EWS की 407 सीटें घटाने पर हाईकोर्ट सख्त, कृषि विभाग से चार हफ्ते में जवाब तलब
रीवा : मध्यप्रदेश में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी भर्ती में EWS वर्ग की सीटों में कथित तौर पर की गई भारी कटौती अब सरकार और कृषि विभाग के लिए न्यायिक जवाबदेही का मुद्दा बन गई है। EWS की 444 सीटों को घटाकर महज 37 किए जाने के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट,जबलपुर ने कृषि विभाग समेत प्रतिवादी पक्ष को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
मामला नर्मदापुरम निवासी याचिकाकर्ता मोहित सिंह परमार द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार पाण्डेय ने मामले को हाईकोर्ट के समक्ष उठाते हुए EWS वर्ग की सीटों में हुई कथित कटौती को चुनौती दी है।
444 से सीधे 37 सीटें—आखिर आवेदन की अंतिम तारीख पर ऐसा क्यों?
याचिका के अनुसार ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के पदों के लिए जारी भर्ती प्रक्रिया में EWS वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर 444 सीटें निर्धारित की गई थीं। लेकिन आरोप है कि आवेदन की अंतिम तिथि 17 जुलाई 2026 को ही शाम के समय इन सीटों में अचानक बदलाव किया गया और EWS वर्ग की सीटें घटाकर सिर्फ 37 कर दी गईं।
यानी कथित तौर पर 407 सीटों की कटौती कर दी गई। यही बदलाव अब पूरे विवाद का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है।
याचिकाकर्ता का सवाल है कि जब अभ्यर्थी भर्ती विज्ञापन और निर्धारित सीटों के आधार पर आवेदन प्रक्रिया में शामिल हो रहे थे, तो आवेदन की अंतिम तारीख के दिन ही EWS सीटों में इतना बड़ा बदलाव किस आधार पर किया गया?
हाईकोर्ट ने मांगा सरकार से जवाब
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने प्रतिवादीगण एवं कृषि विभाग को नोटिस जारी करते हुए EWS सीटों में हुई इस बड़ी कटौती को लेकर जवाब मांगा है। न्यायालय ने संबंधित पक्षों को चार सप्ताह के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई भी चार सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।
अब निगाहें कृषि विभाग के उस जवाब पर टिकी हैं, जिसमें उसे यह स्पष्ट करना होगा कि 444 सीटों के स्थान पर 37 सीटें करने का निर्णय कब लिया गया, किस आदेश अथवा नियम के तहत लिया गया और आवेदन की अंतिम तारीख के दिन ही इसमें बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी।
सवाल सिर्फ 407 सीटों का नहीं,प्रक्रिया की पारदर्शिता का भी
इस मामले ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के अधिकारों को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि सीटों में कटौती किसी नियम, संशोधित अधिसूचना, रोस्टर निर्धारण या प्रशासनिक कारण से की गई है तो उसका स्पष्ट आधार न्यायालय के समक्ष रखना होगा।
वहीं यदि यह बदलाव भर्ती प्रक्रिया के दौरान अचानक किया गया, तो इसके प्रभाव और वैधानिक आधार को लेकर भी सरकार को स्थिति साफ करनी होगी।
444 से 37 सीटों तक का यह बदलाव अब महज आंकड़ों का फेरबदल नहीं रह गया है। मामला हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंच चुका है और कृषि विभाग को अदालत के सामने इस कटौती का पूरा हिसाब देना होगा।
याचिकाकर्ता मोहित सिंह परमार की ओर से अधिवक्ता अमित कुमार पाण्डेय, अजय कुमार पाण्डेय एवं अमित शुक्ला ने पैरवी की।
अब सबसे बड़ा सवाल
आखिर 17 जुलाई को आवेदन की अंतिम तारीख के दिन EWS की 444 सीटों को घटाकर 37 करने का फैसला क्यों लिया गया?
क्या इसके पीछे कोई पूर्व निर्धारित नियम या संशोधित आदेश था? यदि था तो अभ्यर्थियों को इसकी जानकारी कब दी गई? और यदि निर्णय बाद में बदला गया, तो उसके पीछे वास्तविक कारण क्या था?
इन सवालों के जवाब अब हाईकोर्ट में कृषि विभाग के जवाब से सामने आने की उम्मीद है।
रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी
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