गणेश चतुर्थी 2025: बप्पा की मूर्ति खरीदते समय ये 7 खास बातें जरूर जानें
गणेश चतुर्थी का पर्व हर वर्ष बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस वर्ष 2025 में यह पर्व 27 अगस्त, बुधवार को पड़ रहा है। इस खास अवसर पर बप्पा की मूर्ति घर लाना और पूजा करना हर भक्त के लिए बेहद शुभ माना जाता है। मगर क्या आप जानते हैं कि मूर्ति खरीदते समय और स्थापना के समय कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है? आइए जानते हैं विस्तार से।
1. मूर्ति का आकार और सामग्री
घर में रखने के लिए 12–24 इंच की मूर्ति उपयुक्त होती है। हमेशा प्राकृतिक मिट्टी (Eco-friendly Clay) की मूर्ति का चुनाव करें। प्लास्टिक या पॉलीथीन की मूर्तियाँ पर्यावरण के लिए हानिकारक होती हैं। अगर आप बड़े मंदिर या पंडाल के लिए मूर्ति खरीद रहे हैं, तो लकड़ी या पॉलिमर क्ले जैसी मजबूत सामग्री का विकल्प भी हो सकता है।
2. मूर्ति के स्वरूप और सजावट
भुजाओं की संख्या: बप्पा की मूर्ति दो, चार या दस भुजाओं में मिलती है। घर में चार भुजाएँ वाली मूर्ति सबसे शुभ मानी जाती है।
चेहरे का भाव: मुस्कुराता हुआ और शांत चेहरा हमेशा शुभ माना जाता है।
सजावट: लड्डू, कमल या मोती जैसी सजावट सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाती है।
3. स्थापना की दिशा
मूर्ति उत्तर या पूर्व दिशा में रखें।मूर्ति का मुख हमेशा घर की अंदर की ओर होना चाहिए।इस दिशा में बप्पा की स्थापना घर में सुख, शांति और समृद्धि लाती है।
4. रंग और शुभ संकेत
संतुलित रंग: लाल, पीला और सुनहरा रंग पूजा और शुभता के लिए उत्तम माने जाते हैं।मूर्ति स्थापित करने से पहले घर की सफाई और स्थान का शुद्धिकरण करना जरूरी है।
5. सुरक्षा और स्थिरता
मूर्ति को मजबूत सतह पर रखें ताकि गिरने का खतरा न हो।छोटे बच्चों और पालतू जानवरों से दूर रखें।
6. पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी
मिट्टी की मूर्ति का विसर्जन साफ पानी में करें।प्लास्टिक या नॉन-इको मूर्तियों का विसर्जन पर्यावरण के लिए हानिकारक होता है।यदि संभव हो, तो स्थानीय कलाकारों से मूर्ति बनवाएं। इससे कला और पर्यावरण दोनों का समर्थन होता है।
7. पूजा और विसर्जन
स्थापना के समय हल्दी, चावल और नींबू का तिलक करना शुभ माना जाता है।पूजा के दौरान मोमबत्ती, धूप और फूल का प्रयोग करें।विसर्जन के समय पानी को प्रदूषित न करें।
गणेश चतुर्थी केवल बप्पा की पूजा का पर्व नहीं, बल्कि पर्यावरण और संस्कृति का उत्सव भी है। इस बार मूर्ति खरीदते समय सही आकार, सामग्री, दिशा और रंग का ध्यान रखना आपकी पूजा को और भी मंगलमय बनाएगा। याद रखें, ईको-फ्रेंडली मूर्ति चुनना न केवल धार्मिक रूप से शुभ है बल्कि हमारी धरती के लिए भी जरूरी है।


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