12 साल पुराने रास्ते पर गाड़े लोहे के एंगल, किसान ने लगाए मनमानी के आरोप

रेवा : छीरेहटा में सीमांकन कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल, सिविल कोर्ट में मामला विचाराधीन होने के बावजूद एकतरफा कार्रवाई का आरोप; बारिश के बीच रास्ता बंद होने से किसान परेशान। दरअसल पूरा मामला रीवा जिले के गुढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत छीरेहटा से है जहां राजस्व विभाग की सीमांकन कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्राम गोविंदगढ़ थाना क्षेत्र के निवासी किसान संजय मिश्रा पिता रामशरण मिश्रा ने राजस्व अमले पर नियम-कायदों को दरकिनार कर एकतरफा कार्रवाई करने और करीब 12 वर्षों से उपयोग में आ रहे रास्ते पर लोहे के एंगल गड़वाकर आवागमन बाधित करने का गंभीर आरोप लगाया है।

किसान का आरोप है कि कार्रवाई के बाद उसके घर तक पहुंचने वाला मुख्य रास्ता ही बंद हो गया है। बरसात के मौसम में चारों तरफ खेतों में पानी भरा हुआ है और ऐसे हालात में रास्ते पर लोहे के एंगल गाड़ दिए जाने से परिवार के सामने आवागमन का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पीड़ित ने इसे अपने परिवार को घर में ‘बंधक’ बनाने जैसा कदम बताया है।

पड़ोसी के आवेदन पर पहुंचा राजस्व अमला, एकतरफा नाप का आरोप

संजय मिश्रा के मुताबिक, पड़ोसी जितेंद्र पांडेय के आवेदन पर सीमांकन के लिए करीब एक सप्ताह पूर्व पटवारी और दो आरआई मौके पर पहुंचे थे। किसान का कहना है कि उसकी भूमि खसरा नंबर 512, रकबा 1 एकड़ 38 डिसमिल है, जो पड़ोसी की भूमि से लगी हुई है।
पीड़ित के अनुसार संबंधित क्षेत्र का भू-नक्शा भी त्रुटिपूर्ण है और जमीन से जुड़ा विवाद पहले से सिविल कोर्ट में विचाराधीन है। इसके बावजूद राजस्व अमले द्वारा सीमाओं का समुचित और निष्पक्ष परीक्षण करने के बजाय उसके मुख्य आवागमन वाले रास्ते पर लोहे के एंगल गड़वा दिए गए।

धारा 129 की कार्रवाई पर भी किसान ने उठाए सवाल

पीड़ित किसान का आरोप है कि यदि सीमांकन की कार्रवाई की जा रही थी तो नियमानुसार संबंधित भूमि की सीमाओं का समुचित परीक्षण किया जाना चाहिए था। उनका दावा है कि धारा 129 के तहत चारों तरफ की सीमाओं का नाप करने के बजाय एकतरफा कार्रवाई की गई।
किसान ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि बारिश के मौसम में सीमांकन संबंधी कार्रवाई को लेकर शासन स्तर पर निर्धारित दिशा-निर्देश और प्रतिबंध लागू थे, तो फिर मौके पर इस तरह की कार्रवाई किसके निर्देश पर की गई? किसान ने मांग की है कि प्रशासन इस पूरे मामले की जांच कर यह स्पष्ट करे कि सीमांकन की कार्रवाई किस आदेश के आधार पर और किन परिस्थितियों में की गई।

‘दफ्तरों के चक्कर काट रहा हूं, लेकिन सुनवाई नहीं’

संजय मिश्रा का कहना है कि रास्ता बंद होने के बाद वह लगातार राजस्व विभाग के अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। किसान का कहना है कि बरसात के मौसम में रास्ता बंद होने से परिवार के सामने रोजमर्रा के आवागमन की समस्या खड़ी हो गई है।
पीड़ित ने रीवा जिला प्रशासन से मीडिया के माध्यम से मांग की है कि उसके घर तक जाने वाले रास्ते में गाड़े गए लोहे के एंगल तत्काल हटवाकर आवागमन बहाल कराया जाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

राजस्व मामलों में लापरवाही पर फिर उठे सवाल

छीरेहटा का यह मामला राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन, सीमांकन और रास्ते से जुड़े विवाद अक्सर वर्षों तक लंबित रहते हैं। आरोप है कि समय पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होने से छोटे विवाद भी बड़े विवादों में बदल जाते हैं।
अब सवाल यह है कि जब मामला न्यायालय में विचाराधीन बताया जा रहा है, भू-नक्शे में त्रुटि का दावा किया जा रहा है और किसान वर्षों पुराने रास्ते के उपयोग की बात कह रहा है, तो आखिर किस आधार पर उसके आवागमन के रास्ते पर लोहे के एंगल गाड़े गए?
किसान ने जिला प्रशासन से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने, रास्ता तत्काल खुलवाने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, राजस्व विभाग के संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

रिपोर्टर अर्जुन तिवारी

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