श्री विधि से धान की रोपाई किसानों के लिए लाभकारी
रीवा - जिले में धान की खेती करने वाले किसानों के लिए एसआरआई (श्री) विधि लाभकारी साबित हो सकती है। कृषि विभाग के अनुसार इस तकनीक से कम पानी और कम बीज की आवश्यकता होती है,जबकि पारंपरिक रोपा विधि की तुलना में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। उप संचालक कृषि यूपी बागरी ने किसानों से इस आधुनिक तकनीक को अपनाने की अपील करते हुए इसे खेती के लिए वरदान बताया है। उन्होंने बताया कि पारंपरिक विधि से प्रति हेक्टेयर लगभग 20 से 25 क्विंटल धान का उत्पादन होता है, जबकि श्री विधि अपनाने पर 35 से 50 क्विंटल तक उपज प्राप्त की जा सकती है। इस तकनीक में प्रति हेक्टेयर केवल 6 से 8 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है, जिससे किसानों की लागत भी कम होती है।
कृषि विभाग के अनुसार नर्सरी तैयार करने के लिए भुरभुरी मिट्टी, राख तथा गोबर या नाडेप खाद का उपयोग किया जाता है। बोनी से पहले बीजों को थाईरम दवा से उपचारित करना आवश्यक है। 15 से 21 दिन के पौधों की रोपाई 20×20 सेंटीमीटर की दूरी पर एक-एक पौधे के रूप में की जाती है,जिससे पौधों को पर्याप्त हवा और पोषण मिल सके। अधिकारियों ने बताया कि इस विधि में खेत में लगातार पानी भरे रखने की आवश्यकता नहीं होती। केवल पर्याप्त नमी बनाए रखना जरूरी है। पौधों की बढ़वार के दौरान खेत को दो से तीन दिन तक सूखा छोड़कर बाद में हल्की सिंचाई करने से बेहतर परिणाम मिलते हैं। साथ ही,जैविक खाद के अधिक उपयोग तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड की अनुशंसा के अनुसार उर्वरकों का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। कृषि विभाग ने किसानों से कहा है कि श्री विधि से संबंधित अधिक जानकारी के लिए अपने क्षेत्र के कृषि विस्तार अधिकारी से संपर्क करें और अधिक उत्पादन के लिए इस वैज्ञानिक तकनीक को अपनाएं।
रिपोर्टर - अर्जुन तिवारी
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