गोविंदगढ़ नगर परिषद में उपयंत्री का CMO पर सीधा हमला,"गैर तकनीकी लोगों से कराए जा रहे काम, लाखों की क्षति और अनियमितताओं पर पर्दा"

रीवा : गोविंदगढ़ नगर परिषद में प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारियों के बीच विवाद अब खुलकर सड़क पर आ गया है। परिषद के उपयंत्री तारेश कुमार शुक्ला ने गोविंदगढ़ के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) "मोहित शुक्ला" के खिलाफ गंभीर आरोपों की झड़ी लगा दी है। 15 जुलाई 2026 को भेजे गए विस्तृत जवाबी पत्र में उपयंत्री ने दावा किया है कि नगर परिषद में तकनीकी नियमों को दरकिनार कर गैर तकनीकी लोगों से निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं, जिससे परिषद को लाखों रुपये की आर्थिक क्षति उठानी पड़ी है।
उपयंत्री ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्यों में हो रही कथित अनियमितताओं को रोकने के बजाय उन्हें बेवजह पत्राचार और शिकायतों में उलझाकर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
वार्ड-14 की नाली बनी विवाद की जड़, पाइपलाइन टूटने से लाखों के नुकसान का दावा
उपयंत्री ने अपने पत्र में कहा कि वार्ड क्रमांक-14 में कच्ची नाली निर्माण की कोई आवश्यकता नहीं थी,फिर भी CMO की विशेष रुचि के चलते कार्य कराया गया। उनका आरोप है कि जेसीबी मशीन से खुदाई के दौरान करीब 100 मीटर लंबी एचडीपीई पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई,जिससे कंक्रीट सड़क के धंसने का खतरा पैदा हो गया और नगर परिषद को लाखों रुपये की क्षति हुई।
"शिकायतों की कॉपी तक नहीं दी, फिर कैसे दूं जवाब?"
उपयंत्री ने CMO के 9 जुलाई 2026 के पत्र का जवाब देते हुए कहा कि जिन शिकायतों का हवाला दिया गया, उनकी प्रतियां उन्हें उपलब्ध ही नहीं कराई गईं। बिना लिखित शिकायत की प्रति दिए किसी भी आरोप का जवाब मांगना नियमों के विरुद्ध है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल मौखिक शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करना उचित नहीं माना जा सकता।
फाइलें महीनों दबाए रखने का आरोप,विकास कार्य प्रभावित
पत्र में मंगल भवन,पवेलियन निर्माण,मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना विकास योजना, फिश पार्लर,पेयजल योजना सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि कई फाइलें लंबे समय तक CMO के पास लंबित रहीं या बिना किसी टिप्पणी और हस्ताक्षर के वापस कर दी गईं। इससे विकास कार्यों में अनावश्यक देरी हुई और योजनाएं प्रभावित हुईं।
"जब तक संविदाकार मुझसे नहीं मिलेगा, काम बंद रखो"
उपयंत्री ने दावा किया है कि CMO ने कथित रूप से कहा था, "जब तक संविदाकार मुझसे नहीं मिलेगा, तब तक कार्य बंद रखो।" उपयंत्री ने इस कथन पर सवाल उठाते हुए इसे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न बताया है।
तकनीकी मानकों की अनदेखी का भी आरोप
पत्र में कहा गया है कि कई निर्माण कार्यों में संविदाकारों ने निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया। ऐसी स्थिति में नियमानुसार राशि की कटौती कर नगर परिषद के खाते में जमा कराई जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
"CMO सप्ताह में सिर्फ दो दिन आते हैं कार्यालय"
उपयंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्य नगर पालिका अधिकारी सप्ताह में केवल दो दिन ही कार्यालय आते हैं। फाइलों पर लंबी चर्चा के बाद भी बिना टिप्पणी और हस्ताक्षर के वापस कर दिया जाता है, जिससे नगर परिषद की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों की रफ्तार प्रभावित हो रही है।
उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग
उपयंत्री ने अपने जवाबी पत्र की प्रतिलिपि नगरीय विकास एवं आवास विभाग के सचिव, नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय के आयुक्त, रीवा संभाग के संयुक्त संचालक, कार्यपालन यंत्री तथा नगर परिषद अध्यक्ष को भेजते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी 

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