डॉ. सोनल अग्रवाल की कार्रवाई और 2023 के पुराने मामले पर सवाल, वायरल वीडियो ने बढ़ाई सियासी गर्मी!
रीवा - जिले के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बेटे की मौत का मामला एक बार फिर गरमा गया है। इस बार वजह अस्पताल की कार्रवाई नहीं, बल्कि मीडिया के सवाल पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल का वायरल जवाब है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित सेवा संकल्प कार्यक्रम के दौरान मीडिया ने डॉ. सोनल अग्रवाल के खिलाफ हुई कार्रवाई और वर्ष 2023 से जुड़े पुराने विभागीय मामले को लेकर स्वास्थ्य मंत्री से सवाल किया। वायरल वीडियो में राजेंद्र शुक्ल कहते सुनाई दे रहे हैं—“जब आपको सब पता है तो हमसे क्यों पूछ रहे हैं?”
मंत्री का यह जवाब अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। संवेदनशील जच्चा-बच्चा मौत मामले में मीडिया द्वारा पूछे गए सवाल का सीधा जवाब नहीं मिलने को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सवाल गंभीर था, जवाब ने खड़े कर दिए और सवाल मीडिया का सवाल डॉ. सोनल अग्रवाल पर हुई कार्रवाई और वर्ष 2023 के पुराने विभागीय मामले को लेकर था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक 2023 में निजी नर्सिंग होम भेजे जाने संबंधी शिकायतों की जांच हुई थी और कार्रवाई की प्रक्रिया चली थी। बाद में सितंबर 2026 में डॉ. सोनल अग्रवाल के खिलाफ सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जानकारी सामने आई।
लेकिन यहां दो अलग-अलग मामलों को अलग रखना जरूरी है। 2023 की विभागीय कार्रवाई अपने आप में कल्पना मिश्रा मौत मामले में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत में डॉ. सोनल अग्रवाल की भूमिका को लेकर जांच का निष्कर्ष अलग से सामने आना बाकी है। यही वह सवाल था जिसका जवाब मीडिया जानना चाहता था। सब पता है’ तो फिर आधिकारिक तौर पर क्या पता है? मंत्री के वायरल बयान ने सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा कर दिया है कि यदि मीडिया को “सब पता” है, तो सरकार और विभाग की ओर से अब तक इस मामले की पूरी आधिकारिक तस्वीर सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? क्या 2023 की कार्रवाई और 2026 की घटना के बीच कोई विभागीय कड़ी है?
क्या कल्पना मिश्रा मामले की जांच में डॉ. सोनल अग्रवाल की भूमिका तय हो चुकी है? यदि नहीं, तो उनकी भूमिका पर जांच किस स्तर पर है? और जच्चा-बच्चा की मौत के लिए अंतिम रूप से जिम्मेदार कौन है? इन सवालों का जवाब सोशल मीडिया की बहस से नहीं, बल्कि जांच रिपोर्ट और आधिकारिक दस्तावेजों से सामने आना चाहिए। दो मौतें,कई कार्रवाई… फिर भी जवाबदेही का इंतजार 26 अगस्त की घटना के बाद चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की गई। प्रशासनिक स्तर पर भी कदम उठाए गए और मामले की जांच शुरू हुई। इसके बावजूद मृतका के परिजनों और प्रदर्शनकारियों की ओर से लगातार यह मांग उठती रही है कि सिर्फ निलंबन और विभागीय कार्रवाई पर्याप्त नहीं, बल्कि वास्तविक जिम्मेदारी तय कर आपराधिक कार्रवाई की जाए।
अब स्वास्थ्य मंत्री का वायरल वीडियो इस पूरे घटनाक्रम में एक नया राजनीतिक और प्रशासनिक सवाल जोड़ रहा है।
वायरल वीडियो से बड़ा मुद्दा—जवाबदेही किसी वायरल वीडियो के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। बयान का पूरा संदर्भ और मूल वीडियो सामने आना जरूरी है। इसी तरह वर्ष 2023 के कथित टर्मिनेशन/विभागीय आदेश की भी आधिकारिक प्रति और वर्तमान कार्रवाई से उसका संबंध स्पष्ट किया जाना जरूरी है। लेकिन सवाल अपनी जगह कायम है
कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत के बाद आखिर जवाबदेही किसकी तय होगी?और यदि सवाल पूछने पर जवाब यही है कि ‘आपको सब पता है’,तो फिर सरकार और विभाग की ओर से वह पूरा सच जनता के सामने कब आएगा?
रिपोर्टर - अर्जुन तिवारी
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