Maa Chandraghanta तृतीया पूजा 2025: दो दिन क्यों और कैसे करें विधिपूर्वक पूजा, जानें शास्त्रीय रहस्य
शारदीय नवरात्रि भारत का सबसे बड़ा धार्मिक उत्सव है, जिसमें नौ दिनों तक माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। प्रत्येक दिन देवी का विशेष रूप पूजित होता है, और तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। यह स्वरूप साहस, शक्ति और सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है।
इस वर्ष 2025 में एक विशेष स्थिति बन गई है – तृतीया तिथि दो दिन तक पड़ रही है। इससे श्रद्धालुओं में यह सवाल उठता है कि पूजा कब करनी चाहिए और शास्त्र क्या कहता है। आइए विस्तार से जानते हैं।
माँ चंद्रघंटा का स्वरूप और महत्व
माँ चंद्रघंटा का नाम उनके मस्तक पर सजे अर्धचंद्र और हाथ में घंटा से पड़ा। उनके तीन स्वरूपों में यह दिन खास महत्व रखता है:
- साहस और पराक्रम: देवी का यह रूप मन में निडरता और शक्ति का संचार करता है।
- शांति और सौंदर्य: चंद्रघंटा का सौंदर्य और शांत चेहरा भक्तों को मानसिक शांति प्रदान करता है।
- संपत्ति और दांपत्य सुख: उनका पूजन करने से जीवन में विजय और सुख की प्राप्ति होती है।
तृतीया तिथि दो दिन क्यों?
पंचांग के अनुसार, नवरात्रि 2025 में तृतीया तिथि दो दिनों तक चल रही है। ऐसा क्यों होता है?
- तिथि का निर्धारण चंद्रमा की स्थिति के आधार पर किया जाता है।
- कभी-कभी तिथि सूर्यास्त से पहले और बाद दोनों दिनों में थोड़ी देर तक रहती है।
- शास्त्र में इसे ‘द्वितीय काल’ या अर्ध तिथि कहा गया है।
इसका अर्थ है कि पूजा का अवसर इन दोनों दिनों में उपलब्ध है, लेकिन अधिक फलप्रद समय (प्रमुख काल) तिथि की शुरुआत में माना जाता है।
पूजा का समय और विधि
शास्त्र के अनुसार, यदि तृतीया तिथि दो दिन तक हो तो:
- सबसे शुभ समय: पहले दिन का प्रमुख कालवैकल्पिक समय:
- दूसरे दिन सुबह या पहले पखवाड़े में
पूजा विधि में शामिल हैं:
- देवी के चित्र या मूर्ति की स्थापना
- दीपक, अगरबत्ती और पुष्प अर्पित करना
- घंटा बजाना और मंत्रों का जाप करना
- शांति और विजय की प्रार्थना
ध्यान दें: यदि कोई श्रद्धालु पहले दिन पूजा नहीं कर पाया, तो दूसरे दिन भी पूजा करने का पूर्ण फल मिलता है।
शास्त्रीय रहस्य
माँ चंद्रघंटा का अर्धचंद्र मस्तक पर अंधकार को दूर करने और बुद्धि में प्रकाश फैलाने का प्रतीक है।तिथि दो दिन होने से पूजा का लाभ दोगुना माना गया है।इस दिन पूजा से भक्तों को साहस, विजय, सुख और दांपत्य जीवन में समृद्धि की प्राप्ति होती है।
शारदीय नवरात्रि में तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा अत्यंत शुभ मानी जाती है। इस वर्ष तृतीया तिथि दो दिन है, इसलिए श्रद्धालु पहले दिन या दूसरे दिन सुबह पूजा कर सकते हैं। शास्त्र अनुसार, तिथि का प्रमुख काल सबसे फलदायी होता है, लेकिन पूरे तिथि काल में पूजा का लाभ मिलता है।


No Previous Comments found.