संजय गांधी अस्पताल में अव्यवस्थाओं का वीडियो बनाना पड़ा भारी

रीवा : संजय गांधी अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों को बेहतर इलाज और सुविधाएं देने के बजाय अब अस्पताल की अव्यवस्थाओं का फोटो-वीडियो बनाना भी कथित तौर पर भारी पड़ने लगा है। आरोप है कि अस्पताल की व्यवस्थाओं से जुड़े फोटो और वीडियो बनाए जाने पर सुरक्षाकर्मियों एवं कुछ डॉक्टरों ने मिलकर एक मरीज के परिजन के साथ मारपीट की।मामले के सामने आने के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और मरीजों के परिजनों के साथ व्यवहार को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप लगाने वाले पक्ष का कहना है कि अस्पताल परिसर में व्याप्त अव्यवस्थाओं को सामने लाने के लिए फोटो-वीडियो बनाया जा रहा था, इसी दौरान विवाद हुआ और कथित तौर पर मारपीट की गई।

अव्यवस्था पर सवाल उठाने वालों से मारपीट क्यों?
संजय गांधी अस्पताल में आए दिन मरीजों और उनके परिजनों को विभिन्न समस्याओं का सामना करने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति अस्पताल की व्यवस्था, साफ-सफाई, इलाज या अन्य सुविधाओं से संबंधित स्थिति का फोटो-वीडियो बनाता है तो उसका जवाब मारपीट से दिया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि अस्पताल की व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं तो फोटो-वीडियो बनाने पर आपत्ति क्यों और यदि व्यवस्थाओं में कमी है तो उसे सुधारने के बजाय कैमरा चलाने वाले पर कार्रवाई क्यों?
इलाज पर ध्यान या कैमरा बंद कराने पर?
मामले ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। आरोप लगाने वाले परिजनों का कहना है कि अस्पताल में डॉक्टर और कर्मचारी मरीजों के इलाज तथा व्यवस्थाओं को सुधारने पर अधिक ध्यान दें, तो ऐसी शिकायतों और वीडियो बनाने की नौबत ही नहीं आएगी।फिलहाल पूरे मामले में यह जांच का विषय है कि वास्तव में विवाद की शुरुआत कैसे हुई, फोटो-वीडियो बनाने वाले परिजन के साथ किसने मारपीट की और सुरक्षा कर्मियों तथा अस्पताल स्टाफ की इसमें क्या भूमिका रही। अस्पताल प्रबंधन और संबंधित पक्ष का आधिकारिक बयान सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
बड़ा सवाल
क्या संजय गांधी अस्पताल में अव्यवस्थाओं को कैमरे में कैद करना अपराध है, या फिर अस्पताल प्रशासन को शिकायतों का समाधान कर पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए?

रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी 

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