टोंस हाइडल प्रोजेक्ट की WBM सड़क की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल,सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप

रीवा - मध्यप्रदेश के रीवा जिले में बकिया बराज से बीड़ा तक लगभग 12 किलोमीटर लंबी WBM सड़क के निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। टोंस हाइडल प्रोजेक्ट के तहत कराए जा रहे इस निर्माण कार्य में ठेकेदार पर गुणवत्ता से समझौता करने और मनमाने ढंग से कार्य कराने के आरोप लग रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन करने के बजाय नहर की मिट्टी खोदकर उसे मलवे के रूप में उपयोग किया जा रहा है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो सड़क की मजबूती और टिकाऊपन पर गंभीर असर पड़ सकता है तथा सरकारी धन का दुरुपयोग होने की आशंका है। इतना ही नहीं,जिस नहर से मिट्टी निकाली जा रही है, उसकी संरचना को भी नुकसान पहुंचने का खतरा बताया जा रहा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि अनियंत्रित खुदाई के कारण भविष्य में नहर में लीकेज की स्थिति बन सकती है, जिससे सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होगी और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि भविष्य में नहर में लीकेज होता है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या निर्माण एजेंसी, ठेकेदार या संबंधित विभाग इसकी जवाबदेही स्वीकार करेगा? या फिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी आम जनता को खराब सड़क और क्षतिग्रस्त नहर का खामियाजा भुगतना पड़ेगा? ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराने तथा नहर से मिट्टी निकालने की वैधानिक अनुमति सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि अनियमितताओं पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।

रिपोर्टर - अर्जुन तिवारी 

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