गुढ़ नगर परिषद में करोड़ों के भुगतान पर बवाल! 23 बिंदुओं के ज्ञापन ने खोली कथित अनियमितताओं की परतें
रीवा : अध्यक्ष और सीएमओ की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल,वित्तीय अधिकारों पर रोक से लेकर आपराधिक प्रकरण तक की मांग,अब प्रशासन की जांच का इंतजार। दरअसल पूरा मामला नगर परिषद गुढ़ क्षेत्र से है जहां पर कथित वित्तीय अनियमितताओं और नियम विरुद्ध भुगतान के आरोपों ने अब तूल पकड़ लिया है। नगर परिषद कार्यालय के सामने 14पार्षदों के धरना-प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री,कलेक्टर रीवा और एसडीएम गुढ़ के नाम सौंपे गए 23 सूत्रीय ज्ञापन ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ज्ञापन में नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती अर्चना सिंह और मुख्य नगर पालिका अधिकारी मोहित शुक्ला की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए करोड़ों रुपये के कथित भुगतान,विकास कार्यों की गुणवत्ता,खरीदी,कर्मचारियों की नियुक्ति-वेतन,बाजार बैठकी,बस स्टैंड शुल्क और योजनाओं के क्रियान्वयन की जांच की मांग की गई है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि नगर परिषद में नियम-कायदों को दरकिनार कर भुगतान किए गए और कई मामलों में कागजों पर काम दिखाकर सरकारी राशि खर्च किए जाने की आशंका है। अब सवाल यह है कि यदि आरोप गलत हैं तो दस्तावेजों की जांच से सच्चाई सामने लाने में प्रशासन को परेशानी क्या है?
सरकारी वाहन नहीं तो डीजल के लाखों रुपये किसके नाम?
ज्ञापन में सबसे चौंकाने वाला आरोप अध्यक्ष के डीजल भुगतान को लेकर है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि अध्यक्ष के लिए शासकीय वाहन आवंटित नहीं होने के बावजूद डीजल के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान किया गया। साथ ही लॉगबुक के संधारण पर भी सवाल उठाए गए हैं।
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि डीजल के बिल,वाहन नंबर, लॉगबुक,भुगतान स्वीकृति और संबंधित अभिलेखों की जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि सरकारी खजाने से पैसा आखिर किस आधार पर निकला?
फर्जी अंकसूची से नियुक्ति का आरोप, फिर आपराधिक कार्रवाई क्यों नहीं?
सज्जन कछवाह की कथित फर्जी अंकसूची के आधार पर नियुक्ति किए जाने और कई महीनों तक वेतन भुगतान किए जाने का आरोप भी ज्ञापन में लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार शिकायत के बाद नियुक्ति निरस्त की गई, लेकिन यदि दस्तावेज वास्तव में फर्जी पाए गए थे तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
यह मामला सिर्फ नियुक्ति का नहीं बल्कि सरकारी धन से हुए वेतन भुगतान और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता से भी जुड़ा है। इसलिए पूरे रिकॉर्ड की जांच की मांग उठाई गई है।
संविदा कर्मचारियों को 36.38 लाख भुगतान पर घमासान
ज्ञापन में संविदा कर्मचारियों को कथित रूप से नियम विरुद्ध करीब 36.38 लाख रुपये भुगतान किए जाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि वसूली के निर्देश के बावजूद कथित दबाव के चलते राशि की वसूली नहीं हुई।
सवाल यह भी उठाया गया है कि जिन कर्मचारियों के भुगतान पर सवाल खड़े हुए, उन्हीं को स्थापना, लेखा और स्टोर जैसी महत्वपूर्ण शाखाओं का प्रभार किस आधार पर दिया गया?
घटिया सड़क, पहले भुगतान रोका फिर पूरा भुगतान कैसे?
वार्ड क्रमांक 14 और 15 में मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजना से बनी सड़क को लेकर भी गंभीर सवाल हैं। ज्ञापन में दावा किया गया कि तत्कालीन सीएमओ ने सड़क की खराब गुणवत्ता के कारण करीब 15 लाख रुपये की कटौती कर भुगतान रोक दिया था और सड़क दोबारा बनाने की बात कही थी।
लेकिन आरोप है कि बाद में ठेकेदार को कथित तौर पर पूरा भुगतान कर दिया गया।
यदि सड़क वास्तव में मानकों पर खरी नहीं उतरी थी तो बाद में भुगतान की मंजूरी किस आधार पर हुई? शिकायतकर्ताओं ने तकनीकी जांच और भुगतान फाइल की जांच की मांग की है।
अमृत 2.0 के करोड़ों के सौंदर्यीकरण पर भी सवाल
रेडवा नदी में अमृत 2.0 योजना के तहत हुए सौंदर्यीकरण कार्य में कथित करोड़ों रुपये के भुगतान को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने कार्य की वास्तविक लागत, स्वीकृत राशि, भुगतान और मौके पर हुए निर्माण का मिलान कराने की मांग की है।
अब देखना यह है कि कागजों पर खर्च और जमीन पर दिखाई देने वाले काम में कितना फर्क है।
ब्लीचिंग पाउडर से हैंडपंप सामग्री तक—खरीदी में कथित खेल का आरोप
नगर परिषद में ब्लीचिंग पाउडर, फिनायल, कीटनाशक दवाइयों, हैंडपंप सामग्री और अन्य सामान की खरीदी पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने दावा किया कि वास्तविक खरीदी के बिना कथित बिल-बाउचर और रसीदों के आधार पर करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया।
यदि यह आरोप गलत हैं तो खरीद रजिस्टर,स्टॉक रजिस्टर,बिल,जीएसटी दस्तावेज,सप्लाई रिकॉर्ड और भुगतान अभिलेख जांच के लिए उपलब्ध हैं। एक निष्पक्ष जांच से दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है।
बाजार बैठकी और बस स्टैंड शुल्क में कथित बंदरबांट?
बाजार बैठकी और बस स्टैंड शुल्क की वसूली भी विवादों में है। ज्ञापनकर्ताओं का आरोप है कि बढ़ी हुई दर वापस लेने के प्रस्ताव के बावजूद वसूली जारी रखी गई। निर्धारित कर्मचारियों के स्थान पर बाहरी लोगों से वसूली कराने और राशि में कथित बंदरबांट के आरोप भी लगाए गए हैं।
यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि कितनी राशि वसूली गई, किसके पास जमा हुई और नगर परिषद के खाते में कितनी पहुंची?
वार्डों में जलभराव और अंधेरा,विकास के दावों पर सवाल
वार्ड 7, 8 और 9 सहित कई इलाकों में जलभराव, नालियों की सफाई और स्ट्रीट लाइट की बदहाली का मुद्दा भी उठाया गया है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि बारिश में लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है और कई स्थानों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था तक नहीं है।
एक तरफ विकास कार्यों के नाम पर राशि खर्च होने के दावे हैं, दूसरी तरफ जनता जलभराव और अंधेरे से जूझ रही है—आखिर विकास की राशि जमीन पर कहां दिखाई दे रही है?
सीएम हेल्पलाइन की ग्रेडिंग सुधारने के लिए कथित फर्जी निराकरण?
ज्ञापन में सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के कथित फर्जी निराकरण का भी गंभीर आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि बेहतर ग्रेडिंग दिखाने के लिए कर्मचारियों के माध्यम से शिकायतें दर्ज कराकर उनका कथित निराकरण कराया गया।यदि ऐसा हुआ है तो यह शिकायत निवारण व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सीधा सवाल है। शिकायतकर्ताओं ने शिकायतों के कॉल रिकॉर्ड, निराकरण रिपोर्ट और संबंधित आवेदकों से सत्यापन कराने की मांग की है।
बजट स्वीकृत नहीं, पीआईसी बैठक नहीं—फिर भुगतान कैसे?
ज्ञापन में वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट परिषद द्वारा स्वीकृत नहीं किए जाने और करीब चार महीने से पीआईसी की बैठक नहीं होने के बावजूद कथित रूप से भुगतान किए जाने का आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि इस अवधि के सभी भुगतान की फाइलें खोली जाएं और यह देखा जाए कि भुगतान की स्वीकृति किसने दी, किस अधिकार के तहत दी और किस नियम के तहत राशि जारी हुई।
अध्यक्ष के वित्तीय अधिकारों पर रोक की मांग
ज्ञापन में अध्यक्ष के वित्तीय अधिकारों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं ने दावा किया है कि पीआईसी के पार्षदों द्वारा त्यागपत्र की प्रक्रिया और अध्यक्ष को वापस बुलाने की कार्रवाई की जा चुकी है।
ऐसे में प्रशासन से मांग की गई है कि जब तक पूरे मामले की जांच पूरी नहीं होती, तब तक संदिग्ध भुगतान और वित्तीय निर्णयों पर रोक लगाई जाए।
100 करोड़ की कथित संपत्ति का आरोप—जांच हुई तो सामने आएगा सच!
ज्ञापन में अध्यक्ष श्रीमती अर्चना सिंह के खिलाफ सबसे गंभीर आरोप कथित रूप से बड़ी मात्रा में संपत्ति अर्जित करने का है। शिकायतकर्ताओं ने करीब 100 करोड़ रुपये की कथित संपत्ति अर्जित किए जाने का दावा करते हुए वार्ड क्रमांक 8 एवं 13, ग्राम पंचायत खड्डा सहित रीवा और अन्य स्थानों पर संपत्ति एवं वाहनों की जांच की मांग की है।
यह आरोप बेहद गंभीर है और इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए शिकायतकर्ताओं ने आय के ज्ञात स्रोतों, संपत्तियों, वाहनों और संबंधित दस्तावेजों का स्वतंत्र सत्यापन कराने की मांग की है।
यदि आरोप बेबुनियाद हैं तो जांच के बाद स्थिति साफ हो जाएगी और यदि आरोपों में दम है तो सरकारी पद पर बैठे व्यक्ति की कथित संपत्ति का स्रोत भी सामने आना चाहिए।
सीएमओ के मुख्यालय में नहीं रहने के आरोप से लेकर व्यापारियों के जुर्माने तक सवाल
ज्ञापन में सीएमओ मोहित शुक्ला पर मुख्यालय में निवास नहीं करने और ब्यौहारी में रहने का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं ने संबंधित नियमों के तहत जांच की मांग की है।
वहीं व्यापारियों को गंदगी फैलाने के आरोप में 200-200 रुपये के जुर्माने की नोटिस दिए जाने पर भी विरोध दर्ज कराया गया है। व्यापारियों का तर्क है कि जब पर्याप्त डस्टबिन और कचरा प्रबंधन की व्यवस्था नहीं है तो केवल जुर्माना लगाकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता।
शराब दुकान,बिजली कटौती और आवारा पशु भी बने मुद्दा
वार्ड क्रमांक 9 में घनी आबादी के बीच शराब दुकान संचालित होने का मुद्दा उठाते हुए उसे नगर क्षेत्र से बाहर स्थानांतरित करने की मांग की गई है। वहीं बिजली की कथित अघोषित कटौती और अधिक बिल वसूली पर भी कार्रवाई की मांग की गई।
आवारा पशुओं के कारण किसानों की फसलों को नुकसान और सड़क दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए गौशाला अथवा आश्रय स्थल की व्यवस्था की मांग भी ज्ञापन में की गई है।
अब प्रशासन की अग्निपरीक्षा—जांच होगी या फाइलों में दब जाएगा मामला?
नगर परिषद गुढ़ को लेकर सामने आया 23 सूत्रीय ज्ञापन महज शिकायत नहीं, बल्कि सरकारी धन के इस्तेमाल, भुगतान प्रक्रिया, निर्माण कार्यों, खरीदी, नियुक्तियों और प्रशासनिक जवाबदेही पर उठाया गया बड़ा सवाल है।
हालांकि ज्ञापन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित पक्षों का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में अब गेंद पूरी तरह प्रशासन के पाले में है।
मुख्यमंत्री,कलेक्टर रीवा और एसडीएम गुढ़ के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होगी? क्या भुगतान की एक-एक फाइल, बिल-बाउचर और निर्माण कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा? और यदि आरोप सही पाए गए तो क्या जिम्मेदारों पर सिर्फ विभागीय कार्रवाई होगी या सरकारी धन की कथित हेराफेरी के मामलों में आपराधिक प्रकरण भी दर्ज होंगे?
गुढ़ की जनता अब भाषण नहीं, जांच और कार्रवाई का परिणाम देखना चाहती है।
रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी
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