सुख, शांति के लिए सीता नवमी पर करें शाम को ये उपाय

आज 5 मई 2025 है और सीता नवमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन माता सीता के जन्मोत्सव के रूप में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। यह दिन माता सीता को धैर्य, समर्पण और शुद्धता की प्रतीक माना जाता है। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना करती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं योग्य वर की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं।

सीता नवमी के दिन विशेष रूप से शाम के समय किए गए कुछ उपाय अत्यंत फलदायी माने जाते हैं, जो जीवन में वैवाहिक सुख, सौभाग्य, संतान सुख, और शांति को बढ़ाते हैं। नीचे कुछ विशेष उपाय दिए गए हैं जो आप 5 मई 2025 की शाम को कर सकते हैं: 


सीता नवमी की शाम के प्रभावशाली उपाय:
1. श्रीसीता-राम की युगल मूर्ति का पूजन करें

  • शाम को दीप जलाकर सीता-राम की युगल प्रतिमा या चित्र के समक्ष बैठें।
  • पीले पुष्प, चंदन, और तुलसी दल अर्पित करें।
  •  सीताराम जय जय सीताराम" मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।

2. पति-पत्नी साथ बैठकर करें पूजा

  • यदि विवाहित हैं तो दोनों मिलकर पूजा करें।
  • इससे दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और समझ बढ़ती है।

3. तुलसी के पौधे में दीपक जलाएं

  • एक मिट्टी का दीपक लें, उसमें तिल के तेल का दीप जलाएं।
  • तुलसी के पौधे के पास रखकर 'श्रीराम जय राम जय जय राम' का जप करें।
  • यह उपाय सौभाग्य और संतान सुख के लिए श्रेष्ठ है।

4. चांदी का सिक्का माता सीता के चरणों में चढ़ाएं

  • शाम को पूजा करते समय एक चांदी का सिक्का सीता माता के चरणों में रखें।
  • बाद में उसे लाल कपड़े में बांधकर अपने पर्स या तिजोरी में रखें – धनवृद्धि होगी।

5. गरीब कन्याओं को दें यह दान

  • शाम को 5 या 9 कन्याओं को सिंदूर, चूड़ी, मिठाई, और दक्षिणा देकर आशीर्वाद लें।
  • यह माता सीता को समर्पित पुण्य कर्म माना जाता है।

6. श्रीसीता स्तुति या स्तोत्र का पाठ करें

  • "श्री सीता स्तुति" या "सीता सहस्त्रनाम" का पाठ करें।
  • मनोकामना पूर्ति में सहायक होता है।

विशेष सुझाव:
शाम को जब आप पूजा करें, तो मन में पूरी श्रद्धा और शांति रखें। माता सीता को त्याग, धैर्य और समर्पण की देवी माना जाता है, अतः कोई भी उपाय करें, वह निष्कलुष भावना से करें।

शाम की पूजा में यह भाव अवश्य रखें:

  • "मैं तेरा, तू मेरी" — यह समर्पण का भाव।
  • दया, क्षमा और सहिष्णुता — जो माता सीता के जीवन के मूल हैं।
  • मौन ध्यान या मंत्र जप — हृदय की शुद्धता हेतु। 

 

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.