गणतंत्र दिवस की परेड हमेशा कर्तव्य पथ पर ही क्यों होती है?, जानिए क्या है कारण

 गणतंत्र दिवस 2026: कर्तव्य पथ पर दिखेगा भारत का शौर्य, जानिए परेड का इतिहास और महत्व

नई दिल्ली:
देश 26 जनवरी 2026 को अपना 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और गर्व के साथ मनाने जा रहा है। यह दिन हर भारतीय के लिए खास है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 1950 में भारतीय संविधान लागू हुआ था। इस अवसर पर राजधानी नई दिल्ली का कर्तव्य पथ एक बार फिर देश की सैन्य ताकत और सांस्कृतिक विरासत का भव्य मंच बनेगा।

हर साल की तरह इस बार भी गणतंत्र दिवस की सुबह देशभर के लोग टेलीविजन स्क्रीन से जुड़ जाते हैं। आसमान में गर्जना करते लड़ाकू विमान, कदमताल करते जवान और राज्यों की रंग-बिरंगी झांकियां—यह सब मिलकर हर भारतीय के दिल में देशभक्ति का जोश भर देते हैं।

परेड हमेशा कर्तव्य पथ पर ही क्यों होती है?

अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि गणतंत्र दिवस की परेड हमेशा कर्तव्य पथ (पूर्व में राजपथ) पर ही क्यों आयोजित की जाती है। दिलचस्प बात यह है कि शुरुआत में परेड का कोई स्थायी स्थान नहीं था।

पहले चार साल बदली परेड की जगह-

जब 1950 में पहली बार गणतंत्र दिवस मनाया गया, तब परेड राजपथ पर नहीं हुई थी।
1950 से 1954 के बीच यह परेड इर्विन स्टेडियम, किंग्सवे कैंप, लाल किला और रामलीला मैदान जैसी अलग-अलग जगहों पर आयोजित की गई। यानी शुरुआती चार वर्षों तक परेड की जगह तय नहीं थी।

 1955 में तय हुआ स्थायी ठिकाना-

साल 1955 में पहली बार यह निर्णय लिया गया कि गणतंत्र दिवस परेड अब से राजपथ (तत्कालीन किंग्सवे) पर ही आयोजित होगी। यह इलाका खुला और विशाल था, जहां सेना के शौर्य और देश की शक्ति का भव्य प्रदर्शन संभव था। तभी से यह परंपरा आज तक जारी है।

 कर्तव्य पथ का ऐतिहासिक महत्व-

कर्तव्य पथ राष्ट्रपति भवन (रायसीना हिल्स) से शुरू होकर इंडिया गेट तक जाता है। इंडिया गेट उन शहीदों का स्मारक है जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर किए।
जब परेड राष्ट्रपति भवन से निकलकर इंडिया गेट की ओर बढ़ती है, तो यह संदेश देती है कि देश की सत्ता जनता और शहीदों के प्रति नतमस्तक है।

 किंग्सवे से कर्तव्य पथ तक-

ब्रिटिश शासन के दौरान इस मार्ग को ‘किंग्सवे’ कहा जाता था। आज़ादी के बाद इसका नाम बदलकर ‘राजपथ’ रखा गया।
फिर सितंबर 2022 में सरकार ने औपनिवेशिक प्रतीकों को समाप्त करने की दिशा में इसे ‘कर्तव्य पथ’ नाम दिया। यह नाम इस विचार को दर्शाता है कि यह रास्ता अब शासकों का नहीं, बल्कि कर्तव्य निभाने वालों का है।

 परेड में दिखेगा तीनों सेनाओं का दमखम

गणतंत्र दिवस परेड केवल एक समारोह नहीं, बल्कि भारत की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन है।

थल सेना, नौसेना और वायु सेना की टुकड़ियां एक साथ कदमताल करती नजर आएंगी

आधुनिक हथियारों की झलक

मोटरसाइकिल टीमों द्वारा रोमांचक स्टंट

वायु सेना के लड़ाकू विमानों का फ्लाई-पास्ट

इस साल यूरोपीय संघ के शीर्ष नेता होंगे मुख्य अतिथि

इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे, जिससे इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय महत्व भी मिलेगा।

परेड का समय और रूट

समय: सुबह 10:30 बजे

रूट: विजय चौक → कर्तव्य पथ → सी-हेक्सागन → तिलक मार्ग → बहादुर शाह ज़फर मार्ग → लाल किला

करीब 8–9 किलोमीटर लंबे इस रूट पर भारत की सांस्कृतिक विविधता और सैन्य उपलब्धियों का भव्य प्रदर्शन देखने को मिलेगा।

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