कल्पना मिश्रा और नवजात की मौत पर मुआवजा क्यों नहीं? सरकार के दोहरे मापदंड

रीवा - शहर में सामने आए दो अस्पताल हादसों ने अब इलाज और प्रशासनिक जवाबदेही के साथ-साथ सरकारी मुआवजा नीति और संवेदना के कथित दोहरे मापदंड पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। नेशनल अस्पताल की लिफ्ट हादसे में एक व्यक्ति की मौत के बाद मुख्यमंत्री द्वारा मृतक परिवार को 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने की घोषणा का हवाला देते हुए अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज ने शासकीय संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत के मामले में अब तक किसी आर्थिक सहायता की घोषणा नहीं होने पर सरकार को घेरा है। अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज युवा मोर्चा के प्रदेश सचिव पंडित सतीश चौबे ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से सीधा सवाल किया है—“अगर एक हादसे में मृत परिवार को मुख्यमंत्री सहायता दी जा सकती है, तो संजय गांधी अस्पताल में मां और नवजात की मौत के बाद इस परिवार के लिए सरकार की संवेदना कहां है?”

चौबे ने कहा कि सरकार यदि पीड़ित परिवारों के साथ समान व्यवहार का दावा करती है तो मुआवजे और संवेदना के मामले में भी समान नीति दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि एक मामले में तत्काल आर्थिक सहायता की घोषणा और दूसरे मामले में अब तक चुप्पी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। दो मौतें, दो मापदंड क्यों? ब्राह्मण समाज के प्रदेश सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री पूरे प्रदेश के मुखिया हैं। उनके लिए हर नागरिक का जीवन समान होना चाहिए। मृतक किस जाति, वर्ग या समुदाय से है, इसके आधार पर सरकारी संवेदना का स्तर अलग नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत ने परिवार को दोहरा आघात दिया है। ऐसे समय में केवल जांच और निलंबन की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता, न्याय और सरकार की संवेदना—तीनों मिलना चाहिए।
चौबे ने सवाल उठाया कि जब नेशनल अस्पताल के हादसे में मुख्यमंत्री सहायता की घोषणा संभव है, तो संजय गांधी अस्पताल में मां और नवजात की मौत के मामले में सरकार ने अभी तक आर्थिक सहायता की घोषणा क्यों नहीं की? क्या सरकार की मुआवजा नीति सभी पीड़ित परिवारों के लिए समान है या फिर अलग-अलग मामलों में अलग-अलग मापदंड अपनाए जा रहे हैं?
“सरकार बताए—मुआवजा देने का पैमाना क्या है?” अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि कल्पना मिश्रा के परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान की जाए और सरकार सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करे कि अस्पतालों में होने वाली मौतों के मामलों में आर्थिक सहायता देने के लिए उसके निर्धारित मापदंड क्या हैं। संगठन का कहना है कि यह मांग किसी जाति विशेष को विशेष लाभ देने की नहीं, बल्कि समानता और समान संवेदना की मांग है। यदि एक पीड़ित परिवार को सहायता मिल सकती है तो समान परिस्थितियों में दूसरे पीड़ित परिवार को उससे वंचित क्यों रखा जाए?
मुआवजा नहीं मिला तो रीवा बंद से प्रदेशव्यापी आंदोलन तक की चेतावनी पंडित सतीश चौबे ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने कल्पना मिश्रा के परिवार के लिए शीघ्र आर्थिक सहायता की घोषणा नहीं की तो अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज समस्त सवर्ण समाज को साथ लेकर आंदोलन का रास्ता अपनाएगा।

उन्होंने कहा कि आंदोलन की शुरुआत रीवा बंद से की जा सकती है और आवश्यकता पड़ी तो इसे प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा। संगठन ने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया है कि पीड़ित परिवार को न्याय और समान सरकारी संवेदना दिलाने के लिए वह पीछे नहीं हटेगा। अब बड़ा सवाल यह है कि जब दो अस्पताल हादसों में परिवारों ने अपनों को खोया है, तो सरकारी सहायता के मामले में अंतर क्यों? क्या सरकार इस सवाल का जवाब देगी और कल्पना मिश्रा के परिवार के लिए भी आर्थिक सहायता की घोषणा करेगी?

रिपोर्टर - अर्जुन तिवारी 

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