सड़क पर उतरे 35 हजार आउटसोर्स बिजली कर्मचारी, सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम—'फोन दो या मैनुअल हाजिरी लागू करो'

रेवा : मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए E-हाजिरी अनिवार्य किए जाने के फैसले ने पूरे प्रदेश में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। विंध्य आउटसोर्स कर्मचारी संगठन ने इस आदेश को भेदभावपूर्ण और कर्मचारी विरोधी बताते हुए मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने साफ चेतावनी दी है कि 7 दिन के भीतर आदेश वापस नहीं लिया गया तो संभाग से लेकर राजधानी भोपाल तक उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा।

शुक्रवार को रीवा में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश पांडेय, प्रदेश सचिव सतीश चौबे और प्रदेश मीडिया प्रभारी आर्यन जायसवाल के नेतृत्व में अधीक्षण अभियंता को ज्ञापन सौंपा गया। संगठन का आरोप है कि पारदर्शिता के नाम पर सिर्फ आउटसोर्स कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि नियमित कर्मचारियों पर यही नियम लागू नहीं किया गया।
मोबाइल ऐप से हाजिरी, नहीं तो वेतन बंद
22 जुलाई 2026 को जारी आदेश के अनुसार अब आउटसोर्स कर्मचारियों की उपस्थिति केवल MPEZ E-Attendance मोबाइल ऐप से ही मान्य होगी। रजिस्टर में मैनुअल हाजिरी समाप्त कर दी गई है और अनुपालन नहीं होने पर वेतन रोकने की चेतावनी दी गई है। यह आदेश T AND M Services, Quess Corp और Rakshak Securities के माध्यम से कार्यरत 1500 से अधिक कर्मचारियों पर लागू किया गया है।
'12 हजार वेतन में स्मार्टफोन कहां से लाएं?'
प्रदेश सचिव सतीश चौबे ने कहा कि प्रदेश में 35 हजार से अधिक आउटसोर्स बिजली कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें अधिकांश लाइन हेल्पर और फील्ड कर्मचारी महज 10 से 12 हजार रुपये मासिक वेतन पाते हैं। ऐसे में महंगा स्मार्टफोन खरीदना और खराब नेटवर्क वाले क्षेत्रों में ऐप से हाजिरी लगाना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि कई बार कर्मचारी कार्यालय में मौजूद रहते हैं, लेकिन ऐप लोकेशन नहीं पकड़ता और वेतन कटने का खतरा बन जाता है।
मुकेश पांडेय का हमला—'भेदभाव बंद करो
प्रदेश अध्यक्ष मुकेश पांडेय ने कहा कि यदि E-हाजिरी लागू करनी है तो अधिकारी से लेकर नियमित कर्मचारियों तक सभी पर समान रूप से लागू की जाए। केवल आउटसोर्स कर्मचारियों पर यह नियम थोपना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी 12 से 14 घंटे तक जान जोखिम में डालकर काम करते हैं, फिर भी उन्हें बुनियादी सुविधाएं तक नहीं दी जा रही हैं।
संगठन की प्रमुख मांगें
* E-हाजिरी सभी कर्मचारियों पर समान रूप से लागू की जाए।
* जिनके पास स्मार्टफोन नहीं हैं, उन्हें विभाग मुफ्त स्मार्टफोन या बायोमेट्रिक सुविधा उपलब्ध कराए।
* नेटवर्क या ऐप फेल होने पर मैनुअल उपस्थिति मान्य की जाए।
* फील्ड कर्मचारियों को ओवरटाइम और जोखिम भत्ता दिया जाए।
* मांगें पूरी होने तक किसी कर्मचारी का वेतन न रोका जाए।
प्रदेशव्यापी आंदोलन की तैयारी
प्रदेश मीडिया प्रभारी आर्यन जायसवाल ने बताया कि रीवा के साथ-साथ जबलपुर, सतना, सीधी, सिंगरौली, सागर और शहडोल में भी यूनियनें विरोध दर्ज करा रही हैं। 28 जुलाई को जबलपुर में तीनों बिजली कंपनियों के आउटसोर्स कर्मचारियों की संयुक्त बैठक होगी, जिसमें प्रदेशव्यापी आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।
प्रबंधन ने क्या कहा?
अधीक्षण अभियंता कार्यालय का कहना है कि E-हाजिरी का आदेश मुख्यालय जबलपुर के निर्देश पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया है, ताकि फर्जी उपस्थिति पर रोक लगाई जा सके। कर्मचारियों की आपत्तियां उच्च स्तर पर भेजी जाएंगी।
अब सबकी नजर अगले 7 दिनों पर है
यदि प्रबंधन और शासन ने कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो बिजली विभाग में आउटसोर्स कर्मचारियों का आंदोलन पूरे प्रदेश में बड़ा रूप ले सकता है।

रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी

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