रीवा में ईको पार्क पर सियासी भूचाल,डिप्टी CM पर शिव सिंह का सीधा वार “ईको पार्क हटाओ या खुद हट जाओ!”
रीवा : बीहर नदी के निर्माणों को बताया बाढ़ की बड़ी वजह, रिवर फ्रंट से पुल-पुलियों तक सरकार को घेरा; बोले—1997 की बाढ़ से सबक नहीं लिया, शहर को खतरे में धकेला जा रहा। दरअसल पूरा मामला रीवा जिले से है जहां बीहर नदी में बढ़ती बाढ़ और रीवा शहर के जलभराव को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव शिव सिंह ने डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शिव सिंह ने बीहर नदी के टापू पर बने ईको पार्क सहित रिवर फ्रंट और कई पुल-पुलियों के निर्माण पर सवाल खड़े करते हुए सीधे कहा—“ईको पार्क हटाओ या खुद हट जाओ!” उनके इस बयान ने रीवा की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।
“बाढ़ आती है तो पानी नहीं,सरकारी निर्माणों की कीमत चुकाता है रीवा”
शिव सिंह ने आरोप लगाया कि बीहर नदी के प्राकृतिक बहाव और बाढ़ क्षमता को पर्याप्त रूप से समझे बिना वर्षों से निर्माण कराए गए। उनके मुताबिक ईको पार्क, नदी किनारे का रिवर फ्रंट, छोटी पुल, करहिया मार्ग पुल और अजगरहा बाईपास पुल सहित अन्य निर्माणों की संरचना और क्षमता पर गंभीर सवाल हैं।
उन्होंने कहा कि हर साल बारिश में रीवा के नागरिक जलभराव और बाढ़ की मार झेलते हैं, लेकिन जिम्मेदार तंत्र समस्या की जड़ पर कार्रवाई करने के बजाय नए निर्माण करता जा रहा है।
2016 में ईको पार्क बहा, 2019 में प्रोजेक्ट निरस्त फिर 2023 में उसी जगह क्यों वापसी?
शिव सिंह ने दावा किया कि वर्ष 2016 की बाढ़ में करीब 19 करोड़ रुपये की लागत वाला ईको पार्क झूला पुल समेत बह गया था। उन्होंने कहा कि उस समय उन्होंने निर्माण एजेंसी, ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच तथा परियोजना निरस्त करने की मांग की थी।
उनके अनुसार मार्च 2019 में प्रोजेक्ट निरस्त भी हुआ, लेकिन इसके बाद फिर उसी क्षेत्र में ईको पार्क का निर्माण कराया गया और 24 सितंबर 2023 को इसका लोकार्पण हुआ।
शिव सिंह ने सवाल दागा—“जिस निर्माण की खामियां बाढ़ अपने साथ बहाकर ले गई थी, उसी मॉडल को दोबारा खड़ा करने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी?”
“1997 की बाढ़ की समीक्षा फाइलों में दब गई, नदी पर निर्माण जमीन पर बढ़ते गए”
शिव सिंह ने वर्ष 1997 की भीषण बाढ़ का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय बाढ़ के कारणों की समीक्षा के बाद नदी के बहाव, बराज संचालन और बाढ़ नियंत्रण को लेकर सावधानियां तय की गई थीं। उनका आरोप है कि बाद में नदी के चौड़ीकरण और गहरीकरण के बजाय नदी के आसपास लगातार निर्माण बढ़ते गए।
उन्होंने छोटी पुल की ऊंचाई और लंबाई से लेकर करहिया तथा अजगरहा पुलों तक पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि इन निर्माणों में पर्याप्त बाढ़ क्षमता का ध्यान नहीं रखा गया,जिसका खामियाजा आज शहर की जनता भुगत रही है।
रिवर फ्रंट पर भी हमला—“नदी को जगह दो,सिर्फ किनारे सजाने से बाढ़ नहीं रुकेगी”
शिव सिंह ने रिवर फ्रंट निर्माण को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि नदी के दोनों किनारों पर जिस क्षेत्र में रिवर फ्रंट बनाया जा रहा है, वहां पहले नदी का पर्याप्त चौड़ीकरण और गहरीकरण होना चाहिए था।
उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में वर्ष 2016 और 2022 में ज्ञापन दिए गए, लेकिन उनकी मांगों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
नगर निगम की मंजूरी पर बड़ा सवाल—“बिना अनुमति निर्माण, फिर लोकार्पण कैसे?”
ईको पार्क को लेकर शिव सिंह ने नगर निगम की अनुमति पर भी सवाल खड़े किए। उनका दावा है कि सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में 25 अगस्त 2023 तक नगर निगम से ईको पार्क परियोजना की मंजूरी जारी नहीं होने की बात सामने आई थी।
शिव सिंह ने सवाल किया—“अगर अनुमति नहीं थी तो निर्माण किसके आदेश पर हुआ और लोकार्पण किस आधार पर कराया गया?”
उन्होंने इस पूरे मामले की दस्तावेजी जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
22 करोड़ के स्टॉर्म वॉटर प्रोजेक्ट पर भी उठाए सवाल
शहर के जलभराव को लेकर शिव सिंह ने अमृत योजना के तहत बने स्टॉर्म वॉटर नालों पर भी सवाल खड़े किए। उनका आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद बारिश में शहर के बड़े हिस्से में जलभराव की स्थिति बनी।
उन्होंने योजना की गुणवत्ता, डिजाइन, भुगतान, ठेकेदारी और उपयोगिता की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि परियोजना का उद्देश्य जलभराव रोकना था तो हर बारिश में वही समस्या क्यों सामने आती है?
स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर भी डिप्टी CM को घेरा
शिव सिंह ने डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल के स्वास्थ्य मंत्री होने पर भी निशाना साधते हुए कहा कि रीवा सहित प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। उन्होंने अस्पतालों की व्यवस्थाओं और मरीजों के साथ होने वाली कथित लापरवाही के मामलों पर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।
अंतिम वार—“जिम्मेदारी नहीं निभा सकते तो कुर्सी छोड़ दें”
शिव सिंह ने कहा कि रीवा की जनता बाढ़, जलभराव, नदी किनारे के निर्माण और स्वास्थ्य व्यवस्था जैसी समस्याओं से जूझ रही है। ऐसे में सरकार को केवल घोषणाओं और निर्माणों तक सीमित रहने के बजाय जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।
उन्होंने डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल को निशाने पर लेते हुए कहा कि यदि ईको पार्क और नदी से जुड़े निर्माण जनता के लिए खतरा हैं तो उन्हें हटाया जाए, और यदि सरकार ऐसा नहीं कर सकती तो जिम्मेदार लोग अपनी कुर्सी छोड़ दें।
रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी
No Previous Comments found.