भारत 26 जनवरी 2026 को 77वां गणतंत्र दिवस मनाएगा,जाने पूरा इतिहास
भारत 26 जनवरी 2026 को 77वां गणतंत्र दिवस मनाएगा-
नई दिल्ली:
भारत रविवार, 26 जनवरी को अपना 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और गर्व के साथ मनाने की तैयारी में है। इस अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आयोजित होने वाली भव्य गणतंत्र दिवस परेड में देश की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विविधता की झलक देखने को मिलेगी। परेड में विभिन्न राज्यों की आकर्षक झांकियां और भारतीय सशस्त्र बलों की टुकड़ियां शामिल होंगी।
भारत 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से आज़ाद हुआ था, जिससे लगभग 200 वर्षों का औपनिवेशिक शासन समाप्त हुआ। हालांकि, देश को अपना संविधान 26 जनवरी 1950 को मिला, जिसके साथ भारत एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य बना।
भारत गणतंत्र कैसे बना?
26 जनवरी 1950 का दिन भारत के इतिहास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। इस दिन भारत ने औपनिवेशिक काल के भारत सरकार अधिनियम, 1935 को हटाकर अपना संविधान लागू किया।
हालांकि, इसकी नींव पहले ही रखी जा चुकी थी। वर्ष 1929 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने ‘पूर्ण स्वराज’ की घोषणा करते हुए ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रस्तावित डोमिनियन स्टेटस को अस्वीकार कर दिया था।
एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक राष्ट्र की परिकल्पना के साथ संविधान की मांग तेज़ हुई, जिसकी शुरुआत 1920 के दशक में हुई, जब केंद्रीय और प्रांतीय विधानसभाओं के लिए पहले आम चुनाव कराए गए।
स्वतंत्रता के बाद का सफर-
आजादी के बाद भी कुछ समय तक भारत पर 1935 का अधिनियम लागू रहा और देश का संबंध ब्रिटिश राजशाही से बना रहा। इसके बाद डॉ. भीमराव अंबेडकर की अध्यक्षता में एक मसौदा समिति गठित की गई, जिसने भारत के संविधान का निर्माण किया।
इस समिति में डॉ. अंबेडकर के साथ
के.एम. मुंशी,
मुहम्मद सादुल्लाह,
गोपाल स्वामी अयंगर,
अल्लादी कृष्णास्वामी अय्यर,
एन. माधव राव और
टी.टी. कृष्णमाचारी
जैसे प्रमुख सदस्य शामिल थे।
भारतीय गणराज्य का जन्म
26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के साथ ही भारत एक गणराज्य बना और डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने देश के पहले राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला।
संविधान की प्रस्तावना में कहा गया है—
"हम, भारत के लोग, भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य बनाने और इसके सभी नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व सुनिश्चित करने का संकल्प लेते हैं।"
गणतंत्र दिवस केवल संविधान को अपनाने का दिन नहीं है, बल्कि यह उस ऐतिहासिक क्षण का प्रतीक है जब भारत ने औपचारिक रूप से ब्रिटिश साम्राज्य से अपने सभी संवैधानिक संबंध समाप्त कर लिए।


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