संजय गांधी अस्पताल में मारपीट के आरोप पर AAP का तीखा हमला

रेवा - राजीव सिंह परिहार का सवाल अस्पताल में इलाज का रिकॉर्ड बनेगा या मरीज-परिजनों से कथित मारपीट का? पुलिस और सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी के बावजूद विवाद पर उठे सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग ! संजय गांधी अस्पताल रीवा में मरीज के परिजन के साथ कथित मारपीट का मामला अब राजनीतिक रूप लेता नजर आ रहा है। घटना को लेकर आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एवं अधिवक्ता राजीव सिंह परिहार ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

राजीव सिंह परिहार ने सवाल उठाया कि जब अस्पताल परिसर में पुलिस और सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी रहती है, तो इलाज कराने पहुंचे मरीज या उसके परिजन के साथ कथित मारपीट की नौबत आखिर क्यों आती है? अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य मरीज और उनके परिजनों को सुरक्षा देना है या विवाद की स्थिति को नियंत्रित करने के बाद भी मामला हाथापाई तक पहुंचने देना?

इलाज का रिकॉर्ड बनेगा या मारपीट का?

AAP प्रदेश प्रवक्ता ने सवाल किया कि संजय गांधी अस्पताल की पहचान बेहतर उपचार और मरीजों की सेवा से बनेगी या फिर मरीजों और उनके परिजनों से कथित विवाद एवं मारपीट के आरोपों से? उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल में आने वाला व्यक्ति पहले ही बीमारी, आर्थिक परेशानी और मानसिक तनाव से जूझ रहा होता है। ऐसे में यदि उसके साथ दुर्व्यवहार या मारपीट के आरोप सामने आते हैं तो यह गंभीर सवाल खड़ा करता है कि अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों के साथ व्यवहार की व्यवस्था आखिर कैसी है।

उन्होंने कहा कि यदि किसी मरीज का परिजन अस्पताल की अव्यवस्थाओं की फोटो या वीडियो बना रहा था, तो उसकी शिकायत का जवाब नियम और पारदर्शिता के तहत दिया जाना चाहिए। कैमरा चलाने या व्यवस्था पर सवाल उठाने के आरोप में कथित हाथापाई की नौबत क्यों आई, यह जांच का विषय है।

पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद स्थिति क्यों बिगड़ी?

राजीव सिंह परिहार ने कहा कि अस्पताल में पुलिस एवं सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी के बावजूद यदि विवाद इतना बढ़ा कि डॉक्टरों या कर्मचारियों पर मरीज के परिजन से कथित मारपीट के आरोप लगे, तो पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी और भूमिका तय होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और संबंधित पक्षों के वीडियो/फोटो सहित पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही डॉक्टरों, सुरक्षा कर्मियों और अन्य संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच हो तथा जांच में जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। अस्पताल में सवाल पूछना अपराध है या व्यवस्था सुधारना जिम्मेदारी? AAP नेता ने कहा कि सरकारी अस्पताल जनता के पैसे से संचालित होते हैं और वहां आने वाला प्रत्येक मरीज सम्मान एवं सुरक्षित उपचार का हकदार है। यदि अस्पताल की व्यवस्था पर कोई सवाल उठाता है तो उसका जवाब तथ्यों और व्यवस्था में सुधार से दिया जाना चाहिए, कथित मारपीट से नहीं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की वास्तविकता सार्वजनिक की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि घटना के समय कौन-कौन मौके पर मौजूद था, विवाद की शुरुआत कैसे हुई और कथित मारपीट की स्थिति आखिर क्यों बनी। उन्होंने कहा कि मरीज इलाज कराने अस्पताल पहुंचता है, विवाद करने नहीं। इसलिए अब सबसे बड़ा सवाल यही है—संजय गांधी अस्पताल में मरीजों को बेहतर इलाज और सुरक्षा मिलेगी या फिर ऐसी घटनाओं पर सवाल उठते रहेंगे?

रिपोर्टर - अर्जुन तिवारी 

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