पहली जांच में फेल, री-सैंपल में पास,रीवा में बीज सैंपल जांच व्यवस्था पर उठे सवाल
रीवा : रीवा जिले में किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग की सैंपलिंग और जांच व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि बीज के सैंपल पहली जांच में फेल होने के बाद री-सैंपलिंग में पास हो जाते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि एक ही बीज का सैंपल पहली जांच में अमानक और दूसरी जांच में मानक कैसे हो जाता है?
बताया जा रहा है कि इस वर्ष करीब दो दर्जन निजी बीज विक्रेताओं के खिलाफ खराब अथवा अमानक बीज की बिक्री के मामले में लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई की गई है। इसके बावजूद आरोप है कि इनमें से कई विक्रेता धड़ल्ले से कारोबार कर रहे हैं। यदि लाइसेंस वास्तव में निरस्त किए गए हैं तो फिर ऐसे दुकानदारों को बीज बेचने की अनुमति किस आधार पर मिल रही है, यह जांच का विषय है।
किसान के लिए खराब बीज का मतलब पूरी फसल का नुकसान
बीज की गुणवत्ता में गड़बड़ी का सीधा असर किसान की पूरी फसल पर पड़ता है। अंकुरण कम होने, पौधों की कमजोर वृद्धि अथवा अपेक्षित उत्पादन नहीं मिलने से किसान को बीज की कीमत के साथ खाद, दवा, सिंचाई और मजदूरी का भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
किसानों का सवाल है कि यदि अमानक बीज की बिक्री से नुकसान होता है तो केवल लाइसेंस निरस्त करने तक कार्रवाई सीमित क्यों रहती है? क्या जिम्मेदार विक्रेताओं के खिलाफ FIR दर्ज कर आपराधिक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए?
सैंपलिंग व्यवस्था पर बड़ा सवाल
सबसे बड़ा सवाल सैंपल की जांच प्रक्रिया को लेकर है। यदि किसी दुकान से लिया गया बीज सैंपल पहली जांच में फेल होता है और री-सैंपल में पास हो जाता है, तो दोनों रिपोर्टों में अंतर का कारण क्या है? क्या सैंपल लेने, सुरक्षित रखने और प्रयोगशाला जांच की प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच होती है? क्या किसानों के हित में फेल सैंपल के मामलों का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाता है?
हर साल नुकसान, अब ठोस कार्रवाई की मांग
किसानों का कहना है कि बीज की गुणवत्ता से जुड़े मामलों में कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अमानक बीज बेचने वाले विक्रेताओं की दोबारा जांच, निरस्त लाइसेंस के बावजूद कारोबार करने वालों पर तत्काल कार्रवाई, सैंपल जांच प्रक्रिया की निगरानी और दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार FIR दर्ज किए जाने की मांग उठ रही है।अब सवाल कृषि विभाग के सामने है—अगर अमानक बीज की बिक्री से किसान की फसल और पैसा दोनों बर्बाद होते हैं, तो जिम्मेदारी तय कर कठोर कार्रवाई कब होगी?
रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी

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