज़ उठाता रहेगा।

संजय त्रिपाठी ने देश के युवाओं, बुद्धिजीवियों, सामाजिक संगठनों और न्यायप्रिय नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि वे शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीकों से न्याय की मांग को मजबूत करें। हमारा उद्देश्य किसी व्यक्ति, राजनीतिक दल या संस्था का विरोध करना नहीं, बल्कि न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

उन्होंने आगे कहा कि सत्ता और पद समय के साथ बदलते रहते हैं, लेकिन जनता की अदालत सर्वोपरि होती है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब-जब जनता की आवाज़ को अनसुना किया गया है, तब-तब जनमत ने अपना निर्णायक मत दिया है।
अंत में उन्होंने कहा कि हमारा पूर्ण विश्वास संविधान, न्यायपालिका और लोकतांत्रिक संस्थाओं में है। हमारी मांग केवल इतनी है कि सत्य को सामने लाया जाए, सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए और पीड़ित पक्ष को समयबद्ध न्याय सुनिश्चित किया जाए। यही सुशासन, कानून के राज और सशक्त लोकतंत्र की वास्तविक पहचान है।

रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी 

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