रीवा का मेडिकल कॉलेज – इलाज का मंदिर या चरण वंदना का अड्डा
रीवा - मेडिकल कॉलेज – इलाज का मंदिर या चरण वंदना का अड्डा जब कोई डॉक्टर किसी मेडिकल कॉलेज का डीन बनता है तो उसकी नैतिक जिम्मेदारी होती है कि अस्पताल में गरीबों को सही इलाज मिले,डॉक्टर समय पर अस्पताल में रहें,मरीज को दवा मिले और किसी की जान डाक्टरों एवं अस्पताल के स्टाफ की लापरवाही की वजह से न जाए और अस्पतालों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना लेकिन रीवा की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है?
यहाँ लगता है कि काम से ज्यादा “चरण स्पर्श व चरण वंदना” ज्यादा जरूरी हो गया है। अगर अस्पताल में व्यवस्था खराब है,मरीज परेशान हैं, डॉक्टर समय पर नहीं पहुंच रहें हैं और हर तरफ भ्रष्टाचार की चर्चा है, तो फिर सवाल उठाना गलत कैसे हो गया? दरअसल पुरा मामला यह है कि जबसे रीवा मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ सुनील अग्रवाल बने हैं तबसे वह केवल नेताओं की चमचागिरी ज्यादा और अस्पतालों की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में कम ही ध्यान देते हैं जिससे आए दिन डाक्टरों व अस्पताल स्टाफ की लापरवाही की वजह से मरीजों की जान से खिलवाड़ होने का मामला सोशल मीडिया में वायरल होते रहता है। अभी हाल में उनका एक फोटो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है जिसमें वह प्रदेश के डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल का चरण वंदन करते हुए साफ तौर पर देखे जा सकते हैं जिसे लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। जिसे लेकर रीवा सहित विंध्य क्षेत्र का युवा पूछ रहा है कि क्या डीन का काम अस्पताल सुधारना है या नेताओं को खुश रखना और उनकी चरण वंदना करना ? क्या करोड़ों का खेल इसी तरह से चलता रहेगा और कोई जवाबदेही तय नहीं होगी? क्या शासन व प्रशासन की नजरों में मरीज की जान की कोई कीमत नहीं है? डॉक्टर का पेशा सबसे पवित्र माना जाता है, लेकिन अगर सिस्टम ही बीमार हो जाए तो इलाज कौन करेगा? रीवा की जनता अब चुप नहीं रहेगी, जवाब तो देना ही पड़ेगा। यदि अब भी चुप रही तो स्थिति भयावह निर्मित होगी।
रिपोर्टर - अर्जुन तिवारी

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