बिना पद,बिना विज्ञापन के सीधे नियुक्ति आदेश,34 साल से सरकारी वेतन का मिल रहा लाभ

रीवा - जिले में स्थित शासकीय शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है,जो सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करता है। सूत्रों के हवाले से पता चला है कि राजेश शुक्ला नामक व्यक्ति की लैब असिस्टेंट के पद पर 1992 में हुई नियुक्ति पूरी तरह फर्जी थी। हैरानी की बात यह है कि उस समय महाविद्यालय में ऐसा कोई पद ही अस्तित्व में नहीं था, और न ही इस पद के लिए कोई विज्ञापन निकाला गया था। यह खुलासा न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि एक बड़े घोटाले की ओर इशारा करता है जो दशकों से चुपचाप चल रहा है।महाविद्यालय के प्राचार्य राम नरेश पटेल ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि राजेश शुक्ला की नियुक्ति से जुड़ी कोई फाइल या दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। उनके पास सिर्फ एक नियुक्ति आदेश है, लेकिन विज्ञापन या भर्ती प्रक्रिया से संबंधित कोई रिकॉर्ड नहीं है। प्राचार्य पटेल ने कहा नियुक्ति संबंधी न तो कोई नस्ती है और न ही कोई विज्ञापन निकालने के दस्तावेज उपलब्ध हैं। केवल नियुक्ति आदेश के दस्तावेज हमारे पास हैं। यह बयान खुद में एक बड़ा सवाल खड़ा करता है आखिर कैसे एक व्यक्ति बिना वैध प्रक्रिया के सरकारी पद पर काबिज हो गया? सबसे बड़ा रहस्य यह है कि राजेश शुक्ला पिछले 34 वर्षों से लगातार इसी महाविद्यालय में पदस्थ हैं, जबकि सरकारी नियमों के अनुसार कर्मचारियों का स्थानांतरण समय-समय पर होता रहता है।रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल ने कहा कि यह विषय संज्ञान में आया है नियुक्ति की प्रक्रिया किन नियमों के तहत हुई है यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। उन्होंने विषय की गंभीरता को समझते हुए जांच के आदेश देने की बात कही है।

रिपोर्टर - अर्जुन तिवारी 

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