थाना शाहपुर पर किसका दबाव?एफआईआर दर्ज… सबूत मौजूद… फिर भी पुलिस मौन
रीवा : मऊगंज जिला के थाना शाहपुर में पीड़ित के आवेदन पर दिनांक 31/12/2025 को शाम 4 बजे एफआईआर क्रमांक 0/25 दर्ज की गई थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इस मामले ने अब केवल पुलिस ही नहीं,बल्कि पूरे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।*
एफआईआर दर्ज होने के बाद भी न तो आरोपियों से पूछताछ की गई और न ही किसी तरह की वैधानिक कार्रवाई सामने आई। पुलिस द्वारा सिर्फ “जांच जारी है” कहकर मामले को टालना अब संदेह को और गहरा रहा है।
सबूत होने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?
मामले में पीड़ित द्वारा साक्ष्य और विवरण उपलब्ध कराने के बावजूद कार्रवाई न होना यह संकेत देता है कि थाना स्तर पर किसी न किसी दबाव में मामला ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है।सवाल यह उठ रहा है कि आखिर थाना प्रभारी किसके दबाव में कार्रवाई से बच रहे हैं?
पीड़ित का बयान
पीड़ित ने बताया कि
"मैंने दिनांक 31/12/2025 को समय शाम 4 बजे थाना शाहपुर में आवेदन दिया था, उसी आधार पर एफआईआर दर्ज हुई। इसके बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई। फोन करने पर जवाब नहीं मिलता और थाने जाने पर सिर्फ आश्वासन दिया जाता है। अब समझ नहीं आ रहा कि पुलिस आखिर किसके दबाव में चुप बैठी है।"
प्रशासनिक चुप्पी भी सवालों के घेरे में
यह मामला अब केवल थाना शाहपुर तक सीमित नहीं रहा। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक अमला भी इस पूरे प्रकरण पर मौन नजर आ रहा है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह चुप्पी किसी संरक्षण की ओर इशारा कर सकती है।
न्याय व्यवस्था पर सीधा असर
जब एफआईआर के बाद भी पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रहे, तो आम नागरिक का कानून से भरोसा डगमगाना तय है। ऐसी स्थिति में अपराधियों का मनोबल बढ़ना भी स्वाभाविक है।
उच्च स्तर पर शिकायत की तैयारी पीड़ित ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वह पुलिस अधीक्षक,आईजी एवं अन्य संवैधानिक मंचों* पर शिकायत दर्ज कराएगा।
अब बड़ा सवाल यही है थाना शाहपुर पर आखिर किसका दबाव है और प्रशासन इस चुप्पी पर कब जवाब देगा?
रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी

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