गणेश विसर्जन 2025: 10 दिन की पूजा का पूरा फल पाने के लिए अपनाएं ये नियम
गणेशोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन के साथ होता है। इस वर्ष गणेश विसर्जन 6 सितंबर 2025, शनिवार को होगा। दस दिनों तक विधिवत पूजन-अर्चन के बाद यदि विसर्जन की प्रक्रिया शास्त्रसम्मत तरीके से न की जाए, तो मान्यता है कि पूजा का फल अधूरा रह जाता है। इसलिए भक्तों के लिए विसर्जन के समय कुछ खास नियमों और सावधानियों का ध्यान रखना आवश्यक है।
विसर्जन से पूर्व ज़रूरी अनुष्ठान
- उत्तरपूजा करें – विसर्जन से पहले गणपति की उत्तरपूजा करना आवश्यक है। इसमें बप्पा से क्षमा याचना की जाती है और अगले वर्ष पुनः आगमन का आमंत्रण दिया जाता है।
- भोग अर्पण – मोदक, फल, हल्दी-कुमकुम, दूर्वा आदि का अर्पण करें।
- आरती और मंत्रोच्चार – विसर्जन से पूर्व परिवारजन मिलकर आरती करें और "गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ" के जयकारे के साथ विदाई दें।
शुभ मुहूर्त 2025
- सुबह: 07:36 बजे – 09:10 बजे
- दोपहर से शाम: 12:17 बजे – 16:59 बजे
- शाम लाभकाल: 18:37 बजे – 20:02 बजे
- रात्रि मुहूर्त: 21:28 बजे – 01:45 बजे (7 सितंबर तक)
इन मुहूर्तों में किया गया विसर्जन विशेष फलदायी माना जाता है।
पर्यावरण और प्रशासनिक नियम
- इको-फ्रेंडली प्रतिमा – शाडू मिट्टी की या छोटी प्रतिमाओं का उपयोग करें। प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) मूर्तियों से बचें।
- निर्धारित विसर्जन स्थल – प्रशासन द्वारा बनाए गए कृत्रिम तालाबों या टैंकों में ही विसर्जन करें।
- ध्वनि और शोभायात्रा नियम – डीजे, ढोल-ताशा और बैंड के लिए तय मानकों का पालन करें।
- सफाई का ध्यान – विसर्जन के बाद कचरा और पूजा सामग्री जल में न डालें, उन्हें निर्धारित स्थान पर रखें।
क्यों ज़रूरी है नियमों का पालन?
- शास्त्रीय पूर्णता – उत्तरपूजा और मुहूर्त के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।
- पर्यावरण संतुलन – इको-फ्रेंडली विसर्जन से नदियों और तालाबों का प्रदूषण कम होता है।
- सामाजिक समरसता – प्रशासनिक नियमों से सुरक्षा और अनुशासन सुनिश्चित होता है।
- आध्यात्मिक लाभ – सही विधि से विसर्जन करने पर दस दिनों की पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त होता है।
गणेश विसर्जन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि पर्यावरण और सामाजिक संतुलन का भी प्रतीक है। इस वर्ष 6 सितंबर को जब आप बप्पा को विदाई दें, तो ध्यान रखें कि पूजा की तरह विसर्जन भी पूरे श्रद्धा, अनुशासन और विधि-विधान से हो। तभी गणेशजी की कृपा और दस दिनों की साधना का पूरा फल आपको मिलेगा।


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