कल्पना मिश्रा मौत मामला,न्याय के लिए आर-पार की लड़ाई, पिता का आमरण अनशन शुरू
रीवा : “दोषी डॉक्टर-कर्मचारियों पर FIR करो,तत्काल निलंबित करो”- रवि पाण्डेय ने खोला मोर्चा,सामाजिक संगठनों से एकजुट होने की अपील, स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे की मांग हुई तेज।
दरअसल पूरा मामला रीवा जिले के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय का है जहां विगत दिवस प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात शिशु की हुई मौत का मामला अब आर-पार की लड़ाई में बदलता दिखाई दे रहा है। बेटी और नवजात की मौत से टूटे पिता ने न्याय की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू कर दिया है। परिवार की मांग है कि घटना की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक जिम्मेदारों को चिन्हित किया जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
मामले को लेकर रवि पाण्डेय ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यदि जांच में डॉक्टर या कर्मचारी दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें सिर्फ विभागीय कार्रवाई तक सीमित न रखा जाए, बल्कि तत्काल निलंबित कर FIR दर्ज की जाए। उनका कहना है कि किसी भी परिवार की जिंदगी के साथ लापरवाही की कीमत महज जांच या तबादले से नहीं चुकाई जा सकती। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जिम्मेदारी तय नहीं हुई तो भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक कैसे लगेगी?
सामाजिक संगठनों से सीधी अपील—“अब घरों में बैठने का वक्त नहीं”
रवि पाण्डेय ने समाज के सभी संगठनों,सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से कल्पना मिश्रा के परिवार की न्याय की लड़ाई में खुलकर साथ आने की अपील की है। उनका कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि बेहतर और जवाबदेह स्वास्थ्य व्यवस्था की लड़ाई है। जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता और जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन की आवाज दबने वाली नहीं है।
स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग ने पकड़ा जोर
कल्पना मिश्रा प्रकरण को लेकर स्वास्थ्य मंत्री एवं रीवा से जुड़े वरिष्ठ नेता राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे की मांग भी तेज हो गई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि संजय गांधी अस्पताल की व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं और अब सरकार को सिर्फ आश्वासन देने के बजाय जवाबदेही तय करने की कार्रवाई करनी चाहिए।
आंदोलनकारियों का दो टूक कहना है—“रीवा की जनता जवाब मांग रही है। दोषियों को बचाने के बजाय जिम्मेदारी तय करनी होगी।” अब निगाहें प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई पर हैं कि आमरण अनशन पर बैठे पिता की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है।
रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी
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