गंगेव जनपद में भवन ध्वस्तीकरण पर उठे गंभीर सवाल,मलबे की कीमत से ज्यादा भुगतान का आरोप

रीवा : रीवा जिले के जनपद पंचायत गंगेव में शासकीय भवनों के ध्वस्तीकरण और मलबे के निस्तारण से जुड़ा मामला अब सवालों के घेरे में आ गया है। मनगवां युवा कांग्रेस विधानसभा अध्यक्ष प्रकाश तिवारी ने आरोप लगाया है कि जनपद पंचायत भवन, ग्रामसेवक क्वार्टरों सहित अन्य शासकीय परिसरों को तोड़ने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और वित्तीय नियमों की अनदेखी की गई है।तिवारी का दावा है कि इतने बड़े स्तर पर शासकीय परिसंपत्तियों के ध्वस्तीकरण एवं निस्तारण की प्रक्रिया में ऑफलाइन निविदा का सहारा लिया गया,जबकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से किए जाने की आवश्यकता थी। उन्होंने संबंधित आदेश और दस्तावेजों की जांच कराए जाने की मांग की है।

मलबे की कीमत लाखों में, फिर हटाने के नाम पर भुगतान क्यों?
शिकायत में सबसे गंभीर सवाल भवनों से निकले मलबे और उसमें मौजूद सामग्री को लेकर उठाया गया है। आरोप है कि ध्वस्तीकरण से निकलने वाली लोहे की पाइप, एंगल, दरवाजे, खिड़कियां, पटियां, सरिया, पत्थर और अन्य निर्माण सामग्री की कीमत लाखों रुपये हो सकती थी।
शिकायतकर्ता के अनुसार इन सामग्रियों का मूल्य करीब 10 से 15 लाख रुपये तक होने का अनुमान है। आरोप है कि यदि शासकीय संपत्ति का विधिवत मूल्यांकन एवं नीलामी होती तो शासन को राजस्व प्राप्त हो सकता था। इसके विपरीत 'श्री लक्ष्मी कंस्ट्रक्शन कंपनी' को मलबा हटाने के नाम पर ₹1,95,216 का भुगतान स्वीकृत किए जाने का दावा किया गया है।
यही बिंदु अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल बनकर सामने आया है—क्या शासकीय मलबे का मूल्यांकन किया गया था? यदि किया गया था तो उसकी नीलामी क्यों नहीं हुई? और यदि मलबे की कोई कीमत नहीं थी तो उसके निस्तारण के लिए ₹1.95 लाख का भुगतान किस आधार पर किया गया?
विवादित दुकानों की राशि से भुगतान का भी आरोप
प्रकाश तिवारी ने यह भी आरोप लगाया है कि भुगतान के लिए जिस खाते का इस्तेमाल किया गया, उसमें विवादित दुकानों की नीलामी से प्राप्त राशि जमा थी। उनका कहना है कि दुकानों के आवंटन को लेकर पहले से विवाद और न्यायालयीन प्रकरण होने के बावजूद उसी राशि से भुगतान किया जाना वित्तीय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने पूरे खाते की जांच, भुगतान की स्वीकृति, संबंधित फाइल, माप-पुस्तिका, निविदा प्रक्रिया, तकनीकी स्वीकृति तथा मलबे के मूल्यांकन की जांच कराने की मांग की है।
CEO,अध्यक्ष और विधायक की भूमिका की जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने जनपद पंचायत के अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे मामले में जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद अध्यक्ष और स्थानीय राजनीतिक प्रभाव से जुड़े लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों अथवा जनप्रतिनिधियों का पक्ष सामने नहीं आया है। ऐसे में आरोपों की वास्तविकता दस्तावेजों, भुगतान अभिलेखों, निविदा प्रक्रिया और शासकीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

उठ रहे बड़े सवाल

- क्या भवन ध्वस्तीकरण के लिए नियमानुसार निविदा प्रक्रिया अपनाई गई?
- क्या ध्वस्तीकरण से पहले शासकीय सामग्री का मूल्यांकन कराया गया था?
- मलबे में मौजूद लोहे, दरवाजे, खिड़की, सरिया और पत्थरों का क्या हुआ?
- क्या इन सामग्रियों की नीलामी कर शासन को राजस्व प्राप्त कराया गया?
- श्री लक्ष्मी कंस्ट्रक्शन कंपनी को ₹1,95,216 का भुगतान किस आधार पर किया गया?
- भुगतान के लिए विवादित दुकानों की राशि वाले खाते का इस्तेमाल क्यों किया गया?
- पूरे मामले में संबंधित अधिकारी और जनप्रतिनिधियों की क्या भूमिका रही?
प्रकाश तिवारी ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यदि शासकीय संपत्ति अथवा राशि के संबंध में अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

रिपोर्टर : अर्जुन तिवारी 

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