गुढ़ नगर परिषद में सियासी महाभारत!13 पार्षदों का अध्यक्ष अर्चना सिंह पर बड़ा हमला

रीवा :  गुढ़ नगर परिषद की राजनीति अब खुली जंग में बदल गई है। नगर परिषद अध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह की प्रेस वार्ता के बाद अब 13 पार्षदों ने संयुक्त मोर्चा खोलते हुए ऐसा पलटवार किया है, जिसने स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी है। पार्षदों ने अध्यक्ष पर करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं, भ्रष्टाचार, फर्जी भुगतान, घटिया निर्माण और प्रशासनिक मनमानी जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए पूरे कार्यकाल की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग कर दी है।
पार्षदों ने अध्यक्ष के उस बयान को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि गुढ़ विधायक नागेन्द्र सिंह ने उन्हें रीवा स्थित अपने निवास पर बुलाकर अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए दबाव बनाया। संयुक्त बयान में पार्षदों ने स्पष्ट कहा कि अविश्वास प्रस्ताव उनका स्वतंत्र और लोकतांत्रिक निर्णय था, किसी राजनीतिक दबाव का परिणाम नहीं।
करोड़ों के फर्जी भुगतान और अनियमितताओं के आरोप
संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में पार्षदों ने आरोप लगाया कि अध्यक्ष और तत्कालीन सीएमओ की कथित मिलीभगत से नगर परिषद में गंभीर वित्तीय गड़बड़ियां हुईं। इनमें फर्जी नियुक्तियां, लगभग ₹10 लाख का डीजल भुगतान, अमृत 2.0 योजना में लगभग ₹73 लाख के कथित फर्जी भुगतान, बिना कार्य हुए लगभग ₹50 लाख के भुगतान तथा घटिया निर्माण कार्य जैसे आरोप शामिल हैं। पार्षदों का कहना है कि इन मुद्दों को लेकर वे पहले भी कई बार धरना-प्रदर्शन और विरोध दर्ज करा चुके हैं।
विधायक की छवि खराब करने का आरोप
पार्षदों ने आरोप लगाया कि अध्यक्ष राजनीतिक विरोधियों के साथ मिलकर विधायक नागेन्द्र सिंह की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रही हैं। उनका दावा है कि विधायक के प्रयासों से क्षेत्र में सिविल अस्पताल, स्टेडियम, पेयजल टंकी, महाविद्यालय और कन्या हायर सेकेंडरी विद्यालय सहित अनेक विकास कार्य हुए हैं, इसलिए उन पर लगाए गए आरोप राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित हैं।
डिग्री और व्यापम प्रकरण की जांच की मांग
संयुक्त बयान में पार्षदों ने अध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह की शैक्षणिक डिग्री की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही उनके पति डॉ. कल्याण सिंह से जुड़े व्यापम प्रकरण एवं अन्य मामलों की भी सक्षम एजेंसियों से विधिसम्मत जांच कराने की मांग उठाई है।
बैठक और बजट को लेकर भी सवाल
पार्षदों का आरोप है कि अध्यक्ष नियमित रूप से परिषद और पीआईसी की बैठकें नहीं बुलातीं तथा वर्ष 2025-26 और 2026-27 का बजट भी समय पर पारित नहीं कराया गया। उनका कहना है कि इस संबंध में वे कई बार सीएमओ को लिखित आवेदन दे चुके हैं, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
अविश्वास प्रस्ताव पर भी किया बड़ा दावा
पार्षदों ने अध्यक्ष के इस दावे को भी गलत बताया कि उनके खिलाफ चार बार अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। उनका कहना है कि केवल एक बार ही अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था, जिसका कारण नगर परिषद में कथित भ्रष्टाचार, विकास कार्यों में अनियमितताएं और ठेकेदारों से 30 से 40 प्रतिशत कमीशन लेने जैसी शिकायतें थीं। उन्होंने इन सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई।
चुनाव के दौरान हुए कथित गोलीकांड का उल्लेख करते हुए पार्षदों ने पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच कराने की भी मांग की, ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें।
प्रेस विज्ञप्ति के अंत में 13 पार्षदों ने मांग की कि अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार तत्काल प्रभाव से समाप्त किए जाएं, उनके पूरे कार्यकाल की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा यदि पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप प्रमाणित होते हैं तो संगठन नियमानुसार कार्रवाई करे।
हालांकि, यह सभी आरोप 13 पार्षदों द्वारा संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। नगर परिषद अध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह की ओर से इस संयुक्त बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की वास्तविक स्थिति सक्षम जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

रिपोर्टर :अर्जुन तिवारी 

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