नवरात्रि: नॉनवेज और शराब के पीछे छुपा स्वास्थ्य और साधना का रहस्य

नवरात्रि केवल देवी दुर्गा की उपासना का पर्व नहीं है, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और साधना का भी अवसर है। इस दौरान नौ दिन तक मन, शरीर और आत्मा को पवित्र बनाए रखने के लिए नॉनवेज और शराब से परहेज़ करना अनिवार्य माना गया है। लेकिन सवाल उठता है—क्या यह केवल धार्मिक मान्यता है या इसके पीछे गहरी तर्कशक्ति और स्वास्थ्य संबंधी कारण भी हैं?

1. आध्यात्मिक कारण: मन की शुद्धि

छांदोग्य उपनिषद में कहा गया है:
"आहारशुद्धौ सत्त्वशुद्धिः, सत्त्वशुद्धौ ध्रुवा स्मृतिः"

इसका अर्थ है—जैसा आहार, वैसा मन।

नवरात्रि में साधना का उद्देश्य मन को सात्त्विक, स्थिर और निर्मल बनाना है।

नॉनवेज और शराब तामसिक भोजन माने जाते हैं, जो क्रोध, आलस्य और असंयम को जन्म देते हैं।

देवी भागवत में स्पष्ट रूप से लिखा है:
"मद्यं मांसं च मातृव्रतेषु न सेवनम्"

अर्थात, माता के व्रत और पर्वों में मांस और मदिरा का सेवन वर्जित है।

2. शारीरिक और स्वास्थ्य कारण

  • नवरात्रि का अनुशासन शरीर के लिए प्राकृतिक डिटॉक्स जैसा है।
  • हल्का, सात्त्विक भोजन और फलाहार पाचन तंत्र को आराम देते हैं और इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं।
  • शराब और नॉनवेज टॉक्सिन्स बढ़ाते हैं, जिससे शरीर और मन दोनों प्रभावित होते हैं।
  • आयुर्वेद के अनुसार, उपवास और सात्त्विक भोजन स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।

3. साधना और मानसिक एकाग्रता

  • नवरात्रि का असली लक्ष्य है मन को देवी की साधना में केंद्रित करना।
  • नॉनवेज और शराब तामसिक प्रवृत्ति को बढ़ाकर ध्यान और साधना में बाधा डालते हैं।
  • सात्त्विक आहार मानसिक शांति और ध्यान की स्थिति को सहज बनाता है।

4. सामाजिक और सांस्कृतिक कारण

  • नवरात्रि सामूहिक पर्व है। परिवार और समाज मिलकर उपासना करते हैं।
  • जब सभी सात्त्विक जीवनशैली अपनाते हैं, तो सामूहिक सामंजस्य और एकरूपता बनी रहती है।
  • नॉनवेज और शराब इस पवित्रता और सामूहिक ऊर्जा को भंग कर सकते हैं।

नवरात्रि में नॉनवेज और शराब वर्जित हैं क्योंकि ये न केवल धार्मिक अनुशासन हैं, बल्कि शरीर, मन और समाज तीनों के लिए लाभकारी भी हैं।  जैसे - 

  • आहार और साधना के माध्यम से मन को सात्त्विक बनाना।
  • शरीर को डिटॉक्स करना और इम्यूनिटी बढ़ाना।
  • मानसिक एकाग्रता और ध्यान में गहराई लाना।
  • सामूहिक उपासना और सांस्कृतिक सामंजस्य बनाए रखना।
  • नवरात्रि का यह पर्व केवल देवी की पूजा नहीं, बल्कि आत्मसंयम और मानसिक स्वास्थ्य का प्रतीक भी है।

 

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