14 दिन के आमरण अनशन पर पुलिस का एक्शन कल्पना मिश्रा के पिता समेत अनशनकारियों को धरना स्थल से हटाया

रीवा - जिले के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में जिम्मेदार डॉक्टरों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर पिछले 14 दिनों से आमरण अनशन कर रहे मृतका कल्पना मिश्रा के पिता समेत अन्य अनशनकारियों को बुधवार को पुलिस ने धरना स्थल से हटा दिया। प्रशासन ने कार्रवाई के पीछे मृतका कल्पना मिश्रा के पिता की लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को आधार बताया है। वहीं अनशनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई को बलपूर्वक हटाने की कार्रवाई बताते हुए नाराजगी जताई है।

14 दिन का अनशन,फिर भी FIR नहीं आंदोलनकारियों का सवाल

कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत के मामले में आपराधिक कार्रवाई की मांग को लेकर अनशनकारी लगातार धरने पर बैठे थे। उनका आरोप है कि मामले में विभागीय स्तर पर कुछ कार्रवाई जरूर हुई, लेकिन जिम्मेदार डॉक्टरों के खिलाफ FIR दर्ज करने की उनकी मूल मांग अब तक पूरी नहीं हुई।आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि जांच में डॉक्टरों या अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका सामने आती है तो केवल विभागीय कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।

पत्रकारों का धरना और उसी दौरान पुलिस कार्रवाई

बुधवार को सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में पत्रकारों के प्रवेश पर रोक के विरोध में पत्रकार भी अस्पताल परिसर के बाहर धरने पर बैठे थे। इसी दौरान पुलिस द्वारा आमरण अनशनकारियों को धरना स्थल से हटाए जाने की कार्रवाई की गई।
आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि पत्रकारों के धरने के बीच पुलिस बल के जरिए उन्हें वहां से हटाया गया। उनका कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे और प्रशासन को उनकी मांगों का समाधान करना चाहिए था।

स्वास्थ्य बिगड़ा तो हटाया, लेकिन मांगों का क्या?

प्रशासन की ओर से कहा गया है कि कल्पना मिश्रा के पिता के स्वास्थ्य में लगातार गिरावट को देखते हुए अनशनकारियों को धरना स्थल से हटाने की कार्रवाई की गई। हुजूर तहसीलदार के मुताबिक, जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए यह कदम उठाया।हालांकि, कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि धरना स्थल से अनशनकारी हट गए,लेकिन

14 दिनों से उठाई जा रही FIR की मांग का क्या होगा?

आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन केवल धरना स्थल तक सीमित नहीं है। उनकी मांग है कि जच्चा-बच्चा मौत मामले में जिम्मेदारी तय की जाए, संबंधित डॉक्टरों एवं अन्य लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो और दोष सिद्ध होने पर FIR सहित आपराधिक कार्रवाई की जाए। फिलहाल पुलिस की कार्रवाई के बाद मामले को लेकर आंदोलनकारियों में नाराजगी है और प्रशासन के सामने अब स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ-साथ FIR की मांग और आंदोलन से जुड़े सवालों को लेकर भी जवाबदेही का मुद्दा खड़ा हो गया है।
 
रिपोर्टर - अर्जुन तिवारी
 

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