मृत घोषित व्यक्ति एक दिन बाद मिला जीवित! संजय गांधी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल

रेवा : पोस्टमार्टम की प्रक्रिया तक पहुंचा मामला,मेडिकल कॉलेज के फर्स्ट ईयर छात्र द्वारा मृत्यु घोषित किए जाने की जानकारी,अस्पताल की जांच व्यवस्था और मेडिकल प्रोटोकॉल पर उठे गंभीर सवाल। दरअसल पूरा मामला रीवा जिले के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय से है जहां एक बार फिर अपनी कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला इतना गंभीर है कि जिस व्यक्ति को मृत घोषित कर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के लिए भेजे जाने की बात सामने आई,वही व्यक्ति जीवित पाया गया। घटना की जानकारी सामने आने के बाद अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था से लेकर मृत्यु की पुष्टि की प्रक्रिया तक पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ लिया है क्योंकि डॉक्टर पीके बघेल के अनुसार संबंधित व्यक्ति को मेडिकल कॉलेज के फर्स्ट ईयर के एक छात्र द्वारा मृत घोषित किया गया था। इसके बाद उसे पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के लिए भेजा गया।लेकिन उसके जीवित मिलने की जानकारी ने पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीर बना दिया।
आखिर मृत्यु की पुष्टि कैसे हुई?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या व्यक्ति की मृत्यु की चिकित्सकीय पुष्टि निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत की गई थी? यदि व्यक्ति जीवित था तो उसे मृत घोषित करने की नौबत कैसे आई? और उससे भी बड़ा सवाल यह है कि मृत्यु घोषित किए जाने के बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया किस स्तर पर आगे बढ़ी?
क्या फर्स्ट ईयर छात्र को थी इतनी बड़ी जिम्मेदारी?
मामले में मेडिकल कॉलेज के फर्स्ट ईयर छात्र द्वारा व्यक्ति को मृत घोषित किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद अस्पताल की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि क्या किसी जूनियर छात्र को वरिष्ठ चिकित्सक की प्रत्यक्ष निगरानी और पुष्टि के बिना मृत्यु घोषित करने की जिम्मेदारी दी गई थी?
यदि ऐसा हुआ है तो यह अस्पताल की कार्यप्रणाली और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा बेहद गंभीर विषय है। वहीं यदि वरिष्ठ चिकित्सक की निगरानी में पूरी प्रक्रिया हुई थी तो मृत्यु की पुष्टि में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई, इसका जवाब भी अस्पताल प्रबंधन को देना होगा।
जांच में सामने आना चाहिए पूरा सच
अब जरूरत केवल स्पष्टीकरण की नहीं, बल्कि निष्पक्ष और विस्तृत जांच की है। जांच में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति की जांच किसने की, मृत्यु घोषित करने से पहले किन चिकित्सकीय मानकों की पुष्टि की गई, किस डॉक्टर की निगरानी में प्रक्रिया हुई और पोस्टमार्टम के लिए भेजने की अनुमति किस स्तर से दी गई।
अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही तय होगी?
यह घटना सही परिस्थितियों और पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग करती है। यदि जांच में चिकित्सकीय लापरवाही या निर्धारित प्रक्रिया के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। वहीं यदि यह किसी गलतफहमी या अन्य तकनीकी कारण से हुआ है तो अस्पताल प्रबंधन को सार्वजनिक रूप से पूरे घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
एक व्यक्ति को मृत घोषित करना कोई सामान्य प्रक्रिया नहीं है। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति मृत्यु घोषित किए जाने के बाद जीवित पाया जाता है, तो यह केवल एक चूक का मामला नहीं बल्कि पूरी चिकित्सकीय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाली घटना है।
फिलहाल मामले की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी,लेकिन इस घटना ने संजय गांधी अस्पताल की मृत्यु की पुष्टि, चिकित्सकीय निगरानी और मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न जरूर लगा दिया है।

रिपोर्टर :  अर्जुन तिवारीं

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.