"सावन में वरलक्ष्मी व्रत 2025: तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व"

वरलक्ष्मी व्रत (या वरलक्ष्मी व्रतम्) एक विशेष व्रत है जो विशेष रूप से दक्षिण भारत में बहुत श्रद्धा के साथ किया जाता है। यह व्रत सावन मास (श्रावण) के शुक्रवार को किया जाता है और मां लक्ष्मी के आठ स्वरूपों की पूजा की जाती है, जिनमें धन, ऐश्वर्य, स्वास्थ्य, संतान, विजय आदि का आशीर्वाद निहित होता है। मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए-  इस दिन मां लक्ष्मी के आठ रूपों (अष्टलक्ष्मी – धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी, आदि) की पूजा की जाती है। ये व्रत विवाहित स्त्रियाँ विशेष रूप से अपने पति और परिवार की लंबी उम्र, सुख और समृद्धि के लिए करती हैं।

मान्यता है कि यह व्रत करने से व्रति को वैसा ही फल मिलता है जैसा अश्वमेध यज्ञ के करने से मिलता है। आईये जानते हैं इस साल 2025 में वरलक्ष्मी व्रत  कब है, पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजन विधि के बारे में- 

हिंदू माह के सावन माह की पूर्णिमा से पहले पड़ने वाले शुक्रवार को यह त्यौहार मनाया जाता है यानी सावन का आखिरी शुक्रवार वरलक्ष्मी व्रत के नाम से प्रसिद्ध है. इस साल वरलक्ष्मी व्रत 8 अगस्त 2025 को है. 

पूजा का शुभ समय:
प्रातः 6:00 AM से 8:30 AM तक (स्थानीय पंचांग के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है)
पूजा करने का आदर्श समय:
प्रातःकाल या मध्याह्न काल शुभ माना जाता है।

वरलक्ष्मी व्रत की पूजन विधि
सुबह स्नान कर के व्रत का संकल्प लें।लक्ष्मी माता की प्रतिमा या चित्र को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें।कलश स्थापना करें।रोली, अक्षत, फूल, फल, नैवेद्य, वस्त्र आदि से पूजन करें।वरलक्ष्मी स्तोत्र या लक्ष्मी सहस्रनाम का पाठ करें।कथा सुनें और आरती करें।अगले दिन व्रत का पारण करें।

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.