“राजनीतिक रोटियां सेंकने के चक्कर में एक पिता की मौत भी मत करवा देना नेताओं!”- दिवाकर द्विवेदी

रीवा : जच्चा-बच्चा मौत मामले पर सेमरिया से पूर्व विधानसभा प्रत्याशी का सियासी दलों पर तीखा प्रहार,बोले—दोषी कोई भी हो,कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन जांच को प्रभावित करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं!“दुखी परिवार के जख्मों पर राजनीति का नमक मत छिड़को” — नेताओं को दो टूक नसीहत*

द्विवेदी का सवाल न्याय चाहिए या संवेदनशील मामले को राजनीतिक अखाड़ा बनाने की होड़?
दरअसल पूरा मामला रीवा जिले के संजय गांधी अस्पताल का है जहां विगत दिवस जच्चा-बच्चा मौत के बेहद संवेदनशील मामले को लेकर रीवा में सियासी घमासान लगातार तेज होता जा रहा है। अब पूर्व सेमरिया विधानसभा प्रत्याशी दिवाकर द्विवेदी ने राजनीतिक दलों और नेताओं पर सीधा हमला बोलते हुए ऐसी बयानबाजी की है,जिसने पूरे मामले की राजनीतिक बहस को और गरमा दिया है।
दिवाकर द्विवेदी ने तीखे अंदाज में कहा—“अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के चक्कर में एक पिता की मौत भी मत करवा देना नेताओं।” उन्होंने कहा कि जिस परिवार ने अपना सब कुछ खो दिया, उसके दर्द को समझने की जरूरत है,न कि उसके जख्मों पर राजनीति का नमक छिड़कने की।
आरोप लगाने से पहले जांच का इंतजार करें—द्विवेदी
दिवाकर द्विवेदी का कहना है कि जच्चा-बच्चा मौत मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया और जांच चल रही है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले राजनीतिक बयानबाजी और किसी को सीधे दोषी ठहराने की कोशिश मामले को और उलझा सकती है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि जांच में किसी की लापरवाही या जिम्मेदारी सामने आती है तो दोषी व्यक्ति के खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन जांच एजेंसियों और प्रशासन को निष्पक्ष जांच करने का अवसर भी मिलना चाहिए।
“पीड़ित परिवार को न्याय चाहिए, सियासी तमाशा नहीं”
द्विवेदी ने राजनीतिक दलों को निशाने पर लेते हुए कहा कि संवेदनशील घटनाओं को राजनीतिक मंच बनाने से पीड़ित परिवार का दर्द कम नहीं होता। परिवार को चाहिए न्याय, निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई, न कि आरोप-प्रत्यारोप का राजनीतिक शोर।
उन्होंने नेताओं से अपील करते हुए कहा कि इस मामले को अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का जरिया न बनाया जाए। उनका कहना है कि परिवार की मानसिक और भावनात्मक स्थिति को देखते हुए सभी राजनीतिक दलों को संयम बरतना चाहिए।
बयान ने बढ़ाई सियासी हलचल
जच्चा-बच्चा मौत प्रकरण पहले से ही प्रशासन, अस्पताल व्यवस्था और राजनीतिक दलों के निशाने पर है। ऐसे में दिवाकर द्विवेदी का यह बयान सीधे तौर पर उन नेताओं पर हमला माना जा रहा है, जो इस मुद्दे को लेकर लगातार सरकार और प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं।
अब द्विवेदी के बयान के बाद सियासी पारा और चढ़ने की संभावना है। बड़ा सवाल यही है कि क्या राजनीतिक दल इस मामले को न्याय की लड़ाई तक सीमित रखेंगे या जच्चा-बच्चा मौत का मुद्दा आने वाले दिनों में बड़ा सियासी अखाड़ा बन जाएगा?

रिपोर्टर अर्जुन तिवारी 

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