जच्चा-बच्चा मौत मामले में शुभम सिंह बघेल का सरकार और अस्पताल प्रशासन पर हमला,बोले दोषी डॉक्टरों पर FIR हो, लाइसेंस भी रद्द किया जाए

रीवा - 12-13 दिन से आमरण अनशन पर बैठे परिजनों की मांगों पर सरकार की चुप्पी पर उठाए सवाल, बोले—कल्पना मिश्रा की मौत सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, व्यवस्था पर बड़ा सवाल! संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में जच्चा-बच्चा की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। मृतका कल्पना मिश्रा के पिता द्वारा दोषी डॉक्टरों पर एफआईआर की मांग को लेकर पिछले करीब 12-13 दिनों से जारी आमरण अनशन के बीच अब युवा नेता शुभम सिंह बघेल ने प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री और अस्पताल प्रशासन पर तीखा हमला बोला है।

मीडिया से चर्चा के दौरान शुभम सिंह बघेल ने कहा कि कल्पना मिश्रा से संबंधित सामने आया वीडियो बेहद मार्मिक और हृदयविदारक है। जच्चा और नवजात दोनों की मौत ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। उन्होंने कहा कि मृतका के परिवार के साथ उनकी संवेदनाएं हैं,लेकिन संवेदनाओं से आगे बढ़कर अब जवाबदेही तय करने का समय है। ड्यूटी डॉक्टरों पर FIR की मांग,सिर्फ विभागीय कार्रवाई से नहीं चलेगा काम शुभम सिंह बघेल ने कहा कि यदि जांच में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों की लापरवाही सामने आती है तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ऐसी गंभीर घटना में केवल विभागीय कार्रवाई करके जिम्मेदारी खत्म कैसे की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि जांच में जो भी जिम्मेदार पाया जाए, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और किसी भी स्तर पर राजनीतिक, प्रशासनिक या संस्थागत संरक्षण नहीं मिलना चाहिए।  

“दोष साबित हो तो लाइसेंस तक निरस्त किया जाए”

युवा नेता ने कहा कि यदि चिकित्सकीय लापरवाही साबित होती है तो जिम्मेदार चिकित्सकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के साथ लाइसेंस निरस्त करने जैसी कार्रवाई पर भी विचार होना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
उन्होंने कहा कि किसी परिवार का जच्चा और बच्चा दोनों को खो देना सामान्य घटना नहीं है। यह स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

12-13 दिन से अनशन, फिर भी समाधान क्यों नहीं?

शुभम सिंह बघेल ने आमरण अनशन पर बैठे मृतका के पिता और परिजनों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब एक परिवार लगातार कई दिनों से न्याय की मांग को लेकर अनशन पर बैठा है तो शासन-प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री और अस्पताल प्रशासन से मांग की कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए तथा जांच में दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि कल्पना मिश्रा की मौत को केवल एक अस्पताल की घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि लापरवाही हुई है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए और पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए।

रिपोर्टर -अर्जुन तिवारी 

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