निजी जमीन पर जबरन रास्ता निकालने का आरोप, पीड़ित ने कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार

रीवा  :  रीवा जिले की सिरमौर तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पड़री में निजी भूमि से रास्ता निकालने के कथित प्रयास का मामला सामने आया है। ग्राम निवासी बृजलाल मिश्रा ने रामजी मिश्रा और रामकृपाल मिश्रा पर उनकी जमीन से जबरन रास्ता निकालने का प्रयास करने का आरोप लगाया है। मामले में पीड़ित ने 27 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर के समक्ष जनसुनवाई में आवेदन देकर हस्तक्षेप और संबंधित आरोपियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

0.110 हेक्टेयर जमीन को लेकर विवाद
आवेदन के मुताबिक, बृजलाल मिश्रा की आराजी क्रमांक 1144/5, रकबा 0.110 हेक्टेयर, ग्राम पड़री में स्थित है। आवेदक का दावा है कि उक्त भूमि पर उसका स्वत्व एवं आधिपत्य है। आरोप है कि रामजी मिश्रा और रामकृपाल मिश्रा इस जमीन से रास्ता निकालने का प्रयास कर रहे हैं। विरोध करने पर गाली-गलौज और मारपीट पर आमादा होने जैसी परिस्थितियां निर्मित होने का भी आरोप लगाया गया है।
पटवारी की रिपोर्ट पर उठाए सवाल
आवेदक ने अपने शिकायत पत्र में हल्का पटवारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उसका आरोप है कि विवादित जमीन पर रास्ता निकालने के संबंध में पटवारी ने तहसीलदार को प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है, जो आवेदक के अनुसार विधि के अनुरूप नहीं है। इसी घटनाक्रम को आधार बनाकर उसने अपनी भूमि पर रास्ता बनाए जाने की आशंका जताई है।
शिकायतों के निराकरण पर सवाल
बृजलाल मिश्रा का आरोप है कि वह पहले भी संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत कर चुका है, लेकिन अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। आवेदन में यह भी दावा किया गया है कि दूसरे पक्ष की कथित धमकियों के चलते परिवार भय और तनाव के माहौल में जीवन व्यतीत कर रहा है। आवेदक ने विवाद बढ़ने और किसी अप्रिय घटना की आशंका भी जताई है।
कलेक्टर से प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश की मांग
आवेदक ने कलेक्टर से पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए थाना सिरमौर के प्रभारी को प्राथमिकी दर्ज करने के संबंध में आवश्यक निर्देश देने तथा कार्रवाई का पालन प्रतिवेदन मंगाने की मांग की है।
बड़ा सवाल: जमीन का विवाद सुलझेगा या बढ़ेगा?
इस मामले में अब प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण है। क्या विवादित भूमि के स्वामित्व और मौके की वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी? पटवारी द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन किन तथ्यों और नियमों के आधार पर तैयार किया गया? क्या पूर्व में की गई शिकायतों की जांच होगी? और क्या संभावित विवाद को रोकने के लिए समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाएंगे?
फिलहाल, ये आरोप आवेदक द्वारा प्रस्तुत शिकायत पर आधारित हैं। मामले में प्रशासन की जांच, संबंधित राजस्व अधिकारियों के अभिलेख और दूसरे पक्ष का जवाब सामने आने के बाद ही वस्तुस्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी 

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