किसान-मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ रीवा में फूटा आक्रोश,काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन,कानूनों की प्रतियां जलाईं
रीवा : किसान और मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ सोमवार को रीवा में विरोध का स्वर तेज हो गया। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और ट्रेड यूनियनों के संयुक्त राष्ट्रीय आह्वान पर भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ के मौके पर किसानों और मजदूरों ने काली पट्टी बांधकर सरकार के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। इस दौरान किसान-मजदूर विरोधी कानूनों की प्रतियां लहराते हुए जोरदार नारेबाजी की गई और उनकी प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया गया।
रीवा के रतहरा क्षेत्र में हुए प्रदर्शन में किसानों और मजदूरों ने सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर आक्रोश जताया। प्रदर्शनकारियों ने चार श्रम विरोधी कानून वापस लेने, मनरेगा को बहाल करने, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी का कानून बनाने और भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौता रद्द करने समेत विभिन्न राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय मांगों को प्रमुखता से उठाया।
एसकेएम नेता शिव सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार किसान, मजदूर और नौजवान विरोधी नीतियां लागू कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों से खेती-किसानी और श्रमिक वर्ग पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपना रवैया नहीं बदला तो 26 नवंबर से देशभर में पक्के मोर्चे लगाए जाएंगे और आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
विंध्यभर में गूंजा विरोध का स्वर
राष्ट्रीय आह्वान का असर रीवा के साथ-साथ सिरमौर, सेमरिया, मऊगंज, सतना, सीधी और सिंगरौली सहित विंध्य के कई क्षेत्रों में भी देखने को मिला। विभिन्न स्थानों पर किसान और मजदूर संगठनों से जुड़े लोगों ने काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया और सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य और मजदूरों को सम्मानजनक रोजगार एवं अधिकार सुनिश्चित किए बिना देश के विकास की बात अधूरी है। उन्होंने केंद्र सरकार से किसान-मजदूरों से जुड़े मुद्दों पर तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान संतकुमार पटेल, पुष्पेंद्र सिंह एडवोकेट, खुशीलाल पटेल, आरके सिंह, केपी साकेत,राजेश पटेल, मुनिराज पटेल,जय पटेल फौजी,कैलाश पटेल, अखिलेश पटेल,रमेश वर्मा, संतोष पटेल सहित किसान नेताओं की मौजूदगी रही।
मजदूर यूनियन की ओर से छोटेलाल साकेत,रामकलेश यादव,गणेश साकेत,रमेश साकेत,राजू यादव, राजबहादुर पटेल,गोविंद साकेत,जगजीवन साकेत, कमलेश साकेत,राजेंद्र कुशवाहा,छोटेलाल यादव, लाला कहार,रवि कुशवाहा, अलगू साकेत समेत बड़ी संख्या में किसान-मजदूर प्रदर्शन में शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में कहा कि किसान और मजदूरों की मांगों को नजरअंदाज किया गया तो आंदोलन सड़क से लेकर देशव्यापी स्तर तक और अधिक उग्र होगा।
रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी
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