कालेज चौराहा के रेस्टोरेंट पर गंभीर सवाल!पत्रकार से कथित अभद्रता के बाद उठी जांच की मांग

रीवा : भोजन खुद तैयार होता है या बाहर से मंगाकर परोसा जाता है? कर्मचारी के कथित बयान ने खड़े किए सवाल!फूड लाइसेंस से लेकर गेस्ट हाउस संचालन तक दस्तावेजों की जांच की उठी मांग!पत्रकार के सवालों का जवाब देने के बजाय कथित अभद्र व्यवहार का आरोप,अब जिम्मेदार विभाग पर निगाह!

खबर मध्यप्रदेश के रीवा जिले से है जहां पर शहर के कालेज चौराहा क्षेत्र में संचालित एक रेस्टोरेंट की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रतिष्ठान की संचालन व्यवस्था और ग्राहकों को उपलब्ध कराए जा रहे भोजन की जानकारी जुटाने पहुंचे एक पत्रकार के साथ कथित अभद्र व्यवहार किए जाने का आरोप भी सामने आया है। मामले में रेस्टोरेंट संचालक ज्ञान सिंह से जुड़े व्यवहार और प्रतिष्ठान की वैधानिक स्थिति को लेकर जांच की मांग उठने लगी है।मामला उस समय सामने आया,जब रेस्टोरेंट में भोजन तैयार करने और ग्राहकों के ऑर्डर की आपूर्ति की व्यवस्था को लेकर जानकारी जुटाने पत्रकार मौके पर पहुंचे। वहां मौजूद कर्मचारी से जब पूछा गया कि ग्राहकों के लिए भोजन कहां तैयार किया जाता है,तो कर्मचारी ने कथित तौर पर बताया कि ऑर्डर मिलने के बाद ‘सांवरिया’ नामक दूसरे रेस्टोरेंट से भोजन मंगवाकर ग्राहकों को उपलब्ध कराया जाता है।
बाहर से भोजन मंगाकर परोसा जा रहा है तो लाइसेंस क्या कहता है?
कर्मचारी के कथित बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल खाद्य संचालन की वैधानिक व्यवस्था को लेकर खड़ा हो गया है। यदि प्रतिष्ठान में भोजन स्वयं तैयार नहीं होता और किसी दूसरे रेस्टोरेंट से तैयार भोजन मंगाकर ग्राहकों को परोसा जाता है, तो ऐसी गतिविधि के लिए संबंधित प्रतिष्ठान के पास किस प्रकार का खाद्य पंजीयन या लाइसेंस है और उसमें कौन-कौन सी गतिविधियां दर्ज हैं यह जांच का विषय है।
सवाल यह भी है कि भोजन की आपूर्ति करने वाले दूसरे प्रतिष्ठान की भूमिका क्या है और तैयार भोजन की खरीद-बिक्री अथवा आपूर्ति से संबंधित आवश्यक दस्तावेज और खाद्य सुरक्षा अनुपालन किसके जिम्मे है?
इन सवालों का अंतिम जवाब दस्तावेजों और विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
रेस्टोरेंट के साथ गेस्ट हाउस संचालन की भी चर्चा
मामले में रेस्टोरेंट के साथ गेस्ट हाउस संचालन की चर्चा ने भी सवालों का दायरा बढ़ा दिया है। ऐसे में संबंधित विभागों को यह स्पष्ट करना होगा कि प्रतिष्ठान के पास फूड लाइसेंस,व्यवसायिक पंजीयन,गेस्ट हाउस संचालन की अनुमति तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं।
यदि सभी अनुमतियां मौजूद हैं तो जांच के दौरान स्थिति साफ हो सकती है। वहीं, यदि संचालन में किसी प्रकार की अनियमितता मिलती है तो संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई का सवाल उठेगा।
पत्रकार से कथित अभद्रता ने मामले को और गरमाया
प्रतिष्ठान की व्यवस्थाओं पर सवाल अपनी जगह हैं, लेकिन जानकारी जुटाने पहुंचे पत्रकार के साथ कथित अभद्र व्यवहार का आरोप भी अब चर्चा का विषय बन गया है।

आरोप है कि पत्रकार द्वारा सामान्य सवाल पूछे जाने पर रेस्टोरेंट संचालक ज्ञान सिंह ने जानकारी देने के बजाय कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया। हालांकि, इस आरोप पर संबंधित संचालक का पक्ष सामने आना बाकी है।

सवाल सीधा है—यदि प्रतिष्ठान की व्यवस्था पूरी तरह नियमों के अनुरूप है,तो उसके संचालन,लाइसेंस और भोजन की व्यवस्था से जुड़े सवालों का तथ्यात्मक जवाब देने में आपत्ति क्यों होनी चाहिए?
अब जांच की जरूरत, केवल सफाई से नहीं चलेगा मामला
मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण भूमिका खाद्य सुरक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की है। विभागीय स्तर पर प्रतिष्ठान के दस्तावेजों की जांच के साथ मौके का निरीक्षण किया जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

जांच में खास तौर पर यह देखा जाना जरूरी है कि—

- प्रतिष्ठान के पास वैध फूड लाइसेंस/पंजीयन है या नहीं।
- लाइसेंस में दर्ज गतिविधि और मौके पर संचालित गतिविधि में समानता है या नहीं।
- भोजन वास्तव में परिसर में तैयार होता है या दूसरे प्रतिष्ठान से मंगाया जाता है।
- बाहर से भोजन मंगाकर ग्राहकों को परोसने की व्यवस्था के लिए आवश्यक अनुपालन किया जा रहा है या नहीं।
- गेस्ट हाउस संचालन के लिए आवश्यक अनुमति और पंजीयन मौजूद हैं या नहीं।
- खाद्य पदार्थों की खरीद, आपूर्ति और भंडारण से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध हैं या नहीं।

फिलहाल उपलब्ध आरोपों और कथित बयानों से किसी नियम उल्लंघन का अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन सवाल इतने जरूर हैं कि जिम्मेदार विभाग द्वारा दस्तावेजों की जांच और स्थल निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट की जाए।
अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इस मामले को महज आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रखता है या मौके पर जांच कर रेस्टोरेंट की वास्तविक संचालन व्यवस्था और वैधानिक स्थिति सामने लाता है।

रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी

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