सितंबर 2025: चतुर्दशी से नवरात्रि तक, भाद्रपद माह के बड़े व्रत-त्योहार और खास तिथियां

भारत त्योहारों का देश है और हर महीना अपने साथ धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व लिए हुए आता है। सितंबर 2025 भी बेहद खास रहने वाला है क्योंकि इस महीने में चंद्र ग्रहण, श्राद्ध-पक्ष, और शारदीय नवरात्रि जैसे बड़े पर्व मनाए जाएंगे। 

चतुर्दशी तिथि पर अनंत चतुर्दशी आती है, जिसे खासतौर पर गणेश विसर्जन के रूप में पूरे देश में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इसके अलावा इस पूरे माह में एकादशी, अमावस्या, पूर्णिमा, और आगे चलकर नवरात्रि जैसे बड़े व्रत-त्योहार भी हैं। आइए जानते हैं इस महीने की महत्वपूर्ण तिथियां और प्रमुख व्रत-त्योहार और महत्व के बारे में।

भाद्रपद माह के प्रमुख व्रत-त्योहार और महत्व
 

  1. एकादशी व्रत – इस माह की एकादशी का विशेष महत्व है। व्रत रखने से पापों का नाश और पुण्य की प्राप्ति होती है।
  2. अनंत चतुर्दशी (गणेश विसर्जन) – भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी को भगवान विष्णु के अनंत रूप और श्रीगणेश की पूजा का विधान है। इस दिन व्रत, अनंत सूत्र धारण और दान-पुण्य करने का महत्व है।
  3. श्राद्ध पक्ष – भाद्रपद पूर्णिमा के बाद से पितृ पक्ष प्रारंभ होता है। इसमें पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान का महत्व है।
  4. नवरात्रि प्रारंभ – इस माह के अंत में शारदीय नवरात्रि आती है, जिसमें मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है।

दान-पुण्य का महत्व
भाद्रपद मास में स्नान, दान और व्रत करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस महीने किया गया अन्न, वस्त्र, गौ, स्वर्ण और जल का दान कई गुना फल देने वाला होता है।

7 सितंबर: चंद्र ग्रहण और भाद्रपद पूर्णिमा

इस दिन पूरे भारत में चंद्र ग्रहण देखा गया।मंदिरों के द्वार परंपरा अनुसार बंद रहेंगे।इसी दिन भाद्रपद पूर्णिमा व्रत भी रहा, जिसका महत्व विष्णु-लक्ष्मी पूजन और दान से जुड़ा है।

8 से 21 सितंबर: श्राद्ध-पक्ष (पितृ पक्ष)
8 सितंबर से 21 सितंबर तक पितृ पक्ष की शुरुआत हो रही है।इस अवधि में पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करने का विधान है।21 सितंबर को पितृ मोक्ष अमावस्या है, जिसका विशेष महत्व है।

22 सितंबर से नवरात्रि आरंभ

22 सितंबर सोमवार से शारदीय नवरात्रि का आगमन हो रहा है।मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना, कलश स्थापना और दुर्गा पूजा का शुभारंभ इसी दिन से होगा।

खास पर्व:
28 सितंबर (षष्ठी): दुर्गा पूजा, सरस्वती आवाहन
29 सितंबर (अष्टमी): दुर्गाष्टमी व्रत, सरस्वती पूजा
30 सितंबर (महाष्टमी): कन्या पूजन, दुर्गा अष्टमी पूजा

अन्य प्रमुख पर्व और व्रत

  • 3 सितंबर: पार्वर्तिनी एकादशी
  • 5 सितंबर: ओणम और शिक्षक दिवस
  • 6 सितंबर: गणेश विसर्जन (अनंत चतुर्दशी)
  • 14 सितंबर: रोहिणी व्रत और कालाष्टमी
  • 17 सितंबर: इंदिरा एकादशी, कन्या संक्रांति, विश्वकर्मा पूजा
  • 19 सितंबर: मासिक शिवरात्रि
  • 25 सितंबर: वरद चतुर्थी
  • 26 सितंबर: ललित पंचमी

सितंबर 2025 धार्मिक आस्था और परंपराओं से परिपूर्ण महीना है। चंद्र ग्रहण से इसकी शुरुआत और नवरात्रि से इसका समापन इसे और खास बना देता है। इस दौरान व्रत, पूजा, दान और पारिवारिक आयोजनों का महत्व बढ़ जाता है। कुल मिलाकर, भाद्रपद मास धार्मिक दृष्टि से बेहद खास है। इस माह के पर्व और व्रत न केवल आस्था से जुड़े हैं, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त कराने वाले भी हैं।

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