जच्चा-बच्चा की मौत पर गरमाई सियासत,आमजन अधिकार पार्टी ने स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल से मांगा इस्तीफा
रेवा - रंजन गुप्ता का तीखा हमला “निलंबन से नहीं होगी जवाबदेही,बताइए वरिष्ठ डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं थीं तो पीजी छात्रों को ऑपरेशन की अनुमति किसने दी?” दरअसल पूरा मामला रीवा जिले के शासकीय संजय गांधी अस्पताल का है जहां विगत दिवस जच्चा और गर्भस्थ शिशु की मौत का मामला अब महज अस्पताल की कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है। घटना को लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था,डॉक्टरों की ड्यूटी और प्रशासनिक जवाबदेही पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। अब आमजन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रंजन गुप्ता ने स्वास्थ्य मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल पर सीधे निशाना साधते हुए नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री पद से इस्तीफा देने की मांग की है।
रंजन गुप्ता ने सवाल उठाया कि यदि घटना के समय वरिष्ठ डॉक्टर ड्यूटी पर मौजूद नहीं थीं,तो पीजी छात्रों को ऑपरेशन करने की अनुमति आखिर किस अधिकारी या चिकित्सक ने दी?यदि मरीज द्वारा अपने माता-पिता के सामने कथित तौर पर यह कहा गया था कि “मेरा ऑपरेशन इनसे मत करवाइए”,तो परिजनों को यह जानकारी क्यों नहीं दी गई कि उस समय वरिष्ठ ड्यूटी डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं? उन्होंने कहा कि यह केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की जवाबदेही का गंभीर प्रश्न है।
ऑपरेशन से पहले मरीज की स्थिति की गंभीरता क्यों नहीं आंकी गई?
रंजन गुप्ता ने यह भी सवाल उठाया कि यदि ऑपरेशन से पहले मरीज के हीमोग्लोबिन, आयरन,ब्लड प्रेशर अथवा अन्य मेडिकल पैरामीटर में गंभीर समस्या थी,तो उसका समुचित चिकित्सकीय प्रबंधन पहले क्यों नहीं किया गया?
उन्होंने पूछा कि मरीज की हालत बिगड़ने के संकेत मिलने के बाद परिजनों को समय रहते पूरी,स्पष्ट और तथ्यात्मक जानकारी क्यों नहीं दी गई? क्या अस्पताल में गंभीर मरीजों की निगरानी और वरिष्ठ चिकित्सकों की उपलब्धता की कोई प्रभावी व्यवस्था है?
इन सवालों के जवाब अब अस्पताल प्रबंधन और शासन से मांगे जा रहे हैं। “दो-चार लोगों को निलंबित करने से सिस्टम की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती” रंजन गुप्ता ने कहा कि कुछ कर्मचारियों या डॉक्टरों को निलंबित कर देना कार्रवाई दिखाने के लिए पर्याप्त हो सकता है, लेकिन इससे उस महिला और उसके गर्भस्थ बच्चे की जिंदगी वापस नहीं आ सकती। उन्होंने कहा कि जांच केवल उन कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए जिन पर तत्काल कार्रवाई हुई है, बल्कि यह भी सामने आना चाहिए कि ड्यूटी व्यवस्था में चूक किस स्तर पर हुई, वरिष्ठ डॉक्टर उपलब्ध क्यों नहीं थीं,ऑपरेशन की निगरानी किसने की और मरीज के इलाज से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय किसकी जिम्मेदारी में लिए गए। उन्होंने सवाल किया कि यदि प्रदेश के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में ही वरिष्ठ चिकित्सकों की उपलब्धता, मरीजों की निगरानी और परिजनों को सूचना देने की व्यवस्था सवालों के घेरे में है, तो आम मरीज सरकारी अस्पताल पर भरोसा कैसे करे?
स्वास्थ्य मंत्री पर सीधा हमला “जिम्मेदारी आपकी है तो जवाबदेही भी आपकी हो” रंजन गुप्ता ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी केवल अधिकारियों और कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। विभाग की समग्र व्यवस्था की राजनीतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी सरकार की होती है।
उन्होंने कहा— “अगर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की जिम्मेदारी स्वास्थ्य मंत्री की है, तो गंभीर लापरवाही के मामलों में जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। केवल निलंबन करके सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।” इसी आधार पर आमजन अधिकार पार्टी ने उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल से नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफे की मांग की है। सिर्फ कार्रवाई नहीं, पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था में बदलाव की मांग आमजन अधिकार पार्टी ने अस्पताल की व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार की मांग रखते हुए कहा है कि*
मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों की निजी अस्पतालों में प्रैक्टिस से जुड़ी व्यवस्था की समीक्षा की जाए। अस्पताल में शाम की ओपीडी शुरू कर दोनों शिफ्ट में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। अस्पताल चौकी में पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराया जाए। अस्पताल में लगे वाटर प्यूरीफायर की हर महीने जांच अनिवार्य की जाए। शिफ्ट बदलने के दौरान अगली शिफ्ट के डॉक्टर के अस्पताल पहुंचने तक वर्तमान डॉक्टर को अस्पताल छोड़ने की अनुमति न हो। मरीजों को मच्छरों से बचाने के लिए नियमित कीटनाशक छिड़काव कराया जाए। गंभीर मरीजों और उनके परिजनों को इलाज,संभावित जोखिम और चिकित्सकीय निर्णयों की जानकारी समय पर और स्पष्ट रूप से दी जाए।
“यह राजनीति नहीं, जिंदगी और जवाबदेही का सवाल है”
रंजन गुप्ता ने कहा कि जच्चा-बच्चा की मौत जैसे गंभीर मामले को राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। यह सीधे तौर पर मानव जीवन, अस्पताल की कार्यप्रणाली और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में जनता के भरोसे से जुड़ा सवाल है। उन्होंने मांग की कि घटना की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और केवल निलंबन तक कार्रवाई सीमित न रखते हुए प्रत्येक स्तर पर जिम्मेदारी निर्धारित की जाए। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या सरकार कुछ डॉक्टरों और कर्मचारियों के निलंबन को ही अंतिम कार्रवाई मानकर मामला बंद कर देगी, या फिर उस पूरी व्यवस्था की जवाबदेही तय करेगी जिसके बीच एक महिला और उसके गर्भस्थ बच्चे की जान चली गई? आमजन अधिकार पार्टी की मांग स्पष्ट है—निलंबन से न्याय नहीं होगा। जिम्मेदारी की जड़ तक जांच पहुंचे, दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें।
रिपोर्टर -अर्जुन तिवारी
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