गुढ़ नगर परिषद में भाजपा के भीतर बगावत!अध्यक्ष अर्चना सिंह को हटाने की मांग,पार्षदों ने खोला मोर्चा
रीवा : पार्टी नेतृत्व को सौंपा ज्ञापन, भ्रष्टाचार से लेकर पार्टी विरोधी गतिविधियों तक के गंभीर आरोप,बोले—नहीं बदली स्थिति तो सामूहिक इस्तीफे पर करेंगे विचार।
नगर परिषद गुढ़ की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है। नगर परिषद अध्यक्ष अर्चना सिंह को पद से हटाने की मांग को लेकर भाजपा समर्थित पार्षदों ने पार्टी नेतृत्व के सामने मोर्चा खोल दिया है। पार्षदों ने अध्यक्ष के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए विकास कार्य प्रभावित होने, पार्टी के ही पार्षदों से कथित अभद्र व्यवहार, पार्टी विरोधी गतिविधियों और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
पार्षदों ने पार्टी नेतृत्व को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि अर्चना सिंह को अध्यक्ष पद से हटाकर भाजपा समर्थित किसी अन्य महिला पार्षद को अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जाए। शिकायत के बाद गुढ़ की स्थानीय राजनीति में सियासी हलचल तेज हो गई है।
10 पार्षदों के समर्थन का दावा, फिर क्यों बढ़ी दूरी?
भाजपा समर्थित पार्षदों के मुताबिक नगर परिषद गुढ़ के चुनाव में भाजपा के चुनाव चिन्ह पर 8 पार्षद जीतकर आए थे, जबकि दो निर्दलीय पार्षदों का भी भाजपा को समर्थन प्राप्त था। बाद में दोनों निर्दलीय पार्षद भाजपा में शामिल हो गए, जिससे पार्टी समर्थित पार्षदों की संख्या करीब 10 हो गई।
पार्षदों का कहना है कि भाजपा जिला नेतृत्व और गुढ़ विधायक नागेंद्र सिंह के निर्देश पर सभी पार्षदों की सहमति से अर्चना सिंह को अध्यक्ष बनाया गया था। लेकिन अब यही पार्षद अध्यक्ष के खिलाफ खुलकर शिकायत कर रहे हैं।
‘सहयोग किया,लेकिन बाद में बदल गया रवैया’
ज्ञापन में पार्षदों ने आरोप लगाया है कि अध्यक्ष बनने के शुरुआती दौर में सभी पार्षदों ने उनका सहयोग किया और नगर के विकास को प्राथमिकता देने की उम्मीद की थी। लेकिन समय बीतने के साथ कथित तौर पर अध्यक्ष का रवैया बदल गया।
पार्षदों ने अपने ही दल के निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ अभद्र व्यवहार और गाली-गलौज किए जाने के आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि कथित व्यवहार के कारण भाजपा समर्थित पार्षदों में लगातार असंतोष बढ़ता गया और अब स्थिति खुली बगावत तक पहुंच गई है।
पार्टी विरोधी गतिविधियों का भी लगाया आरोप
शिकायत में अध्यक्ष पर विरोधी दल के लोगों से कथित संपर्क रखने और सोशल मीडिया के माध्यम से गुढ़ विधायक नागेंद्र सिंह की छवि खराब करने की साजिश में शामिल होने जैसे आरोप लगाए गए हैं।
इसके अलावा भाजपा समर्थित पार्षदों के खिलाफ कथित रूप से फर्जी मुकदमे दर्ज कराने और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने के भी आरोप लगाए गए हैं। पार्षदों ने इन आरोपों को गंभीर बताते हुए पार्टी नेतृत्व से हस्तक्षेप की मांग की है।
भ्रष्टाचार के आरोपों ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी
सबसे गंभीर आरोप नगर परिषद में कथित भ्रष्टाचार को लेकर लगाए गए हैं। पार्षदों ने अध्यक्ष पर व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार किए जाने के आरोप लगाते हुए पार्टी नेतृत्व से मामले में कार्रवाई की मांग की है।
हालांकि, भ्रष्टाचार, फर्जी मुकदमों और पार्टी विरोधी गतिविधियों से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इन आरोपों पर अध्यक्ष अर्चना सिंह का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। उनका पक्ष मिलने पर खबर में उसे भी प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।
‘शिकायत करते रहे, कार्रवाई नहीं हुई’
भाजपा समर्थित पार्षदों का दावा है कि अध्यक्ष के कथित व्यवहार और नगर परिषद से जुड़े विवादों की जानकारी जिला अध्यक्ष सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को पहले भी कई बार दी गई। पार्षदों के अनुसार, शिकायतों के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
पार्षदों का आरोप है कि कार्रवाई नहीं होने से कथित तौर पर स्थिति बिगड़ती गई और सोशल मीडिया गतिविधियों के कारण पार्टी की छवि प्रभावित होने लगी।
अब सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी
मामला अब केवल अध्यक्ष को हटाने की मांग तक सीमित नहीं है। पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी देकर पार्टी नेतृत्व पर भी दबाव बढ़ा दिया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि अध्यक्ष की कथित प्रताड़ना और भ्रष्टाचार से भाजपा समर्थित पार्षद आहत हैं। यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो सभी भाजपा समर्थित पार्षद सामूहिक रूप से इस्तीफा देने पर विचार कर सकते हैं। पार्षदों ने इसकी जिम्मेदारी पार्टी नेतृत्व पर डालने की बात कही है।
‘महिला पार्षद को बनाया जाए अध्यक्ष'
पार्षदों की मांग है कि अर्चना सिंह को अध्यक्ष पद से हटाने की कार्रवाई कर उनके स्थान पर भाजपा समर्थित किसी महिला पार्षद को अध्यक्ष बनाया जाए।
पार्षदों का कहना है कि इससे नगर परिषद में कथित विवादों पर विराम लगेगा, पार्टी की छवि को नुकसान से बचाया जा सकेगा और नगर के विकास कार्यों को गति मिल सकेगी।
अब पार्टी नेतृत्व के फैसले पर टिकी निगाहें
गुढ़ नगर परिषद का यह विवाद अब भाजपा के स्थानीय संगठन के लिए भी चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। एक ओर अध्यक्ष पद पर बैठी भाजपा समर्थित अध्यक्ष हैं, तो दूसरी ओर उन्हीं की पार्टी के पार्षद सामूहिक इस्तीफे तक की चेतावनी दे रहे हैं।
अब सवाल यह है कि पार्टी नेतृत्व पार्षदों की शिकायत पर जांच और कार्रवाई करता है या फिर गुढ़ भाजपा की यह अंदरूनी खींचतान आगे और बड़ा राजनीतिक विस्फोट करेगी?
रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी
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