संजय गांधी अस्पताल पर ब्राह्मण समाज का बड़ा हमला ‘डीन सुनील अग्रवाल को हटाओ,अस्पताल बचाओ’

रीवा : कल्पना मिश्रा-नवजात की मौत के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे तीखे सवाल,पंडित सतीश चौबे बोले‘अधीक्षक बदलने से नहीं बदलेगी व्यवस्था,बड़े जिम्मेदारों की भी तय हो जवाबदेही’। दरअसल पूरा मामला रीवा जिले के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय का है जहां पर विगत प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की हुई मौत का मामला अब सिर्फ चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों तक सीमित नहीं रह गया है। कार्रवाई के बाद अस्पताल की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। तत्कालीन अधीक्षक डॉ.राहुल मिश्रा को हटाए जाने के बाद अब ब्राह्मण समाज ने उच्च स्तर पर बैठे जिम्मेदारों की भूमिका पर भी सवाल खड़े करते हुए कार्रवाई की मांग तेज कर दी है।

ब्राह्मण समाज के पंडित सतीश चौबे ने सीधे शब्दों में कहा—“डी. सुनील अग्रवाल को हटाओ,संजय गांधी अस्पताल बचाओ।”उनका आरोप है कि यदि अस्पताल में लगातार अव्यवस्थाओं, शिकायतों और मरीजों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं,तो कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों या अधीक्षक तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने मांग की कि अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय समीक्षा कर प्रत्येक जिम्मेदार अधिकारी की भूमिका तय की जाए।
‘सिर्फ चेहरा बदलने से नहीं सुधरेगा अस्पताल’
पंडित चौबे ने सवाल उठाया कि जब अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं, तो बड़े पदों पर बैठे जिम्मेदारों की जवाबदेही कब तय होगी?उनका कहना है कि एक अधीक्षक को हटाकर दूसरे अधिकारी की नियुक्ति कर देने से वर्षों से चली आ रही व्यवस्थागत कमियां खत्म नहीं होंगी। अस्पताल में निर्णय लेने से लेकर निगरानी और जवाबदेही तक हर स्तर की भूमिका की जांच जरूरी है।
कल्पना मिश्रा प्रकरण के बाद प्रशासनिक कार्रवाई का सिलसिला जारी है। पीड़ित परिवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। मामले की जांच के लिए सात सदस्यीय समिति गठित किए जाने की जानकारी है। वहीं डॉ.राहुल मिश्रा के स्थान पर डॉ.प्रियंक शर्मा को अधीक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अब निशाने पर पूरी प्रशासनिक व्यवस्था
ब्राह्मण समाज की इस मांग ने संकेत दे दिया है कि मामला सिर्फ अधीक्षक बदलने तक सिमटने वाला नहीं है। पंडित सतीश चौबे का कहना है कि विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ है जिसमें मरीजों की शिकायतों और कथित अव्यवस्थाओं के बावजूद जवाबदेही सीमित स्तर पर तय होती है।
उन्होंने साफ कहा कि मरीजों की जान और इलाज की व्यवस्था से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनका तर्क है कि यदि संजय गांधी अस्पताल को वास्तव में सुधारना है तो केवल ‘चेहरा बदलो’ नीति से काम नहीं चलेगा। जिस स्तर पर जिम्मेदारी बनती है, उस स्तर तक जांच और कार्रवाई पहुंचनी चाहिए। यही नहीं, अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही तय किए बिना किसी भी कार्रवाई को अधूरा माना जाएगा।

रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी 

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