बाढ़ पीड़ितों के नुकसान का तत्काल सर्वे कराए प्रशासन,युवा समाजसेवी अविराज ने कलेक्टर को लिखा पत्र
रीवा : जिले में भारी बारिश से शहर के कई इलाकों में बने बाढ़ जैसे हालात ने प्रशासनिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जलभराव का पानी घरों और दुकानों में घुसने से लोगों का घरेलू सामान,जरूरी वस्तुएं, व्यापारिक सामग्री और आजीविका से जुड़ी संपत्तियां बर्बाद हुई हैं। इस तबाही के बाद प्रभावित परिवारों और छोटे व्यापारियों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। बाढ़ और जलभराव से हुए नुकसान का तत्काल और निष्पक्ष सर्वे कराकर पीड़ितों को नियमानुसार राहत एवं उचित आर्थिक सहायता दिलाने की मांग को लेकर युवा समाजसेवी अविराज ने कलेक्टर को पत्र लिखा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में केवल कागजी कार्रवाई न हो, बल्कि अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का आकलन करें। कागजी खानापूर्ति नहीं, हर प्रभावित घर-दुकान तक पहुंचे टीम अविराज ने कहा कि नुकसान का सर्वे महज औपचारिकता बनकर नहीं रहना चाहिए। राजस्व, नगर निगम और संबंधित विभागों की संयुक्त टीम गठित कर प्रभावित इलाकों में घर-घर और दुकान-दुकान पहुंचकर नुकसान का रिकॉर्ड तैयार किया जाए।जिन परिवारों के मकान,घरेलू सामान और जरूरी वस्तुएं क्षतिग्रस्त हुई हैं तथा जिन व्यापारियों की दुकानों में पानी घुसने से माल खराब हुआ है,उनके नुकसान का वास्तविक मूल्यांकन किया जाए। सर्वे में प्रभावितों के बयान,मौके की स्थिति और उपलब्ध दस्तावेजों को आधार बनाया जाए, ताकि राहत के नाम पर किसी तरह की मनमानी की गुंजाइश न रहे।
जमा-पूंजी डूबी,अब मुआवजे की आस
जलभराव ने कई परिवारों की वर्षों की जमा-पूंजी पर पानी फेर दिया है। वहीं छोटे दुकानदारों के सामने सबसे बड़ा संकट रोजी-रोटी का है। दुकानों में रखा सामान खराब होने से कारोबार प्रभावित हुआ है और कई व्यापारियों के लिए दोबारा व्यवसाय खड़ा करना आसान नहीं होगा।ऐसे में प्रभावितों को शासन के प्रचलित नियमों के तहत पात्रता के अनुसार राहत और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
सर्वे में भेदभाव हुआ तो उठेंगे सवाल
सर्वे प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल महत्वपूर्ण हैं। मांग है कि राहत सूची में किसी प्रभावशाली व्यक्ति को अनुचित लाभ न मिले और वास्तविक गरीब एवं जरूरतमंद पीड़ित सरकारी सहायता से वंचित न रह जाएं।प्रशासन को स्पष्ट व्यवस्था बनानी चाहिए कि प्रत्येक प्रभावित परिवार और प्रतिष्ठान का नुकसान दर्ज हो। यदि वास्तविक पीड़ितों को छोड़कर केवल कागजों में सर्वे पूरा कर दिया गया, तो राहत व्यवस्था की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होना तय है।
अब जिला प्रशासन की अग्निपरीक्षा
बाढ़ जैसे हालात से जूझ चुके लोगों की नजर अब जिला प्रशासन पर है। सवाल सीधा है—क्या प्रशासन पीड़ितों के वास्तविक नुकसान का आकलन कर राहत पहुंचाएगा या फिर सर्वे के नाम पर केवल खानापूर्ति होगी?
युवा समाजसेवी अविराज ने कलेक्टर से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए तत्काल सर्वे शुरू कराया जाए, नुकसान का निष्पक्ष आकलन हो और पात्र पीड़ितों को बिना अनावश्यक देरी के नियमानुसार राहत एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
पीड़ितों की मांग भी स्पष्ट है—सर्वे तत्काल हो,आंकलन पारदर्शी हो और राहत वास्तविक नुकसान के आधार पर मिले।
रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी
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