आठवीं तक मान्यता,दसवी तक के छात्रों का दाखिला, शिकायत पर कलेक्टर सख्त, सन ब्राइट स्कूल सील करने के निर्देश
रीवा : रीवा जिले में शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति और अनुरक्षण मद से जुड़े कथित अनियमितताओं के आरोपों के बीच अब निजी विद्यालयों की मान्यता व्यवस्था भी गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से निजी विद्यालयों को मान्यता देने की प्रक्रिया में दस्तावेजों तक सीमित औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं,जबकि जमीनी स्तर पर विद्यालयों की वास्तविक स्थिति कुछ और ही तस्वीर पेश कर रही है।
ऐसा ही एक गंभीर मामला रीवा रेलवे स्टेशन के समीप संचालित सन ब्राइट स्कूल का सामने आया है। जहां स्थानीय रहवासियों द्वारा जिला कलेक्टर से की गई शिकायत में आरोप लगाया गया कि विद्यालय को केवल कक्षा आठवीं तक की मान्यता प्राप्त होने के बावजूद यहां नवमी और दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों का दाखिला लेकर पढ़ाई कराई जा रही है। यदि शिकायत और जांच में सामने आए तथ्य सही हैं तो यह सीधे तौर पर विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ का गंभीर मामला है।
शिकायत पहुंची कलेक्टर के दरबार,जांच में आरोप सही पाए जाने का दावा
मामले की शिकायत मिलने के बाद रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने मामले में संज्ञान लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को जांच के निर्देश दिए। जिला शिक्षा अधिकारी स्तर से कराई गई जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया।
कलेक्टर ने सन ब्राइट स्कूल को सील करने के निर्देश जिला शिक्षा अधिकारी को दिए हैं। साथ ही नवमी और दसवीं के विद्यार्थियों के भविष्य को देखते हुए उन्हें किसी अन्य मान्यता प्राप्त विद्यालय में दाखिला दिलाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
कागजों में मान्यता और जमीन पर अलग व्यवस्था?
सबसे बड़ा सवाल अब यह उठ रहा है कि यदि विद्यालय की मान्यता आठवीं तक थी तो फिर नवमी और दसवीं के विद्यार्थियों का दाखिला किस आधार पर किया गया? क्या विद्यालय प्रबंधन ने नियमों की अनदेखी की या फिर संबंधित विभागीय अधिकारियों ने सत्यापन के दौरान आंखें मूंद लीं?
मामला केवल एक निजी विद्यालय तक सीमित नहीं माना जा सकता। यह प्रकरण जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की मान्यता प्रक्रिया, दस्तावेजों की जांच और भौतिक सत्यापन व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर जब विद्यालयों का भौतिक सत्यापन किया जाता है तो मान्यता से अधिक कक्षाओं का संचालन कैसे चलता रहता है?
बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ पर प्रशासन का डंडा
प्रशासन की कार्रवाई के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्कूल को सील करने के साथ-साथ उन परिस्थितियों की भी जांच होती है या नहीं, जिनके चलते मान्यता से अधिक कक्षाओं में बच्चों का दाखिला और अध्ययन कराया गया।
सबसे अहम बात यह है कि कार्रवाई की गाज केवल विद्यालय प्रबंधन तक सीमित रहती है या मान्यता प्रक्रिया में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आती है।
रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी
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