गुढ़ में ‘मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान’ पर ही उठे सवाल!पार्षद बोले—जनता की नहीं सुनी तो कैसा जन विश्वास?
रेवा : कार्यपालन यंत्री प्रिया पटेल पर जनता और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का आरोप, छह माह से पेंशन प्रभावित होने का दावा; दूषित पानी, बदहाल सफाई और ठप विकास कार्यों पर भी उठे सवाल। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान का उद्देश्य शासन और जनता के बीच विश्वास की दूरी कम करना,नागरिकों की समस्याएं सुनना और मौके पर उनका निराकरण सुनिश्चित करना है। लेकिन गुढ़ नगर परिषद में इसी अभियान की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वार्ड क्रमांक-3 के पार्षद ओम त्रिपाठी ने आरोप लगाया है कि अभियान के तहत गुढ़ पहुंचीं नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की कार्यपालन यंत्री प्रिया पटेल ने जनता और जनप्रतिनिधियों की समस्याएं सुनने के बजाय औपचारिकता पूरी कर दी। पार्षद ने इसे ‘मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान’ की मंशा के विपरीत बताते हुए वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
अधिकारी पहुंचे नगर परिषद, लेकिन जनता करती रही इंतजार
मध्यप्रदेश शासन द्वारा 7 अगस्त 2026 से 8 जनवरी 2027 तक मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान के तहत अधिकारियों को जनता के बीच पहुंचकर शिकायतें सुनने, मौके पर समस्याओं का निराकरण करने और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
पार्षद ओम त्रिपाठी के अनुसार 8 अगस्त को भोपाल से कार्यपालन यंत्री प्रिया पटेल एवं अन्य अधिकारी नगर परिषद गुढ़ पहुंचे। इस दौरान मुख्य नगर पालिका अधिकारी मोहित शुक्ला द्वारा अधिकारियों के साथ अपने कक्ष में चर्चा की गई।
इधर, नगर परिषद के पार्षद और आम नागरिक अपनी समस्याएं लेकर अधिकारियों से मिलने के लिए बाहर इंतजार करते रहे। सवाल यह है कि जब अभियान ही जनता की समस्याएं सुनने के लिए चलाया जा रहा है,तो जनता को अधिकारियों तक पहुंचने के लिए इंतजार क्यों करना पड़ा? समस्या बताने पहुंचे लोग, मिला इंतजार और कथित तौर पर निराशा
पार्षद के मुताबिक जब कार्यपालन यंत्री प्रिया पटेल कक्ष से बाहर निकलीं तो लोगों ने नगर की समस्याओं और सीएम हेल्पलाइन से जुड़ी शिकायतों पर चर्चा करने का प्रयास किया। आरोप है कि उन्हें बाद में लौटकर चर्चा करने की बात कही गई।
इसके बाद अधिकारी पावर फिल्टर प्लांट पहुंचीं। यहां वार्ड क्रमांक-3 के पार्षद ओम त्रिपाठी सहित कई लोग मौजूद थे। पार्षद ने अधिकारियों के सामने नगर की गंभीर समस्याएं रखीं।
दूषित पानी से लेकर पेंशन तक—पार्षद ने गिनाईं समस्याएं
पार्षद ओम त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि गुढ़ में—
- लोगों को दूषित पेयजल की समस्या से जूझना पड़ रहा है।
- सफाई व्यवस्था बदहाल है और जगह-जगह गंदगी का आलम है।
- कई विकास कार्य अवरुद्ध पड़े हैं।
- निराश्रित, दिव्यांग और विधवा पेंशन का भुगतान पिछले छह माह से प्रभावित होने का दावा है।
- आवास योजना के कार्यों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है।
- सीएम हेल्पलाइन से संबंधित शिकायतों के निराकरण को लेकर भी सवाल हैं।
पार्षद का आरोप है कि जब उन्होंने इन समस्याओं को अधिकारियों के सामने रखा तो कार्यपालन यंत्री द्वारा असमर्थता जताई गई और वहां से रवाना हो गईं।
पार्षद का सीधा सवाल—जब जनता की नहीं सुननी थी तो अभियान किसके लिए?
ओम त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़ा करते हुए कहा कि यदि अभियान का मकसद जनता की समस्याएं सुनना और उनका मौके पर निराकरण करना है, तो अधिकारियों को आम नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों के साथ सीधे संवाद करना चाहिए।
पार्षद ने आरोप लगाया कि जनता से संवाद किए बिना अधिकारी का लौट जाना अभियान की मूल भावना पर सवाल खड़ा करता है।
उन्होंने इसे ‘जन विश्वास’ के नाम पर महज खानापूर्ति करार देते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
मुख्य सचिव से लेकर जिला प्रशासन तक शिकायत, जांच की मांग
पार्षद ओम त्रिपाठी का कहना है कि मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई है। उन्होंने मध्यप्रदेश शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अपर सचिव, मुख्य सचिव तथा रीवा जिला प्रशासन से पूरे मामले की तत्काल जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने मांग की है कि जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि—
मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत गुढ़ पहुंचीं कार्यपालन यंत्री ने जनता की समस्याएं क्यों नहीं सुनीं?
सीएम हेल्पलाइन सहित लंबित शिकायतों पर मौके पर निराकरण क्यों नहीं हुआ?
पेंशन, आवास, पेयजल, सफाई और विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति क्या है?
अभियान के दौरान जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों से संवाद क्यों नहीं किया गया?
साथ ही पार्षद ने कार्यपालन यंत्री प्रिया पटेल और मुख्य नगर पालिका अधिकारी मोहित शुक्ला की भूमिका की भी जांच कर दोष पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
अब बड़ा सवाल—‘जन विश्वास’ अभियान में जनता का विश्वास कैसे कायम होगा?
गुढ़ में उठे आरोपों ने मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान की जमीनी मॉनिटरिंग पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि अभियान का उद्देश्य जनता के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनना है, तो क्या केवल अधिकारियों का नगर परिषद पहुंचना ही पर्याप्त है, या जनता की बात सुनकर उसका समाधान करना भी अभियान का हिस्सा है?
अब निगाहें शासन और जिला प्रशासन की जांच पर टिकी हैं कि गुढ़ में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता क्या है और यदि अभियान की निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ है तो जिम्मेदारी किसकी तय होती है।
रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी
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