विगत दिवस पत्रकार निखिल पाठक पर हुई कार्यवाही से पुलिस व्यवस्था कटघरे में
रेवा : जब सच दिखाने वाली कलम पर ही शिकंजा कसने लगे,तब लोकतंत्र की आवाज़ खुद असुरक्षित महसूस करने लगती हैं।रीवा जिले के गुढ़ थाना क्षेत्र में सामने आया मामला अब केवल अवैध शराब कारोबार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पुलिस प्रशासन की कार्यशैली,निष्पक्षता और पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। नई दुनिया अखबार के संवाददाता पत्रकार निखिल पाठक पर हुई पुलिस कार्यवाही के बाद पूरे जिले में आक्रोश और चर्चाओं का माहौल बना हुआ है। “गाँवों में शराब बिकती रही, शिकायतें उठती रहीं… लेकिन जब पत्रकार ने सच दिखाया,तो सिस्टम उसी के खिलाफ खड़ा हो गया” स्थानीय लोगों का आरोप है कि गुढ़ क्षेत्र सहित आसपास के गांवों में लंबे समय से अवैध शराब का कारोबार खुलेआम संचालित हो रहा था। ग्रामीणों द्वारा लगातार शिकायतें किए जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। लेकिन जैसे ही पत्रकार निखिल पाठक ने शराब माफियाओं की सच्चाई उजागर करते हुए खबर प्रकाशित की और जनता व पुलिस प्रशासन को आइना दिखाने का काम किया, वैसे ही पूरा मामला पलटता नजर आया।लोगों के बीच यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि शराब माफिया और गुढ़ थाना पुलिस ने मिलकर पत्रकार को ही अपने शिकंजे में ले लिया और बिना निष्पक्ष जांच के सीधे जेल पहुंचा दिया गया।
“ना कोई गंभीर विवेचना ना वरिष्ठ अधिकारियों की निष्पक्ष जांच,फिर इतनी जल्दबाज़ी आखिर किस बात की?”
जनता सवाल उठा रही है कि आखिर एक पत्रकार, जो जनहित में खबर प्रकाशित कर रहा था, उसके मामले में इतनी ताबड़तोड़ कार्यवाही क्यों की गई? लोगों का कहना है कि न तो मामले की गहराई से विवेचना की गई और न ही किसी वरिष्ठ अधिकारी द्वारा निष्पक्ष जांच करवाई गई। इसके बावजूद पत्रकार पर कड़ी धाराएं लगाकर जेल भेज दिया गया।
“क्या अब सच दिखाना अपराध बन गया है…?”
क्षेत्र में यह सवाल भी तेजी से गूंज रहा है कि क्या अब पत्रकारिता करना और अवैध कारोबार की सच्चाई उजागर करना अपराध माना जाएगा? यदि कोई पत्रकार समाज और प्रशासन के सामने वास्तविक स्थिति लाने का प्रयास करता है और बदले में उसी को प्रताड़ित किया जाता है, तो यह लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
पत्रकार संगठनों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि अवैध शराब कारोबार पर पहले ही कठोर कार्यवाही हुई होती, तो आज ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि अवैध कारोबार पर कार्यवाही कम और सच उजागर करने वालों पर दबाव ज्यादा दिखाई दे रहा है।
राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद (रजि.) ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा परिषद (रजि.) के प्रदेश उपाध्यक्ष शिवम् पाठक ने पूरे मामले को बेहद गंभीर बताते हुए रीवा पुलिस की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि यदि एक पत्रकार, जो समाज और प्रशासन को आइना दिखाने का कार्य कर रहा था,उसी को बिना निष्पक्ष जांच के जेल भेज दिया जाए, तो यह पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर सीधा हमला माना जाएगा।
उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि पूरे मामले की उचित एवं निष्पक्ष जांच करवाई जाए, ताकि जनता को सच्चाई दिखाने वाले पत्रकार निखिल पाठक को न्याय मिल सके और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही हो सके।
“गुढ़ पुलिस पर उठे बड़े सवाल अवैध शराब पर खामोशी, लेकिन सच लिखने वाले पत्रकार पर ताबड़तोड़ कार्यवाही!”
रीवा जिले में अब जनता खुलकर पूछ रही है —
“क्या माफियाओं से ज्यादा खतरनाक सच दिखाने वाली कलम हो गई है?”
हैरानी की बात यह है कि पूरे मामले में अब तक किसी भी वरिष्ठ अधिकारी द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे पुलिस प्रशासन की भूमिका पर संदेह और गहरा गया है। लगातार उठ रहे सवालों के बावजूद प्रशासनिक चुप्पी अब जनता के बीच चर्चा का विषय बन चुकी है।
“अगर सच दिखाने वालों पर ही शिकंजा कसने लगे, तो फिर जनता न्याय की उम्मीद आखिर किससे करे?”
जनता और पत्रकार संगठन मांग कर रहे हैं कि पत्रकार निखिल पाठक मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच करवाई जाए और अवैध शराब कारोबार की जड़ों तक पहुंचकर वास्तविक दोषियों पर कठोर कार्यवाही की जाए। लोगों का कहना है कि यदि आवाज उठाने वालों को ही दबाया जाएगा, तो आने वाले समय में भ्रष्टाचार और अवैध कारोबार के खिलाफ बोलना बेहद कठिन हो जाएगा।
रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी

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