खरमास का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व: जानिए क्या करें, क्या न करें और बजेगी फिर शहनाई

हिंदू धर्म में खरमास की अवधि को विशेष धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व प्राप्त है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य प्रत्येक माह एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं। जब सूर्य धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब उस अवधि को खरमास कहा जाता है। ये दोनों राशियाँ गुरु बृहस्पति की मानी जाती हैं, इसलिए इस काल का प्रभाव विशेष होता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खरमास के दौरान सूर्य और गुरु की शुभ ऊर्जा कमजोर मानी जाती है। चूँकि ये दोनों ग्रह मांगलिक और सांसारिक कार्यों से जुड़े होते हैं, इसलिए इस समय विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नए व्यापार की शुरुआत जैसे शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। हालांकि आध्यात्मिक दृष्टि से यह काल अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है।

खरमास में क्यों नहीं होते मांगलिक कार्य

सूर्य को ऊर्जा, आत्मबल और कर्म का कारक माना जाता है, जबकि गुरु बृहस्पति ज्ञान, विवाह और विस्तार के प्रतीक हैं। खरमास के दौरान इन दोनों ग्रहों का प्रभाव क्षीण माना जाता है। इसी कारण इस अवधि में किसी भी प्रकार के मांगलिक संस्कार करने से परहेज किया जाता है।

यह समय बाहरी उत्सवों के बजाय आत्मिक शुद्धि और ईश्वर भक्ति के लिए श्रेष्ठ माना गया है।

खरमास में क्या करें और क्या न करें

खरमास में भले ही शुभ कार्यों पर रोक होती है, लेकिन यह काल पूजा-पाठ और साधना के लिए अत्यंत उत्तम माना जाता है।

खरमास में करने योग्य कार्य:

  • प्रातःकाल स्नान
  • दान-पुण्य
  • जप, तप और ध्यान
  • व्रत और धार्मिक अनुष्ठान
  • सूर्य देव और गुरु बृहस्पति की पूजा
  • मान्यता है कि इस समय किया गया दान और साधना कई गुना फल प्रदान करती है।

खरमास में विवाह दोष दूर करने के उपाय

खरमास में विवाह नहीं होते, लेकिन विवाह से संबंधित दोषों को दूर करने के लिए यह समय बहुत शुभ माना जाता है। जिन लोगों की कुंडली में विवाह में विलंब, बार-बार रिश्ते टूटने या अन्य बाधाएँ आ रही हों, वे इस दौरान विशेष उपाय कर सकते हैं।

उपाय इस प्रकार हैं:

  • सूर्य देव और भगवान विष्णु की पूजा करें
  • पूजा में पीले रंग का प्रयोग करें
  • पीले वस्त्र धारण करें
  • पीली वस्तुओं का दान करें
  • निम्न मंत्र का जाप करें:
  • “ॐ श्रीं ह्रीं पूर्ण गृहस्थ सुख सिद्धये ह्रीं श्रीं ॐ नमः”

इन उपायों से विवाह में आने वाली बाधाएँ दूर होने की मान्यता है।

साल में कब-कब लगता है खरमास

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार साल में दो बार खरमास लगता है—

  • जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं
  • जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करते हैं

चूँकि इन दोनों राशियों के स्वामी गुरु बृहस्पति हैं, इसलिए इस अवधि का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

वर्तमान में 16 दिसंबर को सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने से खरमास आरंभ हुआ है। इस दौरान सभी मांगलिक कार्य स्थगित रहते हैं, जबकि धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का महत्व बढ़ जाता है।

कब बजेगी फिर शहनाई

14 जनवरी को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही खरमास समाप्त हो जाएगा। इसके साथ ही शुभ कार्यों के लिए मार्ग खुल जाएगा।

हालाँकि, जनवरी 2026 में शुक्र ग्रह के अस्त रहने के कारण विवाह के कोई भी शुभ मुहूर्त नहीं हैं। शुक्र ग्रह का उदय 01 फरवरी 2026 को होगा। शुक्र के उदय के बाद ही विवाह और अन्य मांगलिक कार्य प्रारंभ माने जाते हैं।

इस प्रकार, नए साल में विवाह का सीजन फरवरी 2026 से ही शुरू होगा।

खरमास भले ही सांसारिक उत्सवों पर रोक लगाता हो, लेकिन यह काल आध्यात्मिक उन्नति और आत्मिक शुद्धि का सुनहरा अवसर प्रदान करता है। इस अवधि में भक्ति, दान और साधना के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुभ फल प्राप्त कर सकता है।

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.