हाईकोर्ट का चुनाव याचिका रद्द करने से इनकार

637 वोट से जीते अभय मिश्रा की विधायकी पर संकट, हाईकोर्ट का चुनाव याचिका रद्द करने से इनकार

रीवा- जिले के सेमरिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा की जीत को लेकर दायर चुनाव याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। न्यायमूर्ति विनय सराफ की एकल पीठ ने विधायक की ओर से दायर उस आवेदन को खारिज कर दिया है,जिसमें चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही निरस्त करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि याचिका में उठाए गए आरोप गंभीर हैं और उनकी सुनवाई आवश्यक है। मामला अब ट्रायल के लिए आगे बढ़ेगा।

637 वोट से मिली थी जीत

यह चुनाव याचिका भाजपा प्रत्याशी कृष्णपति त्रिपाठी द्वारा दायर की गई है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में केपी त्रिपाठी को 55,387 वोट मिले थे,जबकि अभय मिश्रा को 56,024 वोट प्राप्त हुए और वे 637 मतों से विजयी हुए थे। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद 16 जनवरी 2024 को याचिका हाईकोर्ट में दायर की गई थी।

हलफनामे में जानकारी छिपाने का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि अभय मिश्रा ने नामांकन के दौरान दिए गए शपथ पत्र (फॉर्म-26) में आवश्यक जानकारियां छिपाई हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि उनके विरुद्ध दर्ज आपराधिक प्रकरणों का उल्लेख नहीं किया गया और “Not Applicable” दर्शाया गया। आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर नौ प्रकरणों का हवाला दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि यदि यह आरोप सिद्ध होते हैं तो यह भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में आ सकता है।

लोन और आय के स्रोत पर भी सवाल
याचिका में यह भी आरोप है कि ICICI बैंक से लिए गए ऋण की जानकारी हलफनामे में नहीं दी गई। आरोप के अनुसार लगभग 23 लाख रुपये का ऋण लिया गया था, जिसकी बकाया राशि 50 लाख रुपये से अधिक बताई गई है। प्रतिवादी पक्ष ने इसे व्यक्तिगत ऋण न बताते हुए कंपनी से संबंधित बताया और कहा कि वे वर्ष 2008 में कंपनी से अलग हो चुके हैं।इसके अलावा आय के स्रोत को लेकर भी अधूरी जानकारी देने का आरोप है। निजी कंपनी से वेतन का उल्लेख तो किया गया, लेकिन कंपनी का नाम और विवरण नहीं दिया गया।

सरकारी अनुबंध को लेकर भी विवाद
याचिका में यह भी कहा गया है कि अभय मिश्रा का कुछ सरकारी विभागों से अनुबंध था, जो चुनाव लड़ने की पात्रता को प्रभावित कर सकता है।हालांकि प्रतिवादी पक्ष ने इस आरोप को खारिज किया है। कोर्ट ने कहा कि इन सभी बिंदुओं की जांच ट्रायल के दौरान की जाएगी।


हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि याचिका प्रथम दृष्टया सुनवाई योग्य है और इसे तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। साथ ही प्रतिवादी को चार सप्ताह के भीतर लिखित जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।


अब ट्रायल में तय होगा भविष्य
अब इस मामले में ट्रायल के दौरान सभी आरोपों और साक्ष्यों की विस्तृत जांच की जाएगी। यदि आरोप सिद्ध होते हैं,तो विधायक की सदस्यता पर असर पड़ सकता है। यह मामला चुनावी पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकार से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रकरण माना जा रहा है।

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